नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: मक्का इथेनॉल खरीद कीमत में कटौती से उत्पादन कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने खरीद दर ₹3 प्रति लीटर कम की है। अब मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत ₹68.86 प्रति लीटर होगी।
दरअसल, पहले कंपनियों को ₹71.86 प्रति लीटर मिलते थे। हालांकि, नई खरीद व्यवस्था में प्रोत्साहन राशि कम कर दी गई है।
इसके अलावा, सरकार ने 2026-27 के इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए कच्चे माल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है।
इससे इथेनॉल उद्योग में लागत और मुनाफे को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
मक्का इथेनॉल खरीद कीमत में कितनी कटौती हुई?
तेल विपणन कंपनियों ने मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद दर घटाई है।
पहले इसकी कीमत ₹71.86 प्रति लीटर थी।
वहीं, अब नई दर ₹68.86 प्रति लीटर तय की गई है।
इस तरह कीमत में ₹3 प्रति लीटर की कमी हुई है।
इसके अलावा, मक्का आधारित इथेनॉल के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी घटाई गई है।
पहले यह ₹5.79 प्रति लीटर थी।
हालांकि, अब इसे ₹2.79 प्रति लीटर कर दिया गया है।
इसलिए नई खरीद दर से उत्पादकों की प्रति लीटर आय प्रभावित हो सकती है।
इथेनॉल की नई खरीद दरें क्या हैं?
तेल विपणन कंपनियों ने अलग-अलग कच्चे माल से बने इथेनॉल के लिए दरें निर्धारित की हैं।
प्रमुख दरें इस प्रकार हैं:
| कच्चा माल | नई खरीद दर |
|---|---|
| मक्का आधारित इथेनॉल | ₹68.86 प्रति लीटर |
| क्षतिग्रस्त खाद्यान्न | ₹64 प्रति लीटर |
| FCI का अधिशेष चावल | ₹60.32 प्रति लीटर |
| C-Heavy Molasses | ₹57.97 प्रति लीटर |
मक्का आधारित इथेनॉल की कीमत में प्रोत्साहन राशि शामिल है।
वहीं, अन्य दरें संबंधित टेंडर की निर्धारित शर्तों के अनुसार हैं।
इसके अलावा, लागू GST और परिवहन शुल्क अलग हो सकते हैं।
इसलिए इन दरों को उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल की खुदरा कीमत न समझें।
मक्का इथेनॉल खरीद कीमत पहली बार क्यों घटाई गई?
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के दौरान मक्का आधारित इथेनॉल को बढ़ावा दिया गया था।
इसके लिए कंपनियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाती थी।
हालांकि, नए टेंडर में इस राशि को कम कर दिया गया है।
इससे खरीद कीमत में गिरावट आई है।
उद्योग रिपोर्टों के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत के बाद यह पहली प्रमुख कटौती मानी जा रही है।
हालांकि, कटौती का विस्तृत नीतिगत औचित्य संबंधित सरकारी दस्तावेजों से समझना होगा।
इसलिए केवल कीमत घटने से उद्योग की भविष्य की मांग तय नहीं की जा सकती।
इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
मक्का आधारित इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को अब कम खरीद दर मिलेगी।
इससे उनके राजस्व और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
दरअसल, मक्का खरीदने और इथेनॉल बनाने में अलग-अलग खर्च होते हैं।
इसके अलावा, बिजली, परिवहन और संयंत्र संचालन की लागत भी होती है।
वहीं, कच्चे माल की कीमत बढ़ने से खर्च और बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में खरीद दर घटने से कुछ कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है।
हालांकि, वास्तविक असर हर कंपनी की उत्पादन लागत पर निर्भर करेगा।
मक्के की बढ़ती कीमतों से उद्योग क्यों परेशान है?
मक्का केवल इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल नहीं होता।
इसका उपयोग पशु आहार और पोल्ट्री फीड में भी किया जाता है।
इसके अलावा, स्टार्च और खाद्य उद्योग में इसकी मांग रहती है।
इसलिए अलग-अलग उद्योग मक्के की खरीद करते हैं।
वहीं, इथेनॉल उद्योग की मांग बढ़ने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
हालांकि, मक्के की कीमत मौसम और उत्पादन पर भी निर्भर करती है।
इसलिए केवल इथेनॉल उद्योग को कीमतों में बदलाव का कारण नहीं माना जा सकता।
चीनी से इथेनॉल बनाने पर क्या रोक लगाई गई?
इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए नए टेंडर में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।
इसके तहत गन्ने के रस, चीनी सिरप और B-Heavy Molasses से बने इथेनॉल की खरीद के प्रस्ताव नहीं मांगे गए हैं।
दरअसल, सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना चाहती है।
वहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में कमजोर बारिश से उत्पादन को लेकर चिंता बनी है।
इसके अलावा, चीनी की कीमतों पर भी दबाव है।
हालांकि, C-Heavy Molasses से बने इथेनॉल की खरीद की अनुमति बनी हुई है।
इसलिए सभी प्रकार के शीरा आधारित इथेनॉल पर प्रतिबंध लगने की बात गलत होगी।
इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 कब से शुरू होगा?
नया इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 1 नवंबर 2026 से शुरू होगा।
यह अवधि 31 अक्टूबर 2027 तक चलेगी।
दरअसल, तेल विपणन कंपनियों ने 16 अक्टूबर को इसके लिए टेंडर जारी किया था।
इसमें लगभग 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने का प्रस्ताव है।
वहीं, अलग-अलग तिमाहियों के लिए आपूर्ति योजना बनाई गई है।
इसके अलावा, कंपनियां निर्धारित पात्रता के अनुसार बोली लगा सकती हैं।
हालांकि, अंतिम खरीद मात्रा वास्तविक आवंटन और आपूर्ति पर निर्भर करेगी।
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम क्या है?
