मुंबई एयरपोर्ट के प्लान को लेकर सरकार का रुख
मुंबई एयरपोर्ट से जुड़े अडानी ग्रुप के प्लान को लेकर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। रिपोर्ट के अनुसार एयरलाइंस कंपनियों ने प्रस्ताव का विरोध किया था। इसके बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरपोर्ट की क्षमता और ऑपरेशनल व्यवस्था को लेकर नए रोडमैप पर काम करने को कहा है। मुंबई एयरपोर्ट अडानी मामले में विवाद का मुख्य मुद्दा एयरपोर्ट पर उपलब्ध क्षमता, स्लॉट और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन से जुड़ा है।
एयरपोर्ट को अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स लिमिटेड मैनेज करती है, जो अडानी ग्रुप की कंपनी है। रिपोर्ट के अनुसार एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने और टर्मिनल से जुड़े विकास कार्यों को लेकर योजना बनाई जा रही थी। इस योजना पर एयरलाइंस की ओर से आपत्ति जताई गई। सरकार की ओर से अब एयरपोर्ट की जरूरतों और एयरलाइंस की परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आगे की योजना पर काम करने की बात सामने आई है।
एयरलाइंस ने प्रस्ताव का क्यों किया विरोध?
मुंबई एयरपोर्ट पर स्लॉट और उड़ानों की क्षमता एयरलाइंस के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ एयरलाइंस ने अडानी समूह की योजना को लेकर चिंता जताई थी। मुंबई एयरपोर्ट अडानी प्लान से जुड़े प्रस्ताव में एयरपोर्ट के संचालन और क्षमता के पुनर्विकास से जुड़े पहलू शामिल थे। एयरलाइंस का कहना था कि मौजूदा परिचालन व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव से उड़ानों और यात्रियों पर असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी एयरपोर्ट की क्षमता और ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगे की योजना तैयार करने की दिशा में कदम उठाया है। मुंबई एयरपोर्ट पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों का संचालन होता है। इसलिए किसी भी बड़े बदलाव का असर एयरलाइंस और यात्रियों दोनों पर पड़ सकता है। एयरपोर्ट के विकास और एयरलाइंस की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
नए रोडमैप पर काम करने को कहा गया
रिपोर्ट के अनुसार सरकार की ओर से एयरपोर्ट के विकास को लेकर नया रोडमैप तैयार करने को कहा गया है। इसमें टर्मिनल क्षमता, अंतरराष्ट्रीय स्लॉट और एयरलाइंस की परिचालन जरूरतों जैसे मुद्दों को शामिल किया जा सकता है। मुंबई एयरपोर्ट अडानी विवाद में सरकार का रुख सामने आने के बाद अब आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने के लिए पहले भी विभिन्न योजनाओं पर काम होता रहा है।
मुंबई जैसे बड़े विमानन केंद्र पर यात्रियों की संख्या और उड़ानों की जरूरत को देखते हुए बुनियादी ढांचे का विकास महत्वपूर्ण है। साथ ही एयरलाइंस के लिए स्लॉट और ऑपरेशनल क्षमता भी जरूरी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के बजाय नए रोडमैप के जरिए सभी पक्षों की जरूरतों को ध्यान में रखने का संकेत दिया है। अब एयरपोर्ट प्रबंधन, एयरलाइंस और सरकार के बीच आगे की बातचीत के आधार पर योजना का अगला स्वरूप तय हो सकता है।


