यूपी चुनाव 2027 को लेकर बीजेपी ने शुरू की तैयारी
क्या बीजेपी ने समाजवादी पार्टी को झटका देने के लिए रणनीति बना लिया है? क्या बीजेपी के प्लान से मायावती हुई हैरान? क्यों यूपी चुनाव में इस बार बीजेपी कुछ अलग करने वाली है? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी वक्त बाकी है, लेकिन बीजेपी ने चुनावी तैयारियों का बिगुल बजा दिया है। मिशन साफ है—2022 में जिन सीटों पर पार्टी को शिकस्त मिली, उन सीटों को दोबारा बीजेपी के पाले में लाना है। इसके लिए अब सिर्फ लखनऊ से रणनीति नहीं बनेगी… बल्कि बीजेपी की टॉप लीडरशिप खुद यूपी के मैदान में उतरेगी। जमीनी फीडबैक लिया जाएगा, कमजोर कड़ियों की पहचान होगी और फिर उन्हीं के आधार पर जीत की रणनीति तैयार की जाएगी।
दरअसल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय भले ही बाकी हो, लेकिन बीजेपी ने चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। हारी हुई सीटों को दोबारा अपने पाले में लाने के मकसद से बीजेपी की टॉप लीडरशिप अब खुद यूपी के सियासी मैदान में उतरकर जमीनी हकीकत का आकलन करेगी और उसे फतह करने की इबारत लिखेगी।
नितिन नवीन और बीएल संतोष का यूपी दौरा क्यों अहम?
बीजेपी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के हालिया दौरे के बाद अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष का महत्वपूर्ण यूपी दौरा तय हुआ है। वहीं, तावड़े भी जल्द दोबारा राज्य का दौरा कर सियासी माहौल बनाएंगे। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपने दौरों की शुरुआत पश्चिमी यूपी से करने जा रहे हैं, जबकि बी.एल. संतोष राजधानी लखनऊ में संगठनात्मक तैयारियों को परखेंगे। वहीं यूपी के प्रभारी विनोद तावड़े 2027 के लिए संगठन और सामाजिक समीकरण साधने की कवायद करेंगे। इस तरह बीजेपी की टॉप लीडरशिप अब यूपी में 2022 के चुनाव में हारी हुई सीटों पर जीत का ताना-बाना बुनेगी।
दरअसल यूपी की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा से चुनावी नतीजों पर असर डालते रहे हैं। ऐसे में बीजेपी सिर्फ वोट प्रतिशत के आंकड़े नहीं देखेगी…बल्कि यह भी समझने की कोशिश होगी कि हारी हुई सीटों पर कौन सा सामाजिक समूह पार्टी से दूर गया। कहां विपक्ष ने सेंध लगाई? कहां स्थानीय मुद्दे हावी रहे? और कहां बीजेपी के अपने संगठन और मतदाताओं के बीच कनेक्शन कमजोर पड़ा? यही फीडबैक 2027 की रणनीति का आधार बन सकता है।
हारी सीटों पर बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की तैयारी
इसके अलावा बीजेपी के लिए बूथ मैनेजमेंट हमेशा चुनावी रणनीति का सबसे मजबूत हथियार रहा है। इसलिए हारी हुई सीटों पर सिर्फ बड़े नेताओं की बैठकें नहीं होंगी…बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने पर जोर रहेगा।
आपको बता दें कि बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वे सूबे की सियासी आबोहवा का आकलन करने के साथ ही कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम करेंगे। नवीन अपने दौरे की शुरुआत पश्चिम उत्तर प्रदेश से करने जा रहे हैं। उनका दौरा 12 से 13 सितंबर के बीच मेरठ से शुरू होगा। नितिन नवीन का लक्ष्य पश्चिमी यूपी में बीजेपी के सियासी समीकरण को दुरुस्त करने के साथ-साथ 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में हारी सीटों पर कमल खिलाने का है। अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का यह पहला पश्चिमी यूपी दौरा है। इसके साथ ही मेरठ में संगठन और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक के साथ संघ पदाधिकारियों से समन्वय संवाद भी संभावित है।
पश्चिमी यूपी की 71 सीटों पर बीजेपी की नजर
पश्चिमी यूपी की 71 विधानसभा सीटों पर सामाजिक समीकरण और गुर्जर राजनीति में हलचल भाजपा के लिए अहम चुनौती है। ऐसे में नितिन नवीन के दौरे को संगठनात्मक तैयारियों के साथ-साथ क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण को समझने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
