लैब ग्रोन डायमंड निर्यात 40.72% बढ़ा, प्राकृतिक हीरों की चमक फीकी; जानें GJEPC के आंकड़े

  • October 21, 2026
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लैब ग्रोन डायमंड निर्यात और प्राकृतिक हीरों के साथ डायमंड माइन का दृश्य

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: लैब ग्रोन डायमंड निर्यात में भारत ने बड़ी बढ़त दर्ज की है। सितंबर 2026 में प्रयोगशाला में तैयार हीरों का निर्यात तेजी से बढ़ा। वहीं, प्राकृतिक हीरों के निर्यात मूल्य में गिरावट देखी गई।

दरअसल, Gem & Jewellery Export Promotion Council (GJEPC) ने नए आंकड़े जारी किए हैं। इनके अनुसार, लैब ग्रोन डायमंड निर्यात 40.72 प्रतिशत बढ़ा है।

दूसरी ओर, कटे और पॉलिश किए गए प्राकृतिक हीरों का निर्यात 5.44 प्रतिशत घटा।

हालांकि, पूरे रत्न एवं आभूषण उद्योग के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

लैब ग्रोन डायमंड निर्यात में कितनी बढ़ोतरी हुई?

सितंबर 2026 में लैब ग्रोन डायमंड का निर्यात मजबूत रहा।

दरअसल, पॉलिश किए गए लैब ग्रोन डायमंड का निर्यात 151.43 मिलियन डॉलर पहुंच गया।

पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 107.61 मिलियन डॉलर था।

इस तरह डॉलर मूल्य में 40.72 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

वहीं, रुपये में निर्यात लगभग 1,445.53 करोड़ रुपये रहा।

इसके अलावा, पिछले साल सितंबर में यह लगभग 950.58 करोड़ रुपये था।

इसलिए सितंबर के आंकड़े प्रयोगशाला में तैयार हीरों के निर्यात में तेजी दिखाते हैं।

प्राकृतिक हीरों का निर्यात क्यों घटा?

प्राकृतिक हीरों के निर्यात पर दबाव बना हुआ है।

दरअसल, सितंबर 2026 में कटे और पॉलिश किए गए हीरों का निर्यात 1,293.30 मिलियन डॉलर रहा।

वहीं, सितंबर 2025 में यह 1,367.64 मिलियन डॉलर था।

इसलिए डॉलर मूल्य में 5.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

हालांकि, निर्यात मूल्य में कमी का अर्थ हर बार निर्यात मात्रा में गिरावट नहीं होता।

इसके अलावा, कीमत, उत्पाद की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मांग भी निर्यात मूल्य को प्रभावित करती हैं।

इसलिए प्राकृतिक हीरों के बाजार की स्थिति समझने के लिए मात्रा और मूल्य दोनों देखना जरूरी है।

लैब ग्रोन डायमंड और प्राकृतिक हीरे में क्या अंतर है?

लैब ग्रोन डायमंड प्रयोगशाला में तकनीकी प्रक्रियाओं से तैयार किए जाते हैं।

वहीं, प्राकृतिक हीरे पृथ्वी के भीतर भूगर्भीय प्रक्रियाओं से बनते हैं।

दरअसल, दोनों में कार्बन की क्रिस्टलीय संरचना समान हो सकती है।

इसके अलावा, दोनों के कई भौतिक और ऑप्टिकल गुण भी मिलते-जुलते हैं।

हालांकि, उनकी उत्पत्ति अलग होती है।

लैब ग्रोन डायमंड कम समय में तैयार किए जा सकते हैं।

दूसरी ओर, प्राकृतिक हीरों का निर्माण भूगर्भीय परिस्थितियों में बहुत लंबी अवधि के दौरान होता है।

इसलिए खरीदते समय दोनों की उत्पत्ति और प्रमाणन की जानकारी लेना जरूरी है।

भारत के हीरा उद्योग में क्या बदलाव हो रहा है?

