पीएम मोदी साइबर सुरक्षा पर बोले- देश की अर्थव्यवस्था पर हमला कर सकते हैं साइबर आतंकी, डिजिटल बैंकिंग को बचाना जरूरी

  • October 28, 2026
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पीएम मोदी साइबर सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग पर भुवनेश्वर में संबोधित करते हुए

भुवनेश्वर, 28 अक्टूबर 2026: पीएम मोदी साइबर सुरक्षा को लेकर दिए अपने बयान के कारण चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़े जाते। किसी देश की अर्थव्यवस्था पर हमला करके भी उसे कमजोर किया जा सकता है।

दरअसल, प्रधानमंत्री ने 25 अक्टूबर को ओडिशा के भुवनेश्वर में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक ताकत बढ़ रही है। इसलिए देश की डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था को साइबर अपराधियों तथा साइबर आतंकियों से सुरक्षित रखना जरूरी है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने बैंकिंग क्षेत्र में हुए बदलाव और कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर भी टिप्पणी की।

पीएम मोदी ने साइबर सुरक्षा को लेकर क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइबर सुरक्षा को देश की आर्थिक सुरक्षा से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं और हथियारों तक सीमित नहीं हैं।

इसके अलावा, किसी देश की आर्थिक व्यवस्था को निशाना बनाकर भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

वहीं, भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का विस्तार तेजी से हुआ है।

इसलिए बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

प्रधानमंत्री ने वित्तीय संस्थानों को नई तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।

भुवनेश्वर में RBI के नए डेटा सेंटर का उद्घाटन

प्रधानमंत्री मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को RBI की दो नई सुविधाओं का उद्घाटन किया।

इनमें एक आधुनिक डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं।

इन सुविधाओं को भुवनेश्वर के इन्फोवैली-II क्षेत्र में विकसित किया गया है।

दरअसल, डेटा सेंटर का उद्देश्य महत्वपूर्ण बैंकिंग प्रणालियों के लिए सुरक्षित तकनीकी ढांचा उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा, प्रशिक्षण संस्थान साइबर सुरक्षा से संबंधित क्षमताओं को मजबूत करेगा।

वहीं, प्रधानमंत्री ने इसे देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

RBI डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा संस्थान की लागत कितनी है?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भुवनेश्वर की इन नई सुविधाओं की परियोजना लागत लगभग ₹169 करोड़ है।

यह निवेश बैंकिंग तकनीक और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने से जुड़ा है।

इसके अलावा, परियोजना में आधुनिक डिजिटल सुविधाएं विकसित की गई हैं।

वहीं, RBI की महत्वपूर्ण प्रणालियों को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर जोर दिया गया है।

हालांकि, यह लागत परियोजना के लिए बताई गई है।

इसे साइबर अपराध रोकने के लिए पूरे देश का कुल सरकारी बजट नहीं समझना चाहिए।

RBI का नया डेटा सेंटर कैसे काम करेगा?

डेटा सेंटर महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों के संचालन में सहायता करता है।

इसके अंतर्गत कंप्यूटिंग संसाधन और आवश्यक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।

इसके अलावा, डेटा की सुरक्षा और प्रणाली की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण होती है।

RBI की नई सुविधाओं में चार आधुनिक डेटा सेंटर तैयार किए गए हैं।

इनका उपयोग भुगतान और निपटान से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए किया जाना है।

वहीं, बैंकिंग क्षेत्र की भविष्य की तकनीकी जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है।

हालांकि, इन प्रणालियों के विस्तृत सुरक्षा प्रबंध सार्वजनिक नहीं किए जाते।

साइबर आतंकवाद क्या होता है?

साइबर आतंकवाद का संबंध डिजिटल प्रणालियों के जरिए गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली आतंकवादी गतिविधियों से होता है।

इसमें महत्वपूर्ण कंप्यूटर नेटवर्क या सेवाओं को निशाना बनाया जा सकता है।

हालांकि, हर ऑनलाइन धोखाधड़ी को साइबर आतंकवाद नहीं कहा जाता।

दरअसल, सामान्य साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और आतंकवाद से जुड़े साइबर हमलों में कानूनी अंतर होता है।

इसलिए किसी घटना को साइबर आतंकवाद घोषित करने के लिए उसके उद्देश्य और अन्य तथ्यों की जांच जरूरी है।

बैंकिंग क्षेत्र पर साइबर हमलों का खतरा क्यों बढ़ता है?

आज लाखों लोग रोज डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करते हैं।

इनमें ऑनलाइन ट्रांसफर, मोबाइल बैंकिंग और UPI भुगतान शामिल हैं।

इसके अलावा, बैंक बड़ी मात्रा में डिजिटल जानकारी संभालते हैं।

इसलिए वित्तीय प्रणालियां साइबर अपराधियों के निशाने पर आ सकती हैं।

वहीं, फर्जी वेबसाइट और धोखाधड़ी वाले संदेश भी खतरा पैदा करते हैं।

हालांकि, अलग-अलग साइबर खतरों के लिए अलग सुरक्षा उपाय जरूरी होते हैं।

इसीलिए तकनीकी सुरक्षा के साथ लोगों को जागरूक करना भी महत्वपूर्ण है।

क्या साइबर हमले से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है?