बीजेपी की कोशिश है कि जिन सीटों पर पिछले चुनावों में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा, वहां जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति को समझा जाए। इसके लिए कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लेने पर जोर रहेगा। पार्टी यह समझने की कोशिश करेगी कि किन क्षेत्रों में संगठन मजबूत है और किन इलाकों में अभी और काम करने की जरूरत है। इसी के आधार पर यूपी चुनाव 2027 के लिए आगे की रणनीति तैयार किए जाने की कवायद होगी। बीजेपी के लिए पश्चिमी यूपी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सामाजिक समीकरण चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं।
लखनऊ में बीएल संतोष संगठनात्मक तैयारियों का लेंगे जायजा
वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी. एल. संतोष लखनऊ पहुंचकर अवध और कानपुर क्षेत्र के संगठनात्मक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। 10 और 11 सितंबर को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी. एल. संतोष का लखनऊ दौरा प्रस्तावित है। वे यहां संगठन के मोर्चे पर तैयारियों का जायजा लेंगे।
बी.एल. संतोष की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक से मुलाकात संभावित है। बी.एल. संतोष अवध क्षेत्र की 82 और कानपुर क्षेत्र की 52 विधानसभा सीटों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। दरअसल 2024 में अवध क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका था। अवध क्षेत्र में हाल के दिनों में बीजेपी के दो पूर्व एमएलसी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा पूर्व सांसद कौशल किशोर भी नाराज चल रहे हैं, जिसके चलते बीजेपी के सियासी समीकरण को साधने की चुनौती है।
अवध और कानपुर क्षेत्र में संगठन पर खास फोकस
ऐसे में बी. एल. संतोष इसी सप्ताह लखनऊ में बैठक कर सियासी माहौल बनाने की कवायद करेंगे। अवध क्षेत्र की 82 और कानपुर क्षेत्र की 52 विधानसभा सीटों के पदाधिकारियों के साथ बैठक के जरिए संगठन की तैयारियों और जमीनी स्थिति का जायजा लिया जाएगा।
बीजेपी के लिए इन क्षेत्रों में संगठनात्मक मजबूती को लेकर फीडबैक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर उन सीटों पर जहां पिछले चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था, वहां संगठन और मतदाताओं के बीच कनेक्शन को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर मौजूद राजनीतिक चुनौतियों और सामाजिक समीकरणों को भी समझने की कवायद होगी। पार्टी की रणनीति में संगठन की सक्रियता और बूथ स्तर की तैयारियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विनोद तावड़े भी दोबारा यूपी दौरे पर पहुंचेंगे
इधर भारतीय जनता पार्टी के यूपी प्रभारी और बीजेरी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने हाल ही में यूपी का दौरा कर सियासी नब्ज को समझने की कोशिश की है और अब वे दोबारा राज्य के दौरे पर पहुंचेंगे। विनोद तावड़े क्षेत्रीय टीमों के गठन के बाद जमीनी तैयारियों की पड़ताल करेंगे।
इसके अलावा नितिन नवीन और बी.एल. संतोष का यूपी दौरा भी काफी अहम माना जा रहा है। दोनों नेता 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव में हारी सीटों का फीडबैक भी लेंगे। इसके अलावा एनडीए सहयोगी दलों की दावेदारी वाली सीटों के सामाजिक समीकरण और चुनावी रणनीति पर भी चर्चा होगी। इसीलिए नितिन नवीन, बी.एल. संतोष और यूपी संगठन से जुड़े रणनीतिकारों की सक्रियता को अहम माना जा रहा है। पार्टी के लिए यह सिर्फ समीक्षा अभियान नहीं…बल्कि 2027 की चुनावी जमीन तैयार करने की कवायद है।
2027 के लिए अभी से चुनावी जमीन तैयार कर रही बीजेपी
हालांकि 2027 की चुनावी जंग में अभी वक्त है…लेकिन बीजेपी के लिए तैयारी का वक्त अब शुरू हो चुका है। 2022 में जहां कहानी अधूरी रह गई थी…अब उन्हीं सीटों पर नई इबारत लिखने की तैयारी है।
बीजेपी की टॉप लीडरशिप के लगातार यूपी दौरे और संगठनात्मक तैयारियों के बीच पार्टी का फोकस उन सीटों पर है, जहां उसे पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा था। जमीनी फीडबैक, सामाजिक समीकरण, बूथ मैनेजमेंट और संगठन की सक्रियता को आधार बनाकर आगे की रणनीति तैयार करने की कोशिश की जा रही है। तो यूपी में सत्ता की अगली लड़ाई का ट्रेलर भले अभी बाकी हो…लेकिन बीजेपी ने अपनी चुनावी पटकथा लिखनी शुरू कर दी है। अब देखना ये होगा कि बीजेपी की ये रणनीति यूपी चुनाव में कितना असरदार होती है?


