गलवान हिंसा के बाद भारत आ रहे चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने किया बड़ा ऐलान!

  • July 31, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और BRICS-SCO शिखर सम्मेलनों का सांकेतिक चित्र।

क्या 2027 में पाकिस्तान जाएंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2027 में पाकिस्तान जाएंगे? यह सवाल इसलिए चर्चा में है क्योंकि पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की बात कही है। इसी बीच सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा ने कूटनीतिक हलचल और तेज कर दी है।

हालांकि फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान दौरे को लेकर भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं की गई है।

सितंबर में BRICS सम्मेलन में शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना

दरअसल, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। यदि यह दौरा तय होता है तो कोविड-19 महामारी और वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।

ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं, शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत 12 और 13 सितंबर को BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

वहीं BRICS के सदस्य देश के रूप में ईरान भी सम्मेलन में हिस्सा लेगा, हालांकि उसकी ओर से किस स्तर का प्रतिनिधिमंडल आएगा, इस पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

भारत-चीन संबंधों के लिए क्यों अहम माना जा रहा है यह दौरा?

करीब छह साल बाद यदि शी जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं तो इसे केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं माना जाएगा। वर्ष 2019 में महाबलीपुरम शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के संबंध गलवान घाटी संघर्ष और एलएसी पर लंबे सैन्य गतिरोध के कारण सबसे कठिन दौर में पहुंच गए थे।

ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व की संभावित मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। जानकारों का मानना है कि यदि यह बैठक होती है तो इससे दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने और सीमा विवाद सहित अन्य लंबित मुद्दों पर बातचीत जारी रखने का अवसर मिल सकता है।

क्या इससे प्रधानमंत्री मोदी के पाकिस्तान दौरे की संभावना बढ़ेगी?

इसी घटनाक्रम के बीच एक और सवाल तेजी से उठ रहा है कि यदि भारत चीन के राष्ट्रपति की मेजबानी करता है तो क्या वर्ष 2027 में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे? फिलहाल इस सवाल का कोई आधिकारिक जवाब उपलब्ध नहीं है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से संकेत दिए गए हैं कि वह सम्मेलन के लिए सभी सदस्य देशों के प्रमुखों को आमंत्रित करेगा।

ऐसे में चर्चा केवल निमंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी है कि क्या भारत उस निमंत्रण को स्वीकार करेगा। यह फैसला उस समय की सुरक्षा परिस्थितियों, भारत-पाकिस्तान संबंधों और व्यापक कूटनीतिक माहौल पर निर्भर करेगा।

SCO सम्मेलन में कई वैश्विक नेताओं की हो सकती है मुलाकात

BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले महीने किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में रूस, चीन और ईरान के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करने की भी संभावना है।

यह सम्मेलन अमेरिका-ईरान तनाव के बाद सदस्य देशों की पहली शीर्ष बैठक होगी। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति, व्यापार, ऊर्जा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषय बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो सकते हैं। यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं तो यह भारत-चीन संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम माना जाएगा और दोनों देशों के बीच संवाद को नई दिशा मिल सकती है।

WMCC बैठक और सीमा वार्ता पर भी रहेगी नजर

आने वाले हफ्तों में भारत-चीन सीमा मामलों पर वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की बैठक होने की भी संभावना है। इसके बाद सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत हो सकती है।

यदि शी जिनपिंग का भारत दौरा तय होता है तो BRICS सम्मेलन में उनकी मौजूदगी केवल इस मंच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भी देखा जाएगा। यह लगभग छह वर्षों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी और इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच बढ़ा BRICS सम्मेलन का महत्व

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक बदलावों का सामना कर रही है। व्यापारिक तनाव, पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत ने BRICS की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सम्मेलन के दौरान भारत और चीन सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत जारी रखने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श कर सकते हैं। यदि शी जिनपिंग की यात्रा की आधिकारिक पुष्टि होती है तो इसे गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में से एक माना जाएगा।

फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2027 में पाकिस्तान जाने को लेकर फिलहाल केवल कूटनीतिक चर्चाएं और अटकलें हैं। भारत सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय या घोषणा नहीं की है। वहीं शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा, BRICS सम्मेलन और आने वाले SCO शिखर सम्मेलनों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

आने वाले महीनों में इन बैठकों और आधिकारिक घोषणाओं से भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।