भारत हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग का महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र है।

खासतौर पर गुजरात का सूरत हीरा कारोबार के लिए प्रसिद्ध है।

वहीं, प्रयोगशाला में तैयार हीरों की प्रोसेसिंग में भी भारतीय कंपनियां सक्रिय हैं।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग-अलग कीमत वाले उत्पादों की मांग मौजूद है।

हालांकि, लैब ग्रोन डायमंड की तेज वृद्धि से प्राकृतिक हीरों का कारोबार समाप्त हो जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं है।

दोनों उत्पादों के अपने अलग ग्राहक और बाजार हैं।

इसलिए भविष्य की मांग कई आर्थिक और व्यापारिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

अप्रैल से सितंबर 2026 तक हीरा निर्यात का प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भी अलग-अलग रुझान दिखाई दिए।

दरअसल, अप्रैल से सितंबर के दौरान प्राकृतिक कटे और पॉलिश हीरों का निर्यात 5.81 अरब डॉलर रहा।

यह पिछले साल की समान अवधि से 6.96 प्रतिशत कम था।

हालांकि, निर्यात मात्रा 4.64 प्रतिशत बढ़ी।

वहीं, कुल मात्रा लगभग 83.98 लाख कैरेट पहुंच गई।

दूसरी ओर, पॉलिश किए गए लैब ग्रोन डायमंड का निर्यात 685.10 मिलियन डॉलर रहा।

इसमें 17.08 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

इसलिए पहली छमाही के आंकड़े भी दोनों श्रेणियों में अलग रुझान दिखाते हैं।

भारत के रत्न और आभूषण निर्यात में कितनी वृद्धि हुई?

सितंबर 2026 में पूरे रत्न और आभूषण क्षेत्र का निर्यात बढ़ा।

दरअसल, कुल निर्यात लगभग 2.95 अरब डॉलर पहुंच गया।

यह पिछले साल सितंबर के मुकाबले 9.43 प्रतिशत अधिक है।

वहीं, रुपये में निर्यात लगभग 28,157.55 करोड़ रुपये रहा।

इसके अलावा, सोने के जड़ाऊ आभूषणों की मांग ने भी वृद्धि में योगदान दिया।

हालांकि, सभी उत्पाद श्रेणियों में समान बढ़ोतरी नहीं हुई।

इसलिए पूरे उद्योग और प्राकृतिक हीरों के आंकड़ों को अलग-अलग देखना चाहिए।

जड़ाऊ सोने के आभूषणों की मांग कितनी बढ़ी?

सितंबर में जड़ाऊ सोने के आभूषणों का निर्यात भी बढ़ा।

GJEPC के अनुसार, इस श्रेणी का निर्यात 50.23 प्रतिशत बढ़ा।

वहीं, इसका मूल्य लगभग 812.62 मिलियन डॉलर पहुंचा।

दरअसल, कुछ विदेशी बाजारों से मांग में सुधार देखने को मिला।

इसके अलावा, व्यापार समझौतों और बदलती शुल्क दरों ने बाजार को प्रभावित किया।

हालांकि, सोने की ऊंची कीमतें अब भी उद्योग के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

इसलिए कंपनियों को लागत और अंतरराष्ट्रीय मांग पर ध्यान देना होगा।

प्राकृतिक हीरों का आयात क्यों बढ़ रहा है?

सितंबर में कटे और पॉलिश किए गए हीरों का आयात बढ़ा।

दरअसल, इस श्रेणी में आयात 22.92 प्रतिशत बढ़कर 152.33 मिलियन डॉलर पहुंचा।

वहीं, अप्रैल से सितंबर के बीच आयात में 45.52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

इसके अलावा, कच्चे हीरों का आयात भी सितंबर में बढ़ा।

हालांकि, आयात बढ़ने के पीछे केवल एक कारण तय नहीं किया जा सकता।

इसमें व्यापारिक जरूरतें, कीमतें और उद्योग की मांग शामिल हो सकती हैं।

इसलिए उद्योग के पूरे व्यापारिक चक्र का विश्लेषण करना जरूरी है।

क्या प्राकृतिक हीरों की कीमतों पर दबाव है?

