8वां वेतन आयोग: एक मांग पूरी होते ही कर्मचारियों की सैलरी में बंपर बढ़ोतरी

  • August 25, 2026
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8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से केंद्रीय कर्मचारियों की संभावित सैलरी वृद्धि

8वां वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने का सबसे बड़ा सवाल

8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर नई सैलरी कितनी बढ़ेगी? क्या सिर्फ एक डिमांड मान ली गई, तो Level-1 से Level-10 तक कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में हजारों रुपये का इजाफा हो सकता है? 8वां वेतन आयोग यानी 8th Pay Commission को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के गलियारों में केवल 15% या 20% सैलरी बढ़ने की पुरानी चर्चाएं अब पीछे छूट चुकी हैं। पर्दे के पीछे वित्त मंत्रालय और नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम के बीच एक ऐसा बड़ा मास्टरप्लान तैयार हो रहा है, जो केंद्र सरकार के 70 साल पुराने पे-स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदलकर रख देगा।

सूत्रों के हवाले से मिली बड़ी खबर के मुताबिक, कर्मचारी संगठनों ने सरकार और वेतन आयोग के सामने ‘पे-लेवल मर्जर’ का क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो निचले स्तर यानी Level-1 से Level-6 के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी सीधे 110% से अधिक बढ़कर ‘डबल’ से भी ज्यादा हो जाएगी, वहीं प्रमोशन का चक्रव्यूह खत्म होने से तरक्की की रफ्तार ‘बुलेट ट्रेन’ जैसी हो जाएगी।

फिटमेंट फैक्टर 3.83 की मांग क्यों अहम है?

दरअसल आठवां वेतन आयोग की बैठकों का सिलसिला जारी है और देश भर में कर्मचारी और पेंशनर्स यूनियनों, केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत की जा रही है। इस बीच उनकी ओर से डिमांड भी लगातार आ रही हैं, जिनमें सबसे बड़ी और अहम डिमांड फिटमेंट फैक्टर को लेकर है, जिसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग की जा रही है।

अगर इस डिमांड को मान लिया जाता है, तो फिर लेवल-1 से लेकर लेवल-10 तक तमाम केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बंपर उछाल देखने को मिलेगा। दरअसल फिटमेंट फैक्टर वो आंकड़ा होता है, जिसका इस्तेमाल वेतन आयोग द्वारा किसी कर्मचारी के पूर्व-संशोधित बेसिक सैलरी या रिटायर्र कर्मचारी के पेंशन भुगतान को नए संशोधित मूल वेतन में बदलने के लिए किया जाता है।

इसका कैलकुलेशन (वर्तमान मूल वेतन x फिटमेंट फैक्टर = नया मूल वेतन) के आधार पर किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में ये Fitment Factor 2.57 लागू है और इसके लागू होने से मिनिमम बेसिक सैलरी 7,000 से बढ़कर सीधे 18,000 हो गई थी। अब 8वें वेतन आयोग में इसके बढ़ने से जबर्दस्त Salary Hike देखने को मिलेगा।

पे-लेवल मर्जर से बदल सकता है कर्मचारियों का पूरा ढांचा

वर्तमान 7वें वेतन आयोग के पे-मैट्रिक्स में सबसे बड़ी समस्या यह है कि निचले स्तर पर लेवल्स की संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि उनके बीच सैलरी का अंतर बेहद मामूली है। इस वजह से लेवल-1 पर भर्ती होने वाला कर्मचारी सालों-साल एक ही ग्रेड में फंसा रहता है और उसकी तरक्की की सीढ़ियां बहुत धीमी हो जाती हैं।

कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि शुरुआती 6 लेवल्स का आपस में विलय करके केवल 3 बड़े और मजबूत पे-लेवल बनाए जाएं। मर्जर नियम का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि जब दो पे-लेवल आपस में जुड़ते हैं, तो कर्मचारी की नई सैलरी हमेशा ऊपर वाले लेवल के बेस पे के हिसाब से तय की जाती है। अब अगर इसमें आयोग का 1.92 का संभावित फिटमेंट फैक्टर जोड़ दिया जाए, तो सैलरी में होने वाला उछाल चौंकाने वाला होगा।

3.83 फिटमेंट फैक्टर से कितना बढ़ सकता है वेतन?

