भोपाल में गूगल से ट्रांसपोर्ट कंपनी का नंबर निकालना पड़ा महंगा, ठग ने कर्मचारी बनकर 69 हजार उड़ाए

  • October 6, 2026
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भोपाल साइबर क्राइम गूगल से ट्रांसपोर्ट कंपनी का नंबर निकालने के बाद साइबर ठगी

गल से ट्रांसपोर्ट कंपनी का नंबर निकालना पड़ा महंगा

भोपाल साइबर क्राइम का एक मामला सामने आया है, जिसमें ट्रांसपोर्ट कंपनी का नंबर गूगल से निकालकर संपर्क करना एक 62 वर्षीय व्यक्ति को महंगा पड़ गया। मामला एमपी नगर क्षेत्र का है। जोन-1 निवासी प्रदीप सूरी (62) ने ट्रांसपोर्ट के जरिए सामान मंगाने के लिए गूगल पर ट्रांसपोर्ट कंपनी का नंबर खोजा था। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर मिले नंबर पर फोन किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को ट्रांसपोर्ट कंपनी का कर्मचारी बताया। बातचीत के दौरान उसने सामान से संबंधित जानकारी देने के नाम पर प्रदीप सूरी को भरोसे में लिया। इसके बाद साइबर ठग ने करीब 45 मिनट तक उनसे फोन पर बातचीत की और मोबाइल में कुछ प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा।

ठग ने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताया

प्रदीप सूरी को जिस व्यक्ति ने फोन किया, उसने खुद को संबंधित ट्रांसपोर्ट कंपनी का कर्मचारी बताया। चूंकि प्रदीप ने कंपनी से सामान मंगाने के लिए ही नंबर खोजा था, इसलिए उन्हें सामने वाले व्यक्ति पर संदेह नहीं हुआ। ठग ने बातचीत के दौरान उन्हें कई तरह की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा। इस दौरान उसने मोबाइल का एक्सेस हासिल कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक ठग ने करीब 45 मिनट तक फोन पर बातचीत में उन्हें उलझाए रखा। इसी दौरान मोबाइल पर अलग-अलग प्रक्रिया कराने के बहाने उनके बैंक खाते तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद उनके खाते से पैसे निकाल लिए गए।

साइबर ठग ने मोबाइल का एक्सेस हासिल करने के बाद प्रदीप सूरी के बैंक खाते से 69 हजार रुपए निकाल लिए। यह रकम एक ही खाते में नहीं भेजी गई, बल्कि तीन अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई। खाते से रकम जाने के बाद जब ट्रांजैक्शन के मैसेज मिले तो प्रदीप सूरी को ठगी का पता चला। रिपोर्ट के अनुसार रकम तीन खातों में भेजी गई। इनमें दीपक कुमार नाग के खाते में 40 हजार रुपए, आदर्श विश्वकर्मा के खाते में 20 हजार रुपए और परमेंद्र कुमार के खाते में 9 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 69 हजार रुपए की रकम ठगों के बताए गए खातों में चली गई।

गूगल पर नंबर खोजना पड़ा भारी

साइबर क्राइम मामले में खास बात यह है कि पीड़ित ने ट्रांसपोर्ट कंपनी से संपर्क करने के लिए उसका नंबर गूगल पर खोजा था। साइबर अपराधी अक्सर इंटरनेट पर मौजूद जानकारी का इस्तेमाल लोगों को निशाना बनाने के लिए करते हैं। किसी कंपनी का नंबर खोजते समय यदि उपयोगकर्ता गलत या फर्जी नंबर पर संपर्क कर लेता है, तो सामने वाला व्यक्ति खुद को कंपनी का कर्मचारी बताकर भरोसा हासिल करने की कोशिश कर सकता है। इस मामले में भी ठग ने खुद को ट्रांसपोर्ट कंपनी का कर्मचारी बताया और करीब 45 मिनट की बातचीत में पीड़ित को विश्वास में लेकर मोबाइल में कुछ प्रक्रिया पूरी कराई।

तीन खातों में ट्रांसफर हुई रकम

रिपोर्ट के मुताबिक ठगी की रकम तीन अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई।

  • दीपक कुमार नाग — 40 हजार रुपए
  • आदर्श विश्वकर्मा — 20 हजार रुपए
  • परमेंद्र कुमार — 9 हजार रुपए

कुल 69 हजार रुपए की रकम ट्रांसफर होने के बाद पीड़ित को ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मामले को साइबर पुलिस तक भेजा गया।

1930 पर शिकायत के बाद साइबर पुलिस ने शुरू की जांच

पैसे ट्रांसफर होने के बाद प्रदीप सूरी ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की। इसके आधार पर साइबर थाने से ई-जीरो एफआईआर के लिए एमपी नगर थाने को शिकायत भेजी गई। मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी और मोबाइल से जुड़ी गतिविधियों की जांच की जा रही है। साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती समय में शिकायत करना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि बैंक खातों में गई रकम को रोकने या वापस कराने की संभावना तत्काल कार्रवाई से बढ़ सकती है। इस मामले में भी पीड़ित ने रकम ट्रांसफर होने के बाद शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।