भारत में पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था लागू है।
इसे Ethanol Blended Petrol Programme कहा जाता है।
दरअसल, इथेनॉल एक जैव ईंधन है।
यह मक्का, गन्ने और अन्य उपयुक्त कच्चे माल से तैयार किया जा सकता है।
वहीं, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है।
इसके अलावा, सरकार वाहन उत्सर्जन से जुड़ी चुनौतियों को कम करने का लक्ष्य भी बताती है।
हालांकि, पर्यावरणीय लाभ उत्पादन प्रक्रिया और कच्चे माल पर भी निर्भर करते हैं।
E20 पेट्रोल का क्या मतलब है?
E20 ऐसे पेट्रोल को कहा जाता है, जिसमें लगभग 20 प्रतिशत इथेनॉल मिला होता है।
वहीं, शेष हिस्सा मुख्य रूप से पेट्रोल का होता है।
दरअसल, भारत ने इथेनॉल मिश्रण को बढ़ाने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं।
इसके अलावा, E20 के लिए पर्याप्त इथेनॉल आपूर्ति जरूरी होती है।
इसी कारण तेल कंपनियां अलग-अलग कच्चे माल से तैयार इथेनॉल खरीदती हैं।
हालांकि, वाहन की अनुकूलता और ईंधन संबंधी निर्देशों का पालन करना भी महत्वपूर्ण है।
क्या मक्का किसानों को नुकसान हो सकता है?
मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत घटने से किसानों पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
दरअसल, यदि उत्पादन कंपनियों की आय घटती है, तो वे कच्चे माल की खरीद लागत नियंत्रित करने की कोशिश कर सकती हैं।
हालांकि, इससे मक्के का बाजार भाव निश्चित रूप से गिर जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं है।
वहीं, पोल्ट्री और खाद्य उद्योग की मांग भी मक्के की कीमत प्रभावित करती है।
इसके अलावा, उत्पादन, आयात और मौसम का भी असर पड़ता है।
इसलिए किसानों पर वास्तविक प्रभाव आने वाले बाजार आंकड़ों से स्पष्ट होगा।
इथेनॉल उद्योग ने कीमत घटाने पर क्या कहा?
मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादकों ने नई दरों को लेकर चिंता जताई है।
उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि खरीद कीमत कम होने से मुनाफे पर दबाव पड़ेगा।
वहीं, Grain Ethanol Manufacturers Association ने खरीद नीति की समीक्षा की जरूरत बताई है।
इसके अलावा, संगठन ने उत्पादन लागत और कच्चे माल की कीमतों पर ध्यान देने की मांग की।
हालांकि, उद्योग की सभी कंपनियों की लागत समान नहीं होती।
इसलिए नई खरीद दरों का असर अलग-अलग संयंत्रों पर अलग हो सकता है।
क्या चावल से इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को फायदा होगा?
नए टेंडर में मक्का के साथ चावल आधारित इथेनॉल को भी खरीद के लिए पात्र रखा गया है।
इसमें FCI का अधिशेष चावल और क्षतिग्रस्त खाद्यान्न शामिल हैं।
वहीं, इनसे तैयार इथेनॉल की खरीद दर मक्का आधारित इथेनॉल से कम है।
इसके अलावा, कंपनियां उत्पादन लागत के अनुसार अलग कच्चे माल का उपयोग कर सकती हैं।
हालांकि, सस्ता खरीद मूल्य उत्पादक के अधिक मुनाफे की गारंटी नहीं है।
इसलिए वास्तविक लाभ कच्चे माल की लागत और उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगा।
इथेनॉल उद्योग में आगे क्या बदलाव हो सकते हैं?
नई खरीद व्यवस्था से मक्का आधारित इथेनॉल कंपनियों की लागत पर दबाव बना रह सकता है।
वहीं, चीनी से इथेनॉल उत्पादन के लिए कुछ स्रोतों पर प्रतिबंध से अनाज आधारित उत्पादन की भूमिका बढ़ सकती है।
इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियों को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।
हालांकि, खरीद के वास्तविक आवंटन और उत्पादन की लागत अभी महत्वपूर्ण पहलू हैं।
इसलिए आने वाले महीनों में कंपनियों की प्रतिक्रिया और सरकारी नीतियों पर नजर रहेगी।
मक्का इथेनॉल खरीद कीमत कटौती पर क्या है निष्कर्ष?
मक्का इथेनॉल खरीद कीमत ₹71.86 से घटकर ₹68.86 प्रति लीटर हो गई है।
वहीं, प्रोत्साहन राशि ₹5.79 से घटाकर ₹2.79 प्रति लीटर की गई है।
इसके अलावा, गन्ने के रस और B-Heavy Molasses से बने इथेनॉल को नए टेंडर से बाहर रखा गया है।
हालांकि, C-Heavy Molasses और अनाज आधारित इथेनॉल की खरीद जारी रह सकती है।
इसलिए नई नीति में कंपनियों की लागत, चीनी की उपलब्धता और E20 लक्ष्य के बीच संतुलन महत्वपूर्ण होगा।
आपकी क्या राय है? क्या सरकार को मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादकों की खरीद कीमत पर दोबारा विचार करना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
नोट: इस लेख में सभी खरीद दरें इथेनॉल उत्पादकों से तेल विपणन कंपनियों की खरीद के संदर्भ में हैं। इन्हें पेट्रोल या मक्के की खुदरा कीमत नहीं समझना चाहिए।


