IIT दिल्ली में छात्र की मौत के बाद बढ़ा विवाद
IIT दिल्ली के कैंपस में 31 वर्षीय MSc फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद अब जांच समिति के गठन और उसकी विश्वसनीयता तक पहुंच गया है। 22 अगस्त को हुई इस घटना के बाद छात्रों में नाराजगी बढ़ी। छात्रों ने प्रशासन से जवाब मांगा और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि सिर्फ एक समिति बना देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसी जांच चाहिए जिस पर छात्रों और परिवार दोनों को भरोसा हो। इसी दबाव के बीच IIT दिल्ली ने बाहरी जांच समिति बनाने का फैसला किया था। लेकिन समिति के प्रस्तावित अध्यक्ष के ही हटने से अब जांच प्रक्रिया एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।
कौन थे ऋषिकेश कुमार?
ऋषिकेश कुमार IIT दिल्ली में MSc फिजिक्स के छात्र थे। IIT दिल्ली के मुताबिक उन्होंने जुलाई 2025 में संस्थान में दाखिला लिया था और कैंपस के हॉस्टल में रह रहे थे। संस्थान के अनुसार, ऋषिकेश के स्वास्थ्य को लेकर पहले भी चिंताएं सामने आई थीं और उन्हें चिकित्सा तथा काउंसलिंग सहायता उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन 22 अगस्त की घटना ने पूरे कैंपस को झकझोर दिया। साथ पढ़ने वाले छात्रों ने उन्हें मददगार और अच्छे व्यवहार वाला छात्र बताया है। यही वजह है कि IIT-दिल्ली छात्र की मौत के बाद छात्रों का एक बड़ा वर्ग इस सवाल का जवाब चाहता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक युवा छात्र की जिंदगी इस तरह खत्म हो गई।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
पुलिस के मुताबिक 22 अगस्त को ऋषिकेश की मौत IIT दिल्ली के Lecture Hall Complex में हुई। पुलिस ने घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं होने की बात कही है। यानी जांच एजेंसियों के सामने अब कई सवाल हैं—घटना से पहले ऋषिकेश की स्थिति क्या थी? उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे? उनके स्वास्थ्य और शैक्षणिक जीवन से जुड़ी परिस्थितियां क्या थीं? और क्या किसी तरह का दबाव या अन्य परिस्थिति इस घटना से जुड़ी थी? इन सभी पहलुओं की जांच पुलिस कर रही है।
ऋषिकेश की मौत के बाद IIT दिल्ली कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। छात्रों की मुख्य मांग थी कि मामले की जांच संस्थान के भीतर सीमित न रहे, बल्कि स्वतंत्र तरीके से हो। छात्रों ने प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। उनकी मांगों में स्वतंत्र जांच के अलावा परिवार को आर्थिक सहायता और छात्र कल्याण व्यवस्था में बदलाव भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक छात्र की मौत का मामला नहीं है, बल्कि कैंपस में छात्रों की समस्याओं और उनके समाधान की पूरी व्यवस्था पर सवाल है।
IIT दिल्ली ने बनाई बाहरी जांच समिति
इसी दबाव के बाद IIT दिल्ली ने बाहरी जांच समिति बनाने की घोषणा की। IIT दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने छात्रों को भेजे ईमेल के जरिए बाहरी जांच समिति के गठन की जानकारी दी।
प्रस्तावित समिति में पांच सदस्य रखे गए थे। इसमें उत्तराखंड के पूर्व DGP और IIT दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार को अध्यक्ष बनाया गया था। AIIMS नई दिल्ली के Psychiatry Department के प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शर्मा को भी समिति में शामिल किया गया था। इसके अलावा दो छात्र प्रतिनिधि और IIT दिल्ली के Registrar को समिति में रखा गया था। Registrar को समिति के सचिव और संयोजक की जिम्मेदारी दी जानी थी। संस्थान ने कहा था कि समिति घटना की परिस्थितियों की व्यापक जांच करेगी और छात्र सहायता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी उपाय सुझाएगी। यानी समिति का उद्देश्य सिर्फ घटना की परिस्थितियों को देखना नहीं था, बल्कि IIT दिल्ली में छात्र सहायता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी सुझाव देना भी था।
जांच समिति के चेयरमैन अशोक कुमार ने किया किनारा
अब इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा ट्विस्ट आया है। समिति के प्रस्तावित अध्यक्ष अशोक कुमार ने खुद को पैनल से अलग कर लिया है। IIT दिल्ली के सूत्रों के मुताबिक अशोक कुमार ने इसके पीछे अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं को वजह बताया है। यानी जिस समिति को निष्पक्ष और बाहरी जांच के लिए बनाया गया था, उसके घोषित अध्यक्ष अब उसका हिस्सा नहीं होंगे। इस घटनाक्रम के बाद IIT दिल्ली को समिति के लिए नए अध्यक्ष का चयन करना होगा। संस्थान की ओर से कहा गया है कि नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा जल्द की जाएगी।
चेयरमैन के हटने के बाद फिर उठे स्वतंत्रता पर सवाल
लेकिन इस बदलाव ने छात्रों की उस चिंता को फिर सामने ला दिया है कि जांच की प्रक्रिया कितनी स्वतंत्र और विश्वसनीय होगी। अशोक कुमार उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक रह चुके हैं और IIT दिल्ली के पूर्व छात्र भी हैं। उन्हें समिति की अध्यक्षता के लिए चुना जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि वह पुलिस प्रशासन का लंबा अनुभव रखते हैं और IIT दिल्ली से उनका पुराना संबंध भी है। लेकिन उन्होंने समिति से हटने का फैसला किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने किसी आरोप या विवाद को वजह नहीं बताया, बल्कि अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं का हवाला दिया है।
