Bankipur Bypoll 2026: प्रचार के अंतिम दौर में तेजस्वी यादव की एंट्री, RJD ने बढ़ाया चुनावी जोर
प्रचार के अंतिम दौर में तेजस्वी यादव ने संभाली कमान
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। मंगलवार शाम प्रचार थम जाएगा और ऐसे में हर राजनीतिक दल आखिरी दम तक मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में जुटा है।
इसी कड़ी में यूरोप यात्रा से लौटे तेजस्वी यादव ने सीधे बांकीपुर की कमान संभाल ली है। आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता के समर्थन में तेजस्वी लगातार रोड शो, जनसभाएं और स्थानीय लोगों से संवाद कर रहे हैं।
आरजेडी ने प्रचार में झोंकी पूरी ताकत
दरअसल, बिहार की सियासत में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है। पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रचार में पिछड़ रही आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता के पक्ष में सियासी माहौल बनाने की कवायद तेज हो गई है। यूरोप की ठंडी हवाओं से लौटे आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बांकीपुर उपचुनाव की कमान संभाल ली है।
आरजेडी की रणनीति साफ है। चुनाव प्रचार के आखिरी दो दिनों में तेजस्वी यादव की लोकप्रियता और आक्रामक प्रचार शैली के जरिए चुनाव को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। पार्टी को उम्मीद है कि तेजस्वी की मौजूदगी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरेगी और असमंजस में पड़े मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में मदद मिलेगी।
बांकीपुर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की कोशिश
दरअसल, पटना जिले की बांकीपुर विधानसभा सीट को पारंपरिक रूप से बीजेपी का सबसे सुरक्षित गढ़ यानी एक ‘सेफ सीट’ माना जाता रहा है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा, वहीं जन सुराज पार्टी से प्रशांत किशोर किस्मत आजमा रहे हैं।
नीरज और पीके के बीच सिमटते हुए उपचुनाव को त्रिकोणीय बनाने के लिए तेजस्वी ने पूरी ताकत झोंक दी है। बांकीपुर चुनाव प्रचार के आखिरी दो दिन ही बचे हैं।
ऐसे में तेजस्वी यादव का अचानक और आक्रामक तरीके से मैदान में उतरना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ 48 घंटे के इस तूफानी प्रचार से तेजस्वी कोई बड़ा सियासी गुल खिला पाएंगे या यह सिर्फ एक रस्म अदायगी साबित होगी?
रोड शो के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश
इसी बीच, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रचार के अंतिम दो दिनों में आरजेडी प्रत्याशी रेखा कुमारी उर्फ रेखा गुप्ता को जिताने के लिए तेजस्वी यादव मैदान में उतर गए हैं। रोड शो के जरिए तेजस्वी यादव बांकीपुर के लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं और महागठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
दोपहर एक बजे उन्होंने मीठापुर से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की। इसके बाद चांदपुर बेला, सिपारा, पोस्टल पार्क, चिरैयाटांड़ पुल, लालजी टोला, पीरमुहानी, उमा सिनेमा, लोहानीपुर, दरियापुर, खेतान मार्केट और बिरला मंदिर होते हुए शाम 7 बजे सब्जीबाग चौराहे तक रोड शो किया।
वहीं, मंगलवार को सुबह 10:30 बजे रोड शो पुराना हड़ताली मोड़, पहलवान मार्केट और बोरिंग रोड से शुरू होकर बोरिंग रोड चौराहा, राजापुर पुल, पुलिस लाइन चौराहा, लोदीपुर मेन रोड, इनकम टैक्स गोलंबर और किदवईपुरी होते हुए दोपहर तीन बजे चकरम देवी मंदिर के पास समाप्त होगा।
युवा और शहरी मतदाताओं पर आरजेडी की नजर
दरअसल, बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में शहरी मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग लंबे समय से बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। ऐसे में, जब चुनाव प्रचार के मुट्ठीभर घंटे ही बाकी हों, तब तेजस्वी यादव का मैदान में उतरना महज एक सीट जीतने की कोशिश भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति भी दिखाई देती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव इस कम समय में शहरी और युवा मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को साधने की कोशिश कर रहे हैं। Gen-Z और युवा वर्ग के बीच बेरोजगारी, परीक्षा व्यवस्था और स्थानीय विकास के मुद्दों को लेकर जो सुगबुगाहट है, तेजस्वी उसी स्पेस को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी वजह से दो दिन के इस छोटे से अंतराल में वे बड़ी रैलियों के बजाय नुक्कड़ सभाओं, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ क्लोज-डोर बैठकों और सीधे संवाद पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, ताकि उनका संदेश सीधे जनता तक पहुंच सके।
बीजेपी के गढ़ में आरजेडी की चुनौती
दूसरी ओर, बांकीपुर विधानसभा का उपचुनाव आरजेडी के लिए काफी मुश्किल माना जा रहा है। आरजेडी यह सीट कभी भी जीत नहीं सकी है। इस सीट पर 1996 से बीजेपी का कब्जा रहा है।
इस बार बीजेपी से नीरज कुमार सिन्हा मैदान में हैं, जबकि जन सुराज पार्टी से प्रशांत किशोर ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। इसके चलते बीजेपी और जन सुराज के बीच मुकाबला सिमटता हुआ नजर आ रहा है।
ऐसे में आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता के समर्थन में उतरकर तेजस्वी यादव इस चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
आखिरी 48 घंटे में क्या बदलेगा चुनावी गणित?
हालांकि, चुनौती बेहद कड़ी है। इतने कम समय में दशकों से जमे हुए राजनीतिक समीकरण को पूरी तरह बदल देना किसी भी नेता के लिए आसान नहीं होता। सत्तारूढ़ दल का मजबूत संगठन और शहरी मतदाताओं का पारंपरिक समर्थन इस मुकाबले को और कठिन बनाता है।
फिलहाल, तेजस्वी यादव का यह दांव विपक्ष के खेमे में नई ऊर्जा भरता हुआ दिखाई दे रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यूरोप से लौटने के बाद उनका यह दो दिवसीय चुनावी अभियान बांकीपुर के चुनावी गणित में कोई बड़ा बदलाव ला पाता है या फिर यह केवल प्रतीकात्मक मौजूदगी बनकर रह जाता है।
कुल मिलाकर, अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या तेजस्वी यादव अपनी आक्रामक चुनावी शैली से बांकीपुर में आरजेडी के पक्ष में माहौल बना पाएंगे या फिर बीजेपी एक बार फिर अपने पारंपरिक गढ़ को बचाने में सफल रहेगी।


