Donald Trump Iran Strategy: क्या ईरान को लेकर बदल रही है ट्रंप की रणनीति?
क्या बदल रही है ट्रंप की ईरान नीति?
क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति बदल रहे हैं? क्या पहले सीधे टकराव की नीति अपनाने वाले ट्रंप अब एक नए गेम प्लान पर काम कर रहे हैं? और क्या ईरान को लंबे संघर्ष में उलझाकर अमेरिका अपने बड़े रणनीतिक लक्ष्य हासिल करना चाहता है?
दरअसल, ट्रंप की शुरुआत “मैक्सिमम प्रेशर” नीति से हुई थी। आर्थिक प्रतिबंध, कड़े बयान और सैन्य ताकत का खुला प्रदर्शन… लेकिन हाल के घटनाक्रम एक अलग तस्वीर दिखा रहे हैं।
अमेरिका अब सीधे बड़े युद्ध में उतरने के बजाय ईरान की सैन्य, आर्थिक और क्षेत्रीय क्षमताओं को धीरे-धीरे कमजोर करने की रणनीति पर फोकस कर सकता है।
यानी, ऐसा माहौल, जहां ईरान लगातार दबाव में रहे, लेकिन अमेरिका खुद लंबे युद्ध की कीमत न चुकाए। इससे वॉशिंगटन अपने सहयोगियों को भी साथ रख सकता है और घरेलू राजनीति में भी बड़े सैन्य हस्तक्षेप के जोखिम से बच सकता है।
ईरान का रुख और अमेरिका की मौजूदा स्थिति
इधर, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने आज साफ कर दिया है कि वे हिज्बुल्लाह के साथ खड़े हैं। ईरान का कहना है कि इजरायल के प्रभाव में शुरू हुई जंग के पांच महीने बाद अमेरिका खुद संघर्ष में उलझा हुआ है और उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। खामेनेई कई बार बदला लेने की बात भी कर चुके हैं।
वहीं, ट्रंप प्रशासन ने रविवार को बताया कि फिलहाल हवाई हमलों को रोक दिया गया है। इसे रोकने का मकसद बातचीत के लिए गुंजाइश बनाना बताया गया। हालांकि, साथ ही चेतावनी भी दी गई कि यदि तनाव बढ़ता है तो अमेरिका हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
इसी बीच, यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित कुछ सैन्य अधिकारियों ने ट्रंप को गोला-बारूद की उपलब्धता और दीर्घकालिक सैन्य तैयारी को लेकर सलाह दी। (इस दावे का प्रकाशन से पहले आधिकारिक सत्यापन आवश्यक है।)
दूसरी ओर, ईरान ने कहा है कि हाल के दिनों में उसने ओमान के साथ डिप्टी विदेश मंत्री स्तर पर बातचीत की है। फिलहाल, ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि इस्लामिक रिपब्लिक होर्मुज स्ट्रेट पर अपने रुख में बदलाव करने जा रहा है। दोनों पक्षों की ओर से फिलहाल बड़े हमले रुके हुए हैं।
कूटनीतिक प्रयास और ट्रंप का नया फोकस
इस बीच, पाकिस्तान, इराक और कतर अपनी ओर से कूटनीतिक कोशिशें जारी रखे हुए हैं। हालांकि, अभी तक किसी ठोस समाधान के संकेत नहीं मिले हैं।
इन सबके बीच ट्रंप अब पुराने प्लान पर काम करना शुरू कर चुके हैं। ट्रंप ने पूरी कोशिश की कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के जरिए अपनी रणनीतिक जीत दर्ज कर सकें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसके बाद उन्होंने इजरायल को साइडलाइन कर बीच का रास्ता निकालने की भी कोशिश की। अब, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इजरायल की सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखना मानी जा रही है।
क्या फिर से अब्राहम अकॉर्ड पर लौट रहे हैं ट्रंप?
अब सवाल उठता है कि ट्रंप का नया प्लान क्या है?
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप फिर से अब्राहम अकॉर्ड पर फोकस करते दिखाई दे रहे हैं। अब्राहम अकॉर्ड इजरायल और अरब देशों के बीच संबंध सामान्य बनाने वाला एक ऐतिहासिक समझौता है, जिसकी शुरुआत सितंबर 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका की मध्यस्थता में हुई थी।
इस समझौते से संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे देश जुड़े। अब चर्चा है कि ट्रंप सऊदी अरब को भी इस समझौते में शामिल करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके बदले नागरिक परमाणु सहयोग जैसे प्रस्तावों पर भी बातचीत की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, सऊदी अरब ने अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान और हूती विद्रोहियों से जुड़े खतरे उसके लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में, उसकी आगे की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।
घरेलू राजनीति भी क्यों है अहम?
दरअसल, ट्रंप के सामने केवल विदेश नीति की चुनौती नहीं है, बल्कि घरेलू राजनीति भी एक बड़ा फैक्टर है। एक ओर वे खुद को मजबूत नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका में ऐसे मतदाता भी हैं जो नए विदेशी युद्धों से बचना चाहते हैं।
ऐसे में, सीमित सैन्य कार्रवाई, कूटनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय साझेदारों के जरिए ईरान पर दबाव बनाए रखना राजनीतिक रूप से भी उनके लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल, तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। ट्रंप प्रशासन के आने वाले फैसले तय करेंगे कि अमेरिका बातचीत की दिशा में आगे बढ़ता है या दबाव की नीति को और तेज करता है।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट की राजनीति अब केवल मिसाइलों और सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रही। आर्थिक दबाव, कूटनीति, क्षेत्रीय गठबंधन और रणनीतिक संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण हो चुके हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि ट्रंप प्रशासन आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका असर पूरे क्षेत्र पर किस तरह पड़ता है।


