पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम गायब
पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी (SIR ) को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब बताया जा रहा है । जिसके बाद चड्डा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार देते हुए पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला बोला है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 13 अगस्त को जारी की गई पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में हटाए गए लोगों की सूची में राघव चड्डा का नाम भी है।
दरसल आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम पंजाब की मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। जिसके बाद से ही एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो चुका है। निर्वाचन आयोग द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक राघव चड्ढा का नाम ‘एएसएसडी’ यानी अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी के तहत ‘परमानेंटली शिफ्टेड’ के रूप में दर्ज किया गया है।
राघव चड्ढा ने लगाया राजनीतिक बदले का आरोप
आपको बता दे की राघव चड्डा 2022 में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा के लिए चुने गए और इस साल अप्रैल में बीजेपी में शामिल हो गए थे। वही पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर राघव चड्डा से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, की “पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार अब अपनी बदले की राजनीति को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तक ले आई है। अच्छी बात यह है कि यह सिर्फ ड्राफ्ट वोटर लिस्ट है, फाइनल वोटर लिस्ट नहीं। ये अस्थायी हैं और इन पर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया लागू होती है।”
चड्डा ने कहा कि वह इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि अक्टूबर, 2026 में प्रकाशित होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट में इस गलत क्लासिफिकेशन को ठीक किया जाए। उन्होंने कहा कि यह एक राजनीतिक साजिश और बदले की भावना से उठाया गया कदम है। राघव चड्ढा का कहना है कि एक सार्वजनिक प्रतिनिधि होने के नाते नियमों के तहत उनका नाम सूची में होना चाहिए था। क्योंकि SIR प्रक्रिया अभी जारी है जिसके तहत 12 सितंबर से 8 अक्तूबर तक आपत्तियों और दावों से निपटान होगा।
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चड्ढा बोले- AAP सरकार राजनीतिक दबाव बनाती है
राज्यसभा सांसद राघव चड्डा ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार राजनीतिक बदले के लिए राज्य के अधिकारियों के जरिए राजनीतिक दबाव बनाती है. उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ी है, तब से नेताओं में गुस्सा है. राघव ने कहा कि हममें से जिन लोगों ने भी चुप रहने से इनकार किया उनके पीछे पंजाब सरकार ने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को लगा दिया.
AAP छोड़कर BJP में शामिल होने वाले दूसरे सांसदों को भी पंजाब सरकार ने निशाना बनाया है. वोटर लिस्ट से उनका नाम काटा जाना भी बदले की भावना के तहत किया गया है। इधर चड्डा के आरोपों को खारिज करते हुए पंजाब सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “ये आरोप पूरी तरह झूठे हैं। इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है। सीईओ, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त अधिकारी होता है।
AAP ने आरोपों को किया खारिज
इसके अलावा आम आदमी पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, की “चुनाव सूची में नाम शामिल करने या हटाने का काम चुनाव आयोग करता है न कि राज्य सरकार। इसलिए पंजाब सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। यह आम जानकारी है कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, पंजाब में नहीं। अगर वे अब पंजाब में नहीं रहते हैं, तो अपना वोटर रजिस्ट्रेशन बनाए रखना या उसे दूसरी जगह शिफ्ट करना उनकी जिम्मेदारी थी।
AAP के प्रवक्ता ने कहा कि चड्डा मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के लिए आम आदमी पार्टी या पंजाब सरकार को दोष नहीं दे सकते। दरअसल, चुनाव आयोग जो एसआईआर करवा रहा है, इसमें वोटिंग लिस्ट को अपडेट किया जा रहा है. उसमें उन लोगों के नामों को हटाया जा रहा है, जो पुराने पते से कहीं दूसरी जगह शिफ्ट कर गए हैं, उनकी मृत्यु हो गई है, उनका नाम दो जगह है या वो विदेशी है.
SIR में किन लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं?
इस प्रोसेस को पूरा करने के लिए बीएलओ अपने क्षेत्र के हर घर में जाते हैं और वोटर लिस्ट को वेरिफाई कर रहे हैं, जिसका एक प्रोसेस है. इस स्थिति में अगर कोई वोटर घर पर नहीं मिलता है तो उसके नाम पर कार्रवाई की जाती है। वही एसआईआर के दौरान तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से पूरे देश भर में लगभग 13.37 करोड़ नाम हटाए गए हैं।
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पंजाब में एसआईआर से पहले के मतदाताओं में से करीब 9.7 फीसदी यानी 20.66 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं। बता दे की पंजाब की अंतिम एसआईआर सूची 12 अक्टूबर को जारी होने वाली है।जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे 13 अगस्त से 12 सितंबर तक एक महीने की अवधि के दौरान दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए दिए वक्त में फॉर्म भरकर मतदाता सूची में वापस शामिल हो सकते हैं।
लोकसभा चुनाव में चड्ढा ने पंजाब में डाला था वोट
आपको बता दे की 1 जून, 2024 को हुए लोकसभा चुनावों में चड्डा ने पंजाब के मोहाली के एक बूथ पर वोट डाला तह। बुधवार को चुनाव आयोग के वोटर सर्विसेज पोर्टल पर चड्डा की वोटर आईडी डिटेल्स के साथ सर्च करने पर दिल्ली और पंजाब, दोनों के लिए ‘कोई रिज़ल्ट नहीं मिला’ यानी (no result found) दिखाया गया। दिल्ली का ड्राफ्ट एसआईआर रोल 31 अगस्त को प्रकाशित किया गया था, जिसमें एसआईआर से पहले के 33% वोटरों के नाम हटा दिए गए थे। गौरतलब है की इसी साल अप्रैल में बीजेपी में शामिल होने से पहले राघव चड्ढा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबियों में से एक थे। तब उन्होंने वोटर लिस्ट में हेरफेर के आरोप लगाए थे।
दिल्ली में भी वोटर लिस्ट को लेकर उठा चुके हैं सवाल
2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चड्डा ने दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री आतिशी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के साथ नई दिल्ली विधानसभा सीट में वोटरों के साथ बड़े पैमाने पर सुनियोजित धोखाधड़ी की साजिश होने की बात कही थी। नई दिल्ली विधानसभा सीट से तब केजरीवाल चुनाव लड़ रहे थे। फिलहाल पंजाब चुनाव से पहले ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्डा का नाम हटाया जाना उनके लिए बड़ा राजनितिक झटका माना जा रहा है।
FAQ
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, राघव चड्ढा का नाम ‘एएसएसडी’ यानी अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी के तहत ‘परमानेंटली शिफ्टेड’ के रूप में दर्ज किया गया है। हालांकि, चड्ढा ने इसे राजनीतिक साजिश और बदले की भावना से उठाया गया कदम बताया है।
राघव चड्ढा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर बदले की राजनीति का आरोप लगाया और कहा कि फाइनल वोटर लिस्ट में इस गलत क्लासिफिकेशन को ठीक कराया जाएगा।
AAP के प्रवक्ता ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने का काम चुनाव आयोग करता है और इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
लेख के अनुसार, पंजाब में SIR से पहले के मतदाताओं में से करीब 9.7 फीसदी यानी 20.66 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं।
लेख के अनुसार, जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे निर्धारित अवधि के दौरान दावे और आपत्तियां दर्ज कर फॉर्म भरकर मतदाता सूची में वापस शामिल हो सकते हैं।