दरअसल 8th Pay Commission में अगर फिटमेंट फैक्टर को कर्मचारी-पेंशनर्स यूनियनों की डिमांड के अनुसार माना जाता है, तो फिर सैलरी स्ट्रक्चर में जो बड़ा बदलाव आएगा, उससे देश के 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। इनमें करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं। अगर कर्मचारी यूनियनों की फिटमेंट फैक्टर को लेकर उठाई जा रही डिमांड को मान लिया जाता है, तो फिर न्यूनतम बेसिक सैलरी में जोरदार उछाल देखने को मिलेगा। इसकी कैलकुलेशन देखें, तो जिन कर्मचारियों की 18000 बेसिक पे है, 8वें वेतन आयोग में 3.83 फिटमेंट फैक्टर के साथ वो सीधे 68,940 रुपये हो जाएगी। यानी वेतन में सीधे 50,940 रुपये का बंपर उछाल आएगा।

Level-1 से Level-10 तक सैलरी का संभावित गणित

वही लेवल-2 के कर्मचारी की 19,900 रुपये बेसिक सैलरी सीधे 76,217 रुपये, जबकि लेवल-3 में 21,700 रुपये से 83,111 रुपये हो जाएगा। इसके बाद लेवल-4 के कर्मचारी को न्यूनतम सैलरी 25,500 रुपये की जगह 97,665 रुपये, लेवल-5 में 29,200 रुपये से 1,11,836 रुपये, लेवल-6 में 35,400 रुपये से 1,35,582 रुपये और लेवल-10 के कर्मचारी के लिए 56,100 रुपये से 1,14,863 रुपये हो जाएगी। ऐसे में फिटमेंट फैक्टर में बदलाव का असर अलग-अलग पे-लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी पर काफी बड़ा हो सकता है। हालांकि अंतिम सैलरी का असली गणित आयोग की सिफारिश और सरकार के फैसले के बाद ही साफ होगा।

पे-लेवल मर्जर से प्रमोशन का इंतजार हो सकता है कम

दरअसल अभी किसी कर्मचारी को लेवल-1 से लेवल-6 तक पहुंचने में कम से कम 4 से 5 Promotions और लगभग 18 से 20 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है। पे-लेवल मर्जर से यह तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। 6 लेवल्स की जगह केवल 3 बड़े लेवल्स होने से कर्मचारी सिर्फ 2 प्रमोशन में ही उस ऊंचे पद और सैलरी ब्रैकेट तक पहुंच जाएंगे, जहां पहुंचने में पहले दो दशक लग जाते थे। वहीं बेसिक पे में शुरुआती दौर में ही बड़ा उछाल आने से भविष्य की रिटायरमेंट राशि, पेंशन और ग्रेच्युटी का फंड अपने आप दोगुना मजबूत हो जाएगा।

8वें वेतन आयोग की बैठकों का सिलसिला जारी

फिलहाल, आठवें वेतन आयोग की बैठकें लगातार जारी हैं और लगातार कर्मचारी, पेंशनर्स संघों के साथ बातचीत की जा रही है। दिल्ली, पश्चिम बंगाल, लद्दाख और उत्तर प्रदेश में बैठक आयोजित होने के बाद अब बेंगलुरु में आयोग की बैठक होगी। 8th Pay Commission 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु का दौरा करेगा। वहीं हर 10 साल में गठित होने वाले आयोग के लागू होने की बात करें, तो रिपोर्ट्स के मुताबिक उम्मीद जताई जा रही है कि 2027 के मध्य तक ये प्रभावी हो सकती है।

फिटमेंट फैक्टर पर टिकी कर्मचारियों की सबसे बड़ी उम्मीद

तो कुल मिलाकर कहानी एक ही नंबर के आसपास घूम रही है—फिटमेंट फैक्टर। कर्मचारियों की मांग जितनी ज्यादा होगी, संभावित बेसिक पे में बढ़ोतरी का अनुमान भी उतना बड़ा होगा। लेकिन सरकार को कर्मचारियों की उम्मीदों के साथ-साथ देश की वित्तीय स्थिति और राजकोषीय अनुशासन को भी ध्यान में रखना होगा। अब जैसे-जैसे आयोग की कंसल्टेशन आगे बढ़ेगी और फिटमेंट फैक्टर पर तस्वीर साफ होगी, Level-1 से Level-10 तक सैलरी का असली गणित भी सामने आएगा।

8वें वेतन आयोग के लागू होने की उम्मीद कब है?

दिए गए कंटेंट के अनुसार, रिपोर्ट्स में उम्मीद जताई जा रही है कि 8वां वेतन आयोग 2027 के मध्य तक प्रभावी हो सकता है।

पे-लेवल मर्जर क्या है?

पे-लेवल मर्जर का मतलब मौजूदा कई पे-लेवल्स को मिलाकर कम संख्या में बड़े पे-लेवल बनाना है। कर्मचारी यूनियनों ने शुरुआती 6 लेवल्स को मिलाकर 3 बड़े पे-लेवल बनाने का प्रस्ताव रखा है।

7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना था?

दिए गए कंटेंट के अनुसार, 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था।