इसलिए इस समय यह कहना सही नहीं होगा कि उनका हटना किसी जांच संबंधी निष्कर्ष या आरोप का परिणाम है। अब नजर इस बात पर है कि IIT दिल्ली अगला अध्यक्ष किसे बनाता है और क्या नई नियुक्ति छात्रों की स्वतंत्र जांच की मांग को संतुष्ट कर पाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि समिति के गठन के बाद भी छात्रों की आपत्ति पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।
छात्रों ने पूर्व हाई कोर्ट जज को चेयरमैन बनाने की मांग की
प्रदर्शनकारी छात्रों के एक वर्ग ने समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए मांग की थी कि जांच का नेतृत्व किसी पूर्व हाई कोर्ट जज को करना चाहिए। छात्रों की दलील थी कि जिस मामले में संस्थान की व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं, उसकी जांच ऐसी संस्था या व्यक्ति से होनी चाहिए जिसकी स्वतंत्रता पर कोई सवाल न उठ सके। यानी छात्रों की चिंता केवल समिति बनाने तक सीमित नहीं है। वे समिति की संरचना, उसके अधिकार और उसकी रिपोर्ट पर कार्रवाई की गारंटी भी चाहते हैं। यही वजह है कि IIT-दिल्ली छात्र की मौत का मामला अब जांच समिति की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है।
पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया
इस बीच मामले में पुलिस की जांच भी आगे बढ़ रही है। ऋषिकेश की मौत के मामले में पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित केस दर्ज किया है। इसका मतलब यह है कि जांच अब सिर्फ घटना की परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस यह भी देख रही है कि क्या किसी व्यक्ति या परिस्थिति की ऐसी भूमिका थी जिसने घटना को प्रभावित किया हो। हालांकि केस दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। जांच के दौरान पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों, बयानों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी होगी। इसीलिए इस समय किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप तय मान लेना जल्दबाजी होगी।
सुसाइड नोट नहीं मिला, ऐसे में जांच की चुनौती बढ़ी
पुलिस ने कहा है कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में जांचकर्ताओं के सामने घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने की चुनौती और बढ़ जाती है। पुलिस यह देख रही है कि ऋषिकेश के हाल के दिनों में क्या हालात थे, उनकी मेडिकल और काउंसलिंग हिस्ट्री क्या थी और उनके संपर्क में कौन लोग थे। IIT दिल्ली ने भी बताया है कि ऋषिकेश को पहले चिकित्सा और काउंसलिंग सहायता दी गई थी। लेकिन इन रिकॉर्ड्स का सही अर्थ क्या है और उनका घटना से क्या संबंध है—यह जांच का विषय है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच के पूरे होने का इंतजार जरूरी है।
IIT दिल्ली ने कहा है कि ऋषिकेश को लेकर संस्थान में पहले भी स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं सामने आई थीं। संस्थान के मुताबिक Holi के बाद साथी छात्रों की चिंता के बाद उन्हें IIT अस्पताल रेफर किया गया था और बाद में लगभग एक महीने तक एक विशेष अस्पताल में इलाज भी हुआ। IIT दिल्ली का कहना है कि उनकी पढ़ाई से जुड़े सेमेस्टर वापस लेने के अनुरोध को भी मंजूरी दी गई थी। संस्थान ने यह भी कहा कि जुलाई और अगस्त में उन्हें काउंसलिंग तथा उपचार संबंधी सहायता दी गई। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच प्रक्रिया के जरिए ही हो सकेगी, लेकिन संस्थान का कहना है कि छात्र को उपलब्ध सहायता दी गई थी।
अब नए चेयरमैन और जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
अब देखना होगा कि IIT दिल्ली नए अध्यक्ष के चयन के बाद जांच को कितनी स्वतंत्रता देता है, समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आता है और क्या उस रिपोर्ट पर ठोस कार्रवाई होती है। क्योंकि इस मामले में असली परीक्षा सिर्फ जांच समिति की नहीं है। असली परीक्षा उस व्यवस्था की है, जिस पर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने वाले हजारों छात्र भरोसा करते हैं। IIT-दिल्ली छात्र की मौत के मामले में अब छात्रों और परिवार की नजर सिर्फ समिति के गठन पर नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्षता और जांच के नतीजे पर भी टिकी है।
FAQ
ऋषिकेश कुमार 31 वर्षीय MSc फिजिक्स के छात्र थे। IIT दिल्ली के अनुसार उन्होंने जुलाई 2025 में संस्थान में दाखिला लिया था और कैंपस के हॉस्टल में रह रहे थे।
पुलिस के अनुसार उनकी मौत 22 अगस्त को IIT दिल्ली के Lecture Hall Complex में हुई।
प्रदर्शनकारी छात्रों का एक वर्ग स्वतंत्र जांच चाहता है। कुछ छात्रों ने मांग की है कि जांच का नेतृत्व किसी पूर्व हाई कोर्ट जज को करना चाहिए। वे समिति की संरचना, उसके अधिकार और रिपोर्ट पर कार्रवाई की गारंटी को लेकर भी स्पष्टता चाहते हैं।
छात्रों के विरोध और स्वतंत्र जांच की मांग के बाद IIT दिल्ली ने बाहरी जांच समिति बनाने की घोषणा की।


