उज्जैन के खड़े हनुमान की मूर्ति 1000 साल पुरानी? नए खुलासे से मचा बवाल

  • September 10, 2026
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उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर की प्राचीन प्रतिमा

उज्जैन के खड़े हनुमान की प्रतिमा पर उठे बड़े सवाल

क्या उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा सच में एक हजार साल से भी ज्यादा पुरानी है? क्या ये वही ऐतिहासिक प्रतिमा है, जो सदियों से आस्था का केंद्र बनी हुई है? आखिर इस प्रतिमा की प्राचीनता को लेकर क्या सबूत सामने आए हैं? मध्य प्रदेश की धर्म नगरी उज्जैन में प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी की प्रतिमा चर्चा का विषय बन गई है। सिंहस्थ 2028 की प्लानिंग के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन ने मंदिर को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन प्रतिमा हटाई नहीं जा सकी।

अब प्रशासन ने खुद भगवान की प्रतिमा को विस्थापित करने को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। आधिकारिक बयान जारी करते हुए प्रशासन ने कहा है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और प्रतिमा की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बिना विशेषज्ञों की जांच और संत समाज की सहमति के प्रतिमा को स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच मंदिर को लेकर विवाद

दरअसल मध्य प्रदेश के उज्जैन में कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क चौड़ीकरण का काम सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत चल रहा है। इसी मार्ग पर स्थित खड़े हनुमान मंदिर का भवन और चाहरदीवारी सड़क की जद में आई थी। निर्माण का हिस्सा हटाए जाने के बाद मंदिर में विराजमान प्रतिमा को लेकर मामला संवेदनशील हो गया। पिछले कुछ दिनों में प्रतिमा को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। मूर्ति ना हटा पाने को चमत्कार मानते हुए वहां पर बजरंगबली के दर्शन को आसपास के प्रदेशों से भी भक्त पहुंचने लगे हैं। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के श्रद्धालु भी शामिल हैं। कई भक्त मंदिर में दर्शन करने के साथ प्रतिमा की रील बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। इसके चलते खड़े हनुमान से जुड़े वीडियो लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।

क्या 1000 साल पुरानी है खड़े हनुमान की प्रतिमा?

दरअसल उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता अब इसकी उम्र को लेकर है। बताया जा रहा है कि प्रतिमा के करीब 1000 वर्ष पुरानी होने की संभावना पर जांच की जा रही है। हालांकि अभी इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। प्रतिमा वास्तव में कितनी पुरानी है, इसे प्रमाणित करने के लिए विशेषज्ञ अध्ययन जरूरी होगा।

यही वजह है कि अब इतिहासकारों और संबंधित विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। चुकी उज्जैन पहले से ही प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। इतिहासकार यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि प्रतिमा किस काल की शिल्प परंपरा से मिलती है। उसकी मुद्रा, चेहरे की बनावट, शरीर की संरचना, आभूषण और निर्माण शैली उस दौर के मंदिरों और मूर्तियों से कितनी समानता रखती है, यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है।

170 साल पुराने मंदिर में 1000 साल पुरानी प्रतिमा का दावा

आपको बता दें कि खड़े हनुमान मंदिर को स्थानीय स्तर पर करीब 170 साल पुराना बताया जाता है। अगर प्रतिमा की उम्र वास्तव में 1000 साल के आसपास निकलती है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेगा कि यह प्रतिमा वर्तमान मंदिर से पहले कहां थी? क्या उसी स्थान पर कोई पुराना धार्मिक स्थल मौजूद था? क्या प्रतिमा को किसी पुराने मंदिर या स्थान से यहां लाया गया था? या फिर वर्तमान मंदिर से पहले भी यहां किसी रूप में पूजा की परंपरा थी? इन सवालों के जवाब इतिहासकारों की पड़ताल से ही सामने आ सकते हैं। वहीं सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर की चाहरदीवारी और भवन के हिस्से को हटाया जा चुका है। फिलहाल खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। मंदिर का स्वरूप बदलने के बावजूद श्रद्धालुओं की आवाजाही कम नहीं हुई। बल्कि पिछले कुछ दिनों में यहां लोगों की भीड़ बढ़ी है।