प्राकृतिक हीरों के निर्यात मूल्य में गिरावट दर्ज हुई है।

हालांकि, पहली छमाही में निर्यात मात्रा बढ़ी है।

दरअसल, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 83.98 लाख कैरेट प्राकृतिक हीरों का निर्यात हुआ।

वहीं, पिछले साल इसी अवधि में यह मात्रा 80.26 लाख कैरेट थी।

इसके बावजूद डॉलर में कुल निर्यात मूल्य कम रहा।

इससे प्रति कैरेट औसत निर्यात प्राप्ति पर दबाव का संकेत मिलता है।

हालांकि, वास्तविक कीमतें हीरों के आकार, गुणवत्ता और अन्य विशेषताओं के अनुसार बदलती हैं।

क्या लैब ग्रोन डायमंड प्राकृतिक हीरों से सस्ते होते हैं?

कई बाजारों में समान आकार और गुणवत्ता वाले लैब ग्रोन डायमंड प्राकृतिक हीरों से कम कीमत पर मिलते हैं।

दरअसल, दोनों की आपूर्ति और उत्पादन प्रक्रिया अलग है।

इसके अलावा, बाजार में उपलब्धता भी कीमतों को प्रभावित करती है।

हालांकि, हर उत्पाद के लिए एक समान मूल्य अंतर नहीं होता।

वहीं, ज्वेलरी की डिजाइन और धातु की कीमत भी अंतिम लागत बढ़ा सकती है।

इसलिए खरीदारी करते समय प्रमाणपत्र और उत्पाद विवरण की जांच जरूरी है।

GJEPC ने निर्यात के आंकड़ों पर क्या कहा?

GJEPC के चेयरमैन किरीट भंसाली ने निर्यात वृद्धि को उत्साहजनक बताया।

उनके अनुसार, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद उद्योग ने बढ़त दर्ज की।

वहीं, जड़ाऊ सोने के आभूषणों और लैब ग्रोन डायमंड की मांग सकारात्मक रही।

इसके अलावा, बाजारों में विविधता और उत्पादों में नवाचार को महत्वपूर्ण बताया गया।

हालांकि, प्राकृतिक हीरों के निर्यात पर दबाव अब भी बना हुआ है।

इसलिए आगे मांग और कीमतों में सुधार पर नजर रहेगी।

लैब ग्रोन डायमंड निर्यात का भविष्य कैसा रहेगा?

लैब ग्रोन डायमंड निर्यात में सितंबर के दौरान तेज वृद्धि दर्ज हुई है।

हालांकि, एक महीने की बढ़ोतरी भविष्य में लगातार तेजी की गारंटी नहीं देती।

दरअसल, वैश्विक मांग और कीमतों में बदलाव संभव हैं।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियम भी निर्यात को प्रभावित कर सकते हैं।

वहीं, भारतीय कंपनियों की उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धा महत्वपूर्ण होगी।

इसलिए आने वाले महीनों के निर्यात आंकड़े उद्योग की दिशा को और स्पष्ट करेंगे।

लैब ग्रोन डायमंड निर्यात पर क्या है निष्कर्ष?

सितंबर 2026 में लैब ग्रोन डायमंड निर्यात 40.72 प्रतिशत बढ़ा।

वहीं, प्राकृतिक कटे और पॉलिश हीरों के निर्यात मूल्य में 5.44 प्रतिशत की गिरावट आई।

हालांकि, पूरे रत्न और आभूषण उद्योग का निर्यात 9.43 प्रतिशत बढ़ा।

इसके अलावा, जड़ाऊ सोने के आभूषणों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया।

इसलिए भारत के आभूषण उद्योग में अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों के रुझान अलग दिखाई दे रहे हैं।

आपकी क्या राय है? क्या भविष्य में लैब ग्रोन डायमंड प्राकृतिक हीरों के बाजार को बड़ी चुनौती देंगे? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

नोट: लेख में प्रतिशत बदलाव की तुलना सितंबर 2025 और सितंबर 2026 के बीच की गई है। डॉलर और रुपये में वृद्धि दर विनिमय दर के कारण अलग हो सकती है।