दिल्ली वोटर लिस्ट SIR पर सुप्रीम कोर्ट: CJI बोले- नाम कटने पर घबराएं नहीं, हम सुन रहे हैं मामला

  • November 5, 2026
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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण पर तीखे सवाल

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में विस्तृत सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने चुनाव आयोग द्वारा 3 नवंबर को जारी किए गए आधिकारिक स्पष्टीकरण पर कड़े सवाल उठाए। वकीलों ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग ने एसआईआर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए पुराने व प्रमाणित मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए जबरन ‘फॉर्म-6’ भरने का फरमान सुनाया है।

जबकि शीर्ष अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा था कि जो नागरिक 2026 की मतदाता सूची में पहले से शामिल रहे हैं और एसआईआर के दौरान जिनके नाम काटे गए हैं, उन्हें नए मतदाताओं की तरह फॉर्म-6 भरने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इस विधिक गतिरोध के बीच ड्राफ्ट वोटर लिस्ट नाम कटना का मुद्दा लाखों नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से सीधे जुड़ गया है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को तय की गई है।

सीजेआई सूर्यकांत का देशवासियों को भरोसा

याचिकाकर्ताओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सार्वजनिक रूप से कहा कि आम लोगों को तनिक भी घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की गहन सुनवाई कर रहा है। प्रधान न्यायाधीश ने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ, तो अदालत चुनाव आयोग को दावा और आपत्ति दर्ज कराने तथा फॉर्म भरने की समय-सीमा को आगे बढ़ाने का स्पष्ट आदेश दे सकती है।

अदालत ने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि किसी भी वास्तविक और वैध भारतीय नागरिक का नाम प्रशासनिक जल्दबाजी या तकनीकी प्रक्रियाओं के फेर में मतदाता सूची से बाहर न रहने पाए। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट नाम कटना जैसी प्रक्रिया से उपजी जन-असमंजस की स्थिति पर अदालत के इस रुख ने नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है।

10 साल पुराने वोटरों से भी फॉर्म-6 भरवाने की आयोगी शर्त

दरअसल, विवाद की शुरुआत चुनाव आयोग के उस आदेश से हुई जिसमें कहा गया था कि यदि किसी नागरिक का नाम एसआईआर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो उसे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 ही भरना होगा। आयोग ने अपनी दलील में कहा था कि भले ही कोई व्यक्ति पिछले 10 साल से लगातार वोटर रहा हो, तब भी उसे फॉर्म-6 भरना पड़ेगा और इसे झूठा शपथ-पत्र नहीं माना जाएगा तथा कोई आपराधिक केस नहीं दर्ज होगा।

हालांकि, याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि फॉर्म-6 के प्रारूप में स्पष्ट घोषणा करनी होती है कि “मेरा नाम पहली बार वोटर लिस्ट में जोड़ा जा रहा है”, जो पुराने मतदाताओं के संदर्भ में कानूनी और तथ्यात्मक रूप से असत्य है। चुनाव आयोग के इस विरोधाभासी कदम पर अब सुप्रीम कोर्ट की नजर बनी हुई है। इस प्रकार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट नाम कटना का यह विवाद अब 19 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में निर्णायक मोड़ ले सकता है।