मंदिर में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हुई महाआरती

सुबह से लेकर रात तक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंगलवार शाम मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन हुआ। ढोल-ताशे बजे और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। बुधवार को संत समाज ने भी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि खड़े हनुमान जी उज्जैन के पुराने धार्मिक जीवन का हिस्सा हैं और यहां आने वाले लोग लंबे समय से इस प्रतिमा को नमन करते रहे हैं। इस बीच प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था और बढ़ती चर्चा के कारण मंदिर परिसर में लोगों की आवाजाही भी बनी हुई है। सोशल मीडिया पर प्रतिमा से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद आसपास के प्रदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही जा रही है।

पुरातत्व विभाग कर रहा प्रतिमा की प्राचीनता की जांच

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि पुरातत्व विभाग प्रतिमा की प्राचीनता को लेकर जांच कर रहा है। शुरुआती स्तर पर प्रतिमा के करीब 1000 साल पुरानी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इसकी वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

अगर प्रतिमा वास्तव में इतनी प्राचीन पाई जाती है तो मामला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी सामने आएगा। वहीं प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि सड़क विकास का काम भी आगे बढ़े और लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी बना रहे। बताया जा रहा है कि प्रशासन की प्राथमिकता इस मार्ग को महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों से पहले तैयार करने की थी। अब संबंधित आयोजन निकल चुका है, ऐसे में प्रशासन भी इस मामले में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहता।

प्रतिमा को हटाने को लेकर सोशल मीडिया पर क्या दावा हुआ?

इधर प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने को लेकर पिछले दिनों तरह-तरह की चर्चाएं सोशल मीडिया पर सामने आईं। कुछ लोगों ने दावा किया कि प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली और इसे हनुमान जी की दैवीय शक्ति से जोड़कर देखा। हालांकि जिला प्रशासन ने इन दावों पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही कई खबरें भ्रामक हैं। प्रशासन ने साफ किया कि अभी तक प्रतिमा को विस्थापित अथवा हटाने संबंधी कोई प्रयास मशीन से नहीं किया गया है। इस स्पष्टीकरण के बाद भी प्रतिमा की प्राचीनता और मंदिर को लेकर लोगों की उत्सुकता बनी हुई है। फिलहाल प्रशासन की ओर से प्रतिमा की सुरक्षा और धार्मिक आस्था से जुड़े पहलुओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

कांग्रेस नेताओं ने भी प्रतिमा हटाने के विरोध में किया प्रदर्शन

इस बीच कांग्रेस नेताओं ने भी प्रतिमा को हटाए जाने की कथित योजना के विरोध में प्रदर्शन किया। विधायक महेश परमार, पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी समेत सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता भगवा ध्वज लेकर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां रामधुन गाई गई और हनुमान जी का पूजन किया गया। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर कथित तौर पर जल्दबाजी करने का आरोप लगाया और प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग की। हालांकि प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस तरह एक तरफ राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हैं, तो दूसरी तरफ संत समाज और श्रद्धालु भी प्रतिमा के संबंध में अपनी भावनाएं और मांग सामने रख रहे हैं।

सड़क चौड़ीकरण और आस्था के बीच प्रशासन के सामने चुनौती

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर अंतिम फैसला क्या होगा। एक ओर सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ की तैयारियां हैं, दूसरी ओर प्रतिमा से जुड़ी हजारों लोगों की आस्था। संत समाज बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, राजनीतिक दल भी मुद्दे को लेकर सक्रिय हो चुके हैं और श्रद्धालु प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बिना सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। प्रतिमा की वास्तविक उम्र को लेकर भी अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। 1000 साल पुरानी होने की संभावना को लेकर जांच जारी है और विशेषज्ञ अध्ययन के बाद ही इसकी वास्तविक प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।