ब्रिक्स का इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सुरक्षा पर बड़ा फैसला, नई दिल्ली घोषणापत्र में साइबर सुरक्षा पर जोर

  • September 15, 2026
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ब्रिक्स इंटरनेट सुरक्षा, मोबाइल नेटवर्क सुरक्षा, साइबर अपराध, डीपफेक और नई दिल्ली घोषणापत्र 2026

नई दिल्ली, भारत के दूरसंचार क्षेत्र के संगठन ने कहा कि दूरसंचार के मामले में ब्रिक्स देशों की प्रतिबद्धता यह बताती है कि कनेक्टिविटी एक अहम राष्ट्रीय इन्फ्रास्ट्रक्चर है। साथ ही, ब्रिक्स का इंटरऑपरेबल सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स की मांग करना भारत के भरोसेमंद स्रोतों वाले नजरिये को भी दिखाता है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के निदेशक जनरल एसपी कोछड़ ने एक बयान में कहा, नई दिल्ली घोषणापत्र में दूरसंचार को शांति और आर्थिक विकास के लिए जरूरी बताया गया है। इससे उस बात की पुष्टि होती है जो भारतीय ऑपरेटर लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि कनेक्टिविटी एक अहम राष्ट्रीय इन्फ्रास्ट्रक्चर है। इंटरऑपरेबल उद्योग पहले ही अपना चुका है। दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ। हालांकि सदस्य देशों ने सम्मेलन के पहले ही इस क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

नई दिल्ली घोषणापत्र में क्या कहा गया?

दिन सर्वसम्मति से “नई दिल्ली घोषणापत्र 2026” को स्वीकार किया था। भारत के दूरसंचार नियम केवल भरोसेमंद स्रोतों या सरकार द्वारा इस्तेमाल विशिष्ट सुरक्षा मानकों के आधार पर मंजूरी प्राप्त इकाइयों के उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

घोषणापत्र को अंगीकार करते हुए ब्रिक्स देशों ने खुले, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) की जरूरत का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने हर देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और इंटरऑपरेबल आईसीटी सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स को विकसित करने और उन्हें लागू करने पर भी सहमति जताई।

साइबर अपराध और डीपफेक से निपटने पर जोर

इसके अलावा, उन्होंने संतुलित और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाने, साथ ही सप्लाई चेन की सुरक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर काम करने वाले साझा नियमों और मानकों को विकसित और लागू करने पर भी जोर दिया। ब्रिक्स इंटरनेट सुरक्षा के तहत ब्रिक्स देशों ने आईसीटी और अन्य तकनीकों के गलत इस्तेमाल से पैदा सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए मिलकर कोशिश करने की अपील की। इन खतरों में डेटा सुरक्षा, साइबर अपराध, गलत जानकारी, नफरत फैलाने वाले भाषण और डीपफेक शामिल हैं।

घोषणापत्र में सप्लाई चेन की सुरक्षा के लिए वैश्विक और साझा नियम बनाने और उन्हें लागू करने का भी जिक्र किया गया है। ब्रिक्स देशों ने आईसीटी उत्पादों और सिस्टम के लिए वैश्विक और साझा नियम बनाने और उन्हें लागू करने का भी आग्रह किया। सीओएआई ने कहा, नेटवर्क की मजबूती के लिए समुद्र के नीचे केबल इन्फ्रास्ट्रक्चर को अहम मानने का फैसला भी उतना ही स्वागतयोग्य है। एआई के मामले में सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता पर वैश्विक सहयोग उन एआई-नेटिव नेटवर्क के अनुरूप है जिन्हें ऑपरेटर पहले से ही बना रहे हैं।

फोरम ने सभी ब्रिक्स सदस्यों से बीआईएफएन के लिए एक राष्ट्रीय शाखा को नॉमिनेट करने का भी आग्रह किया। ब्रिक्स इंटरनेट सुरक्षा को लेकर यह सहयोग डिजिटल नेटवर्क, आईसीटी सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिमों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है। इस तरह ब्रिक्स इंटरनेट सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई दिल्ली घोषणापत्र में साइबर अपराध, गलत जानकारी, डीपफेक, डेटा सुरक्षा और सुरक्षित नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर पर व्यापक सहयोग की बात कही गई है।