मायावती ने आकाश आनंद को BSP से फिर बाहर किया
उत्तर प्रदेश की सियासत में बहुजन समाज पार्टी के भीतर एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल सामने आया है। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को BSP से एक बार फिर बाहर कर दिया है। उनके फैसले और आरोपों के बीच सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को रीपोस्ट न करने की बात भी चर्चा में है। सवाल यह है कि क्या अब किसी नेता की राजनीतिक निष्ठा का पैमाना संगठन, आंदोलन और जमीन पर काम के साथ सोशल मीडिया गतिविधियों से भी तय होने लगा है?
मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, मायावती ने एक्स पर लिखा कि आकाश आनंद का अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति लगाव इस हद तक है कि उन्होंने BSP प्रमुख के सोशल मीडिया अकाउंट पर अशोक सिद्धार्थ से संबंधित पोस्ट को रीपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा। मायावती ने कहा कि यह पोस्ट आकाश के सकारात्मक भविष्य और उनके हित में थी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले आकाश उनकी एक्स पोस्ट को रीपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। यानी मायावती ने महज एक सोशल मीडिया गतिविधि का जिक्र नहीं किया, बल्कि उसे आकाश की राजनीतिक प्राथमिकताओं से जोड़ दिया।
पहले राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया, अब पार्टी से भी किया बाहर
दरअसल बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया है। इससे पहले मायावती ने 3 सितंबर 2026 को आकाश को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया था। अब उन्होंने आकाश को बसपा की प्राथमिक सदस्यता और पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त कर दिया है।
दरअसल आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान किया है। इसे लेकर मायावती ने कहा कि उन्होंने अगर समय पर फैसला ले लिया होता तो आकाश के साथ ऐसा नहीं होता। मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति छोड़ने का फैसला सही समय पर नहीं लिया। अगर वो ये कदम पहले उठा लेते, तो बसपा, बहुजन मूवमेंट और खुद आकाश आनंद को लगातार मुश्किल और विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
सोशल मीडिया पोस्ट को रीपोस्ट न करने पर मायावती ने उठाए सवाल
इतना ही नहीं मायावती ने आकाश आनंद के रुख पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मुद्दा उठाया कि आकाश आनंद पहले हमेशा उनके एक्स पोस्ट को रिपोस्ट किया करते थे, लेकिन अशोक सिद्धार्थ से जुड़ी मायावती की पोस्ट को उन्होंने रिपोस्ट नहीं किया। मायावती के मुताबिक, ये इस बात का साफ संकेत है कि आकाश आनंद पार्टी से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को तरजीह दे रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जो व्यक्ति ‘डबल माइंड’ होकर काम करेगा, वो बसपा का भला कैसे कर सकता है?
मायावती ने अपने पोस्ट में आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर सिद्धार्थ को सच में आकाश आनंद के भविष्य और बहुजन मूवमेंट की चिंता होती, तो वो बहुत पहले ही राजनीति से किनारा कर लेते। लेकिन उनकी नीयत और निजी महत्वाकांक्षाओं को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।
अशोक सिद्धार्थ ने संन्यास लिया, फिर भी आकाश क्यों हुए बाहर?
अब मायावती पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ससुर ने शर्त मान ली। फिर भतीजे को क्यों बाहर कर दिया गया। इसके पहले तो मायावती ने 9 सितंबर को कहा था कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक और पारिवारिक प्रभावों के कारण आकाश आनंद की भूमिका प्रभावित हो रही है। उन्होंने साफ किया था कि यदि अशोक संन्यास ले लेते हैं। तो आकाश के लिए स्वतंत्र रूप से काम करने का रास्ता खुल सकता है।
इसके अगले दिन यानी आज 10 सितंबर को अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी सुप्रीमो का आदेश सर्वोपरि बताते हुए राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास की घोषणा कर दी। हालांकि, इस घटना के बाद कुछ देर बाद ही मायावती ने फिर आकाश आनंद को ही पार्टी से बाहर कर दिया। दरअसल आकाश आनंद को लेकर यह पूरा घटनाक्रम अचानक नहीं शुरू हुआ। 3 सितंबर को मायावती ने कहा था कि आकाश में अभी राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है और फिलहाल उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा।
BSP की अहम बैठक में ईशान आनंद की मौजूदगी भी बनी चर्चा का विषय
इसी दौरान बीएसपी की एक अहम बैठक में आकाश की गैरमौजूदगी और उनके छोटे भाई ईशान आनंद की मौजूदगी भी चर्चा में आई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईशान उस बैठक में उस जगह बैठे जहां आमतौर पर आकाश बैठते थे। आकाश इससे पहले मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर सामने आ चुके थे और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारियां दी गई थीं। लेकिन इसके बाद उनके राजनीतिक सफर में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिले, अब एक बार फिर पार्टी में उनकी भूमिका खत्म कर दी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने BSP के भीतर नेतृत्व और आकाश आनंद की भूमिका को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी की ओर से संगठन और आगामी चुनाव को लेकर तैयारियां की जा रही हैं, आकाश को लेकर लिया गया यह फैसला राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर लगाए निजी हितों को तरजीह देने के आरोप
दरअसल मायावती का आरोप था कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी के मिशन से ज्यादा निजी और पारिवारिक हितों को महत्व दिया और इसका असर आकाश आनंद पर भी पड़ा। उनके मुताबिक, अशोक के राजनीति में सक्रिय रहने की वजह से आकाश को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। यानी मायावती के बयान से साफ संकेत था कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से हटने के बाद आकाश के लिए पार्टी में आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।
अब सवाल यह है कि अगर अशोक सिद्धार्थ ही आकाश आनंद की राजनीतिक राह में बड़ी अड़चन थे, तो उनके संन्यास लेते ही आकाश को पार्टी से बाहर क्यों कर दिया गया? क्या मायावती का आकाश को लेकर आकलन अशोक सिद्धार्थ से अलग भी था? क्या अशोक का संन्यास सिर्फ विवाद का एक हिस्सा था? या फिर मायावती ने आकाश को लेकर अपना फैसला पहले ही बदल लिया था? इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी किसी और के पास नहीं है।
2027 चुनाव से पहले BSP में नेतृत्व का संकट?
दरअसल यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। मायावती ने हाल में साफ किया है कि बीएसपी यूपी में अकेले चुनाव लड़ेगी और पार्टी ने चुनावी तैयारी भी शुरू कर दी है। ऐसे में मायावती के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन को एकजुट रखने और चुनावी अभियान पर पूरा नियंत्रण बनाए रखने की है। आकाश आनंद को पहले उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया गया फिर उनसे बड़ी जिम्मेदारियां छीनी गई, बाद में उन्हें फिर सक्रिय किया गया और अब दोबारा पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। अब इसका चुनावी असर क्या होगा, यह अभी कहना मुश्किल है। लेकिन इतना जरूर है कि 2027 से पहले बीएसपी में नेतृत्व को लेकर यह घटनाक्रम पार्टी की रणनीति पर सवाल जरूर खड़े करता है।
अब आकाश आनंद का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आकाश आनंद का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा? क्या वो पूरी तरह राजनीति से दूरी बनाएंगे? या फिर बीएसपी से अलग अपनी राजनीतिक राह तलाशेंगे?और दूसरी तरफ मायावती के लिए भी ये फैसला आसान नहीं होगा। फिलहाल मायावती के इस एक्शन ने BSP की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।अब देखना होगा कि आकाश आनंद इस फैसले के बाद क्या राजनीतिक रणनीति अपनाते हैं और मायावती चुनावी मैदान में इस पूरे घटनाक्रम का असर कैसे संभालती हैं।


