MLC चुनाव से पहले महागठबंधन में फिर बढ़ी दरार
बिहार की सियासत को समझना सबके बूते की बात नहीं। दिल्ली में दोस्ती के इजहार के अगले ही दिन महागठबंधन में दरार पड़ गई। विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए राजद ने इकतरफा 6 उम्मीदवारों की घोषणा की तो कांग्रेस ने भी गठबंधन की परवाह किए बिना 5 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं। एनडीए में भी पटना स्नातक सीट पर जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार को खुला समर्थन दे दिया है।
चुनाव आयोग की SIR के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए दिल्ली में विपक्ष की एकजुटता तो दिखी, लेकिन 24 घंटों के अंदर ही बिहार में इसकी धज्जियां उड़ गईं। बिहार में महागठबंधन के नाम से मशहूर विपक्षी दलों का इंडिया ब्लॉक पूरी तरह से बिखर गया। यह बिखराव भी छोटे स्तर की पार्टियों के स्तर पर नहीं हुआ। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर गठबंधन का नेतृत्व करने वाले दलों ने ही इसकी शुरुआत की।
राजद ने 6 सीटों पर उतारे उम्मीदवार, कांग्रेस भी मैदान में
दरअसल बिहार में एमएलसी चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई हैं। इस चुनाव में एक बार फिर महागठबंधन में शामिल राजद और कांग्रेस पार्टी के बीच जबरदस्त रार नजर आया है। राज्य में विधान परिषद की कुल 8 सीटों पर चुनाव होने हैं। राजद ने इनमें से छह सीटों पर पहले ही अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया था।
राजद के इस कदम से कांग्रेस नाराज नजर आ रही थी और गुरुवार को पार्टी की नाराजगी साफ नजर आ गई। कांग्रेस पार्टी ने भी 5 सीटों पर अपने कैंडिडेट का ऐलान कर दिया। अब कांग्रेस के यह सभी पांच उम्मीदवार 5 अक्टूबर को अपना नामांकन करेंगे। इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दलों से बिना विमर्श किए राष्ट्रीय जनता दल ने पहले ही 6 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस के नेता इससे काफी खफा हुए। उन्होंने अपनी नाराजगी आलाकमान तक पहुंचाई। आखिरकार आलाकमान की हरी झंडी मिलने के बाद कांग्रेस ने 5 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए।
चार सीटों पर RJD और कांग्रेस आमने-सामने
इनमें 4 सीटें ऐसी हैं, जहां महागठबंधन के ये दोनों दल आपस में टकराएंगे। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया है कि कांग्रेस के सभी पांच विधान परिषद उम्मीदवार पांच तारीख को अपना पर्चा दाखिल करेंगे। इसी के साथ राजेश कुमार ने पार्टी के सभी जिलाध्यक्षों को खत भी लिखा है। इस खत में राजेश कुमार ने जिलाध्यक्षों से कहा है कि वो पार्टी द्वारा अधिकृत उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए एकजुट हो जाएं और प्रयास में जुट जाएं। बता दें कि बिहार की जिन 8 सीटों पर विधान परिषद चुनाव होने हैं उनमें 4 ग्रेजुएट और 4 टीचर्स सीटें हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से चार सीटों पर महागठबंधन में शामिल राजद और कांग्रेस दोनों ने ही अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। यानी इन चारों सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होगी।
दरभंगा और पटना शिक्षक सीट पर भी मुकाबले की तस्वीर
आपको बता दें कि दरभंगा टीचर्स सीट से कांग्रेस ने पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को दोबारा उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर राजद ने अभी अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। इसी तरह पटना शिक्षक निर्वाचन सीट पर भी राष्ट्रीय जनता दल ने अपने उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है लेकिन कांग्रेस ने इस सीट से संजय यादव को मैदान में उतार दिया है। दरअसल महागठबंधन में उम्मीदवारों के आपसी टकराव को फ्रेंडली फाइट कहकर सामान्य घटना ठहराने की परिपाटी 2025 विधानसभा चुनाव से शुरू हुई है। उस वक्त भी सीटों की संख्या पर बिना कोई तालमेल हुए राजद ने इकतरफा अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए थे। बाद में सहयोगी दलों ने भी करीब दर्जन भर सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतार दिए। इनमें ज्यादातर कांग्रेस के कैंडिडेट थे।
फ्रेंडली फाइट का पुराना उदाहरण भी चर्चा में
