सरगुजा जिले के गांवों में जल संसाधनों को मजबूत करने और ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मोर गांव मोर पानी महाअभियान के तहत जल संरक्षण और जल संवर्धन के कार्य किए जा रहे हैं। अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने और जलस्रोत के रूप में महत्वपूर्ण तालाबों के गहरीकरण तथा जीर्णोद्धार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल तालाबों की जलधारण क्षमता बढ़ाना नहीं है, बल्कि गांव की पूरी अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन को पानी की उपलब्धता के माध्यम से मजबूत करना भी है।
अभियान के तहत सरगुजा जिले में 59 तालाबों के गहरीकरण के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों से तालाबों में अधिक पानी संग्रहित होने की क्षमता विकसित होगी। इसका प्रभाव आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों पर भी पड़ने की संभावना है। तालाबों में लंबे समय तक पानी के ठहराव से भूजल पुनर्भरण की संभावना बढ़ती है और आसपास के कुओं तथा बोरवेल के जलस्तर में सुधार का लाभ ग्रामीणों को मिल सकता है। इससे पेयजल स्रोतों में पानी की उपलब्धता बनाए रखने और गर्मी के मौसम में पानी की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। जल संरक्षण से जुड़े इन कार्यों का असर गांवों में खेती और ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर भी पड़ता है।
तालाबों के गहरीकरण पर विशेष जोर
मोर गांव मोर पानी महाअभियान के तहत पुराने और जलस्रोत के रूप में महत्वपूर्ण तालाबों को प्राथमिकता देते हुए उनके गहरीकरण और जीर्णोद्धार के कार्य किए जा रहे हैं। तालाबों में समय के साथ जमा होने वाली मिट्टी और सिल्ट के कारण उनकी जलधारण क्षमता प्रभावित होती है। गहरीकरण के बाद तालाब अधिक पानी रोकने में सक्षम हो सकते हैं। सरगुजा जिले में स्वीकृत 59 तालाबों के गहरीकरण कार्य इसी दिशा में किए जा रहे हैं।
अभियान के तहत स्वीकृत कार्यों का प्रभाव केवल तालाब तक सीमित नहीं रहने वाला है। तालाब में अधिक पानी रहने से आसपास के क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण की संभावना बढ़ती है। लंबे समय तक पानी के ठहराव से आसपास के कुओं और बोरवेल के जलस्तर में वृद्धि का लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है। इससे पेयजल स्रोतों में पानी की उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिलती है और गर्मी के मौसम में पानी की समस्या को कम करने का आधार तैयार होता है। इस तरह जल संरक्षण के कार्यों का संबंध ग्रामीण जीवन की कई जरूरतों से जुड़ जाता है।
रामपुर के कबीर चबूतरा तालाब का उदाहरण
जनपद पंचायत अंबिकापुर की ग्राम पंचायत रामपुर में कबीर चबूतरा तालाब का गहरीकरण इस अभियान के कार्यों का प्रत्यक्ष उदाहरण है। तालाब के गहरीकरण के लिए लगभग 7.31 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से कार्य कराया गया। कार्य शुरू होने से पहले तालाब सिल्ट से भर चुका था। गर्मी के दिनों में तालाब सूख जाता था, जिससे उसमें पानी उपलब्ध नहीं रहता था।
गहरीकरण के बाद तालाब की जलधारण क्षमता बढ़ी और वर्तमान में यह पानी से लबालब भरा हुआ है। इस कार्य के माध्यम से 2,395 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ। इसका मतलब है कि जल संरