शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ईवी चार्जिंग स्टेशन परियोजना लक्ष्य से पीछे चल रही है। एफएएमई-2 योजना के तहत भोपाल में 31 स्थानों पर 148 चार्जिंग मशीनें लगाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर काम अपेक्षा के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाया है।
जानकारी के अनुसार, 22 स्थानों पर 20 चार्जिंग मशीनें स्थापित की गई हैं, जो अभी टेस्टिंग फेज में हैं। ऐसे में मशीनें लगने के बावजूद आम वाहन चालकों को सार्वजनिक चार्जिंग सुविधा मिलने में देरी हो रही है। परियोजना का जिम्मा भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) को दिया गया है। इसे केंद्र सरकार के उपक्रम राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड (आरईआईएल) के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है।
चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने में लाखों का खर्च
भोपाल ईवी चार्जिंग परियोजना के तहत चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने में भी लाखों रुपये का खर्च आता है। मध्यम श्रेणी के कमर्शियल चार्जिंग स्टेशन पर करीब 15 से 25 लाख रुपये, जबकि हाई-पावर कमर्शियल हब बनाने पर 25 लाख से एक करोड़ रुपये या इससे अधिक की लागत आती है।
इस बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर के लिए 912.50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। हालांकि, भोपाल में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले परियोजना का काम अभी आगे बढ़ना बाकी है। चार्जिंग मशीनें स्थापित होने के बाद भी टेस्टिंग पूरी नहीं होने के कारण आम वाहन चालकों को इनका लाभ मिलने में देरी हो रही है। भोपाल ईवी चार्जिंग परियोजना में निर्धारित लक्ष्यों और जमीन पर हुए काम के बीच अंतर साफ दिखाई दे रहा है।


