भारत की तेज आर्थिक रफ्तार के बीच तीन देश आगे
भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। हालांकि एशिया में कुछ ऐसे देश हैं, जिनकी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार इस समय भारत से ज्यादा रहने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार एशिया की इकॉनमी में तीन देशों की GDP ग्रोथ भारत से अधिक रहने की संभावना है। भारत के लिए इस साल GDP ग्रोथ का अनुमान करीब 7.1 प्रतिशत बताया गया है। इसके मुकाबले कुछ एशियाई देशों की आर्थिक वृद्धि दर इससे अधिक रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और भूटान जैसे देशों का उल्लेख किया गया है। एशियाई विकास बैंक के सितंबर 2026 के आउटलुक के अनुसार भारत की GDP ग्रोथ के अनुमान को लेकर अलग-अलग तिमाहियों में भी आंकड़े दिए गए हैं। भारत की अर्थव्यवस्था के मजबूत रहने की उम्मीद के बावजूद क्षेत्र के कुछ छोटे और मध्यम आकार के देश तेज वृद्धि दर्ज कर सकते हैं। इससे एशिया की आर्थिक तस्वीर में अलग-अलग देशों की विकास गति सामने आती है।
ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान की ग्रोथ पर नजर
रिपोर्ट के अनुसार ताजिकिस्तान की अर्थव्यवस्था की GDP ग्रोथ इस साल करीब 9 प्रतिशत रहने का अनुमान बताया गया है। उज्बेकिस्तान के लिए भी करीब 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि का अनुमान है। एशिया की इकॉनमी में इन देशों की तेज वृद्धि का कारण अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों और निवेश से जुड़ी परिस्थितियों को बताया गया है। रिपोर्ट में जॉर्जिया और तुर्कमेनिस्तान सहित अन्य देशों की वृद्धि दर का भी उल्लेख किया गया है।
एशिया के अलग-अलग देशों में आर्थिक विकास की रफ्तार एक जैसी नहीं है। कुछ देशों को निर्यात, निवेश और घरेलू मांग से फायदा मिल रहा है, जबकि कुछ देशों की अर्थव्यवस्थाओं के सामने अलग चुनौतियां हैं। भारत के पड़ोसी देशों और मध्य एशियाई देशों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में विकास की तस्वीर लगातार बदल रही है। GDP ग्रोथ के ये अनुमान आगे की आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर बदल भी सकते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्या है तस्वीर?
रिपोर्ट में इस साल करीब 7.1 प्रतिशत GDP ग्रोथ का अनुमान बताया गया है। यह दर भी मजबूत आर्थिक वृद्धि को दिखाती है। एशिया की इकॉनमी में भारत का आकार और योगदान कई दूसरे देशों की तुलना में काफी बड़ा है, इसलिए उसकी GDP ग्रोथ का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ता है। रिपोर्ट में भारत के साथ दूसरे एशियाई देशों के विकास अनुमानों की तुलना की गई है।
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए घरेलू मांग, कृषि, टैक्स में राहत और निर्यात जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण माना गया है। वहीं वैश्विक व्यापार, कच्चे माल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों का असर भी आगे की वृद्धि पर पड़ सकता है। भारत के लिए चुनौती तेज विकास को बनाए रखने के साथ रोजगार और निवेश को गति देने की है। एशिया के दूसरे देशों की तेज वृद्धि के बीच भारत की आर्थिक स्थिति पर वैश्विक संस्थाओं के अनुमान पर नजर बनी रहेगी।