किसी बड़े बैंकिंग नेटवर्क या भुगतान प्रणाली पर हमला वित्तीय सेवाओं को प्रभावित कर सकता है।

इसके अलावा, लंबे समय तक तकनीकी व्यवधान होने पर कारोबार में परेशानी हो सकती है।

वहीं, डिजिटल लेनदेन रुकने से ग्राहकों को नुकसान हो सकता है।

प्रधानमंत्री ने इसी प्रकार के जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया।

हालांकि, उन्होंने किसी विशेष नए हमले की पुष्टि नहीं की।

इसलिए उनके बयान को संभावित खतरों के प्रति चेतावनी के रूप में समझना चाहिए।

साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान की क्या भूमिका होगी?

भुवनेश्वर में स्थापित साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान विशेषज्ञों के प्रशिक्षण पर ध्यान देगा।

इससे बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी ज्ञान बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, कर्मचारियों को नई तकनीकों और खतरों के बारे में प्रशिक्षित किया जा सकेगा।

वहीं, डिजिटल सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा।

हालांकि, किसी प्रशिक्षण संस्थान के बनने से सभी प्रकार के साइबर हमले पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाते।

इसलिए लगातार तकनीकी सुधार भी आवश्यक हैं।

पीएम मोदी ने डिजिटल बैंकिंग की उपलब्धियां गिनाईं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

उन्होंने बताया कि आज डिजिटल बैंकिंग से चौबीसों घंटे कई सेवाएं उपलब्ध हैं।

इसके अलावा, छोटे कारोबारियों और कारीगरों को औपचारिक बैंकिंग से जोड़ने के प्रयास किए गए।

वहीं, उन्होंने गरीब और मध्यम वर्ग के लिए वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, आने वाला दशक बैंकिंग को अधिक सक्षम और भरोसेमंद बनाने का होगा।

पीएम मोदी ने कांग्रेस की ‘फोन बैंकिंग’ व्यवस्था पर क्या आरोप लगाए?

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के शासनकाल की बैंकिंग व्यवस्था की आलोचना की।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले प्रभावशाली लोगों को फोन कॉल के आधार पर बड़े बैंक ऋण मिल जाते थे।

इसके अलावा, सामान्य नागरिकों के लिए बैंक ऋण प्राप्त करना कठिन था।

प्रधानमंत्री ने इस व्यवस्था को ‘फोन बैंकिंग’ कहा।

वहीं, उन्होंने इसे बैंकों के गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी NPA से जुड़ी समस्याओं का एक कारण बताया।

हालांकि, यह प्रधानमंत्री का राजनीतिक आरोप है।

इसे सभी पुराने बैंक ऋणों के बारे में स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं समझना चाहिए।

NPA क्या होता है?

NPA का पूरा नाम Non-Performing Asset है।

हिंदी में इसे गैर-निष्पादित परिसंपत्ति कहा जाता है।

आमतौर पर जब किसी ऋण का मूलधन या ब्याज निर्धारित अवधि तक बकाया रहता है, तो नियामकीय शर्तों के अनुसार उसे NPA माना जा सकता है।

इससे बैंक की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा, अधिक NPA होने पर नए ऋण देने की क्षमता पर दबाव पड़ सकता है।

हालांकि, NPA बढ़ने के कई आर्थिक और कारोबारी कारण हो सकते हैं।

इसलिए सभी NPA को किसी एक राजनीतिक नीति का परिणाम नहीं माना जा सकता।

जनधन योजना से बैंकिंग सेवाओं का विस्तार कैसे हुआ?

प्रधानमंत्री जनधन योजना वर्ष 2014 में शुरू की गई थी।

इसका उद्देश्य बैंकिंग सुविधाओं से वंचित लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना है।

इसके अलावा, योजना के माध्यम से बचत खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

वहीं, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी सरकारी व्यवस्थाओं में बैंक खातों की भूमिका बढ़ी।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार का उल्लेख किया।

हालांकि, बैंक खाता खुलना और सभी वित्तीय सेवाओं का नियमित उपयोग करना अलग बातें हैं।

छोटे कारोबारियों को डिजिटल बैंकिंग से क्या फायदा हो सकता है?

डिजिटल बैंकिंग छोटे कारोबारियों के लिए भुगतान प्राप्त करना आसान बना सकती है।

इसके अलावा, ऑनलाइन लेनदेन का रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है।

वहीं, कुछ सरकारी और बैंकिंग योजनाओं से पात्र उद्यमियों को वित्तीय सहायता मिल सकती है।

प्रधानमंत्री ने रेहड़ी-पटरी वालों, कारीगरों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि औपचारिक बैंकिंग से इन वर्गों तक सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास हुए हैं।

हालांकि, ऋण स्वीकृति बैंक के नियमों और पात्रता पर निर्भर करती है।

प्रधानमंत्री ने ओडिशा के विकास पर क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने भुवनेश्वर में नई वित्तीय संस्थागत सुविधाएं शुरू होने को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि विकास का लाभ छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचना चाहिए।

इसके अलावा, उन्होंने संतुलित क्षेत्रीय विकास पर जोर दिया।

वहीं, ओडिशा में तकनीकी और औद्योगिक अवसरों की संभावनाओं पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य खनिज संसाधनों से लेकर आधुनिक तकनीकी उद्योगों तक नई संभावनाएं विकसित कर सकता है।

हालांकि, ये विकास संबंधी लक्ष्य और संभावनाएं हैं।

इनसे जुड़े वास्तविक परिणाम भविष्य के आंकड़ों से स्पष्ट होंगे।

डिजिटल बैंकिंग करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखें?

ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करते समय कुछ सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।

सबसे पहले, अपना OTP, UPI PIN और पासवर्ड किसी को न बताएं।

इसके अलावा, अनजान लिंक पर बैंकिंग जानकारी दर्ज करने से बचें।

वहीं, संदिग्ध फोन कॉल पर पैसे ट्रांसफर न करें।

किसी व्यक्ति के कहने पर अनजान ऐप इंस्टॉल करना भी जोखिमपूर्ण हो सकता है।

यदि खाते से बिना अनुमति पैसे कटते हैं, तो तुरंत बैंक को सूचना दें।

इसके अलावा, भारत के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।

साइबर फ्रॉड होने पर शिकायत कहां करें?

भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है।

इसके अलावा, cybercrime.gov.in पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है।

धोखाधड़ी का पता चलते ही संबंधित बैंक से भी संपर्क करना चाहिए।

वहीं, लेनदेन का विवरण और उपलब्ध प्रमाण सुरक्षित रखें।

हालांकि, शिकायत दर्ज करने से पूरी रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

इसलिए जितनी जल्दी संभव हो, संबंधित संस्थाओं को जानकारी देना जरूरी है।

बैंकिंग साइबर सुरक्षा में RBI की क्या भूमिका है?

भारतीय रिजर्व बैंक देश की बैंकिंग व्यवस्था का प्रमुख नियामक है।

इसके अलावा, वह भुगतान प्रणालियों से जुड़े विभिन्न नियामकीय कार्य भी करता है।

वहीं, डिजिटल बैंकिंग में जोखिम प्रबंधन और तकनीकी सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय हैं।

RBI के नए डेटा सेंटर और प्रशिक्षण संस्थान को इन्हीं व्यापक प्रयासों से जोड़कर देखा जा सकता है।

हालांकि, बैंकिंग सुरक्षा केवल एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है।

इसमें बैंक, तकनीकी सेवा प्रदाता और ग्राहकों की भी भूमिका होती है।

क्या डिजिटल बैंकिंग पूरी तरह सुरक्षित हो सकती है?

डिजिटल बैंकिंग में अनेक सुरक्षा उपाय लागू किए जाते हैं।

इनमें प्रमाणीकरण, लेनदेन की निगरानी और तकनीकी सुरक्षा प्रणालियां शामिल हो सकती हैं।

हालांकि, कोई भी डिजिटल व्यवस्था सभी जोखिमों से पूरी तरह मुक्त नहीं होती।

इसलिए सुरक्षा तकनीक को नियमित रूप से बेहतर बनाना जरूरी है।

इसके अलावा, कर्मचारियों को प्रशिक्षण और ग्राहकों को जागरूक करना महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने भी अपने संबोधन में बैंकिंग को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया।

पीएम मोदी साइबर सुरक्षा पर आगे क्या बदलाव चाहते हैं?

प्रधानमंत्री ने वित्तीय क्षेत्र के लिए आधुनिक डिजिटल ढांचे की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में बैंकिंग को अधिक सक्षम और विश्वसनीय बनाना होगा।

इसके अलावा, साइबर हमलों से निपटने की क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

वहीं, RBI के नए डेटा सेंटर और प्रशिक्षण संस्थान को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

हालांकि, उन्होंने इस कार्यक्रम में किसी नए सार्वभौमिक साइबर सुरक्षा कानून के लागू होने की घोषणा नहीं की।

इसलिए नई सुविधाओं के उद्घाटन और नए कानून की घोषणा को अलग समझना चाहिए।

निष्कर्ष

पीएम मोदी साइबर सुरक्षा को भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।

उन्होंने भुवनेश्वर में RBI के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने डिजिटल बैंकिंग में बढ़ते अवसरों और संभावित साइबर खतरों का उल्लेख किया।

वहीं, उन्होंने कांग्रेस की पुरानी बैंकिंग नीतियों पर भी सवाल उठाए।

प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश था कि मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद बैंकिंग व्यवस्था जरूरी है।

आपकी क्या राय है? क्या भारत में डिजिटल बैंकिंग और साइबर फ्रॉड से सुरक्षा के लिए तकनीकी प्रशिक्षण तथा जागरूकता कार्यक्रम और बढ़ाए जाने चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

संपादकीय नोट: इस लेख में प्रधानमंत्री के राजनीतिक आरोपों को उन्हीं के बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। साइबर आतंकवाद संबंधी टिप्पणी किसी नए विशेष साइबर हमले की पुष्टि नहीं है।