इसे फ्रेंडली फाइट कह कर स्थिति की गंभीरता को टाल दिया गया। परिणाम सबने देखा। 243 सीटों वाली विधानसभा में महागठबंधन के महज 35 उम्मीदवार ही जीत पाए। कांग्रेस 6 सीटों पर सिमट गई, जबकि राजद पिछली 75 सीटों से खिसक कर 25 पर आ गई। इस बार एमएलसी चुनाव में परिणाम क्या होगा, यह वक्त बताएगा, लेकिन आपस में इस घमासान से महागठबंधन की एकता पर सवाल तो उठने लगे हैं। राजद और कांग्रेस के बीच उम्मीदवारों को लेकर सामने आया यह टकराव ऐसे समय में है, जब दोनों दल महागठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे में विधान परिषद चुनाव के मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ उतरने वाले उम्मीदवारों ने बिहार की सियासत में नई चर्चा को जन्म दिया है।
जन सुराज भी बन सकता है बड़ा फैक्टर
इधर जन सुराज पार्टी भी एक बड़ा फैक्टर बनने वाली है। भाजपा से बांकीपुर सीट छीनने के बाद जन सुराज के बारे में लोगों की धारणा बदली है। पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर का उत्साह चरम पर है। उन्होंने भी सभी सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। सारण से जन सुराज समर्थित उम्मीदवार पिछली बार जीता भी था। तिरहुत क्षेत्र से भी जन सुराज के कैंडिडेट का जलवा दिखा था। उसकी जीत तो नहीं हुई थी, लेकिन उसे खासा वोट मिले थे। नतीजतन वहां से एनडीए और महागठबंधन समर्थित दलीय उम्मीदवार हार गए थे। निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई थी।
बांकीपुर उपचुनाव के बाद बदला जन सुराज का परसेप्शन
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के चीफ प्रशांत किशोर ने भाजपा और राजद के उम्मीदवारों को धूल पटाकर जीत हासिल की है। ऐसे में दलीय उम्मीदवारों के बीच होने वाले चुनावी घमासान के परिणाम का अनुमान लगाया जा सकता है। दरअसल जन सुराज की कूटनीति ने एनडीए के लिए भी परेशानी पैदा कर दी है। पटना स्नातक क्षेत्र से एनडीए समर्थित जेडीयू के नीरज कुमार उम्मीदवार हैं।
उनके खिलाफ जन सुराज ने डॉ. अनुज कुमार सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर मुकाबला इसलिए दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मोकामा से जेडीयू के विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज प्रत्याशी का समर्थन कर दिया है। अनंत सिंह का प्रभावशाली व्यक्तित्व और जन सुराज के बारे में बांकीपुर उपचुनाव के बाद बने परसेप्शन से पटना स्नातक सीट का चुनाव काफी रोचक हो गया है। अनंत सिंह ने नीरज के खिलाफ पहले से ही बगावती तेवर अपना रखा है।
आठ सीटों पर होने वाला चुनाव और पूरा गणित
गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होना है। इनमें पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक, तिरहुत स्नातक, कोसी स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, तिरहुत शिक्षक और सारण शिक्षक सीट शामिल हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। दरअसल बिहार विधान परिषद चुनाव का यह मुकाबला इसलिए सामान्य राजनीतिक चुनाव से अलग है क्योंकि यहां गठबंधन की औपचारिक स्थिति के साथ-साथ उम्मीदवारों के बीच वास्तविक मैदान भी महत्वपूर्ण होगा।
RJD-कांग्रेस के बीच कई सीटों पर सीधी टक्कर
कांग्रेस और राजद तीन स्नातक सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ हैं, जबकि आम आदमी पार्टी और जन सुराज ने भी कई सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। चुकी गठबंधन के सहयोगी दल ही अलग-अलग उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं। खास तौर पर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच तीन स्नातक और एक शिक्षक सीटों पर सीधा मुकाबला होने जा रहा है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी और जन सुराज के मैदान में उतरने से कई सीटों पर मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।
ऐसे में बिहार विधान परिषद चुनाव में सिर्फ दलों के गठबंधन ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, अलग-अलग दलों के समर्थन और चुनावी मैदान में बने समीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे। आने वाले दिनों में नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल राजद और कांग्रेस के बीच उम्मीदवारों को लेकर टकराव, जन सुराज की सक्रियता और जेडीयू विधायक अनंत सिंह के समर्थन ने बिहार के MLC चुनाव को सियासी तौर पर काफी दिलचस्प बना दिया है।


