NEET आंदोलन ने पकड़ी राष्ट्रीय रफ्तार, संसद से सड़क तक घमासान; विपक्ष का प्रदर्शन।
जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन अब देशभर में क्यों फैल गया?
दरअसल, शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा घोटालों के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे कई राज्यों तक फैल चुका है। वहीं, छात्रों के साथ अब अभिभावक, शिक्षक, सामाजिक संगठन और कई विपक्षी दल भी खुलकर समर्थन में उतर आए हैं। ऐसे में, यह आंदोलन केवल NEET पेपर लीक का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और युवाओं के भविष्य से जुड़ी राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है। प्रदर्शन के बढ़ते दायरे ने केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को भी तेज कर दिया है।
संसद मार्च के दौरान क्या हुआ और विवाद क्यों बढ़ा?
इस बीच, संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव देखने को मिला। जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी तथा पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया। इसी दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। सोशल मीडिया पर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के वीडियो वायरल होने के बाद इस पूरे घटनाक्रम पर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई।
विपक्ष ने सड़क से संसद तक सरकार के खिलाफ कैसे खोला मोर्चा?
दरअसल, NEET पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब संसद तक पहुंच गया है। बुधवार को कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर के मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन किया और कई सांसद काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराते नजर आए। वहीं, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में धरना दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है।
संसद में NEET विवाद पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने क्यों हैं?
मानसून सत्र के दौरान भी NEET पेपर लीक का मुद्दा संसद में प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। दूसरी ओर, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार NEET पेपर लीक और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं से जुड़े हर मुद्दे पर सार्थक बहस चाहती है और सदन के भीतर ही इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
कांग्रेस और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप क्यों तेज हुए?
राहुल गांधी की हिरासत के बाद कांग्रेस ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि वह हर प्रकार की हिंसा के खिलाफ हैं और यदि पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी हुई है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को छात्रों द्वारा उठाए गए वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर भाजपा ने पूरे आंदोलन को राजनीतिक प्रदर्शन करार दिया है।
सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर क्या अपील की गई?
इसी बीच, अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई गई। आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि उनकी भूख हड़ताल 25वें दिन में पहुंच चुकी है और उनकी जान को गंभीर खतरा है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और महात्मा गांधी तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर के बताए रास्ते पर आगे बढ़ाया जाएगा। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था।
आंदोलन से जुड़े नेताओं ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
इसके अलावा, आंदोलन से जुड़े नेताओं ने केंद्र सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन बनता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने जल्द कोई समाधान नहीं निकाला तो आने वाले दिनों में लाखों युवा दिल्ली पहुंच सकते हैं।
वहीं, अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए पूछा कि सोनम वांगचुक से अब तक संवाद क्यों नहीं किया गया और छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार जवाब क्यों नहीं दे रही है।
आगे आंदोलन और राजनीतिक बहस किस दिशा में जा सकती है?
फिलहाल, शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़ा यह आंदोलन अब पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। एक ओर विपक्ष सरकार को छात्रों के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर केंद्र सरकार संसद में चर्चा के जरिए समाधान निकालने की बात कह रही है।
ऐसे में, आने वाले दिनों में संसद की बहस, सरकार की प्रतिक्रिया और छात्र संगठनों की अगली रणनीति इस आंदोलन की दिशा तय कर सकती है। कुल मिलाकर, अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या संवाद के जरिए समाधान निकलेगा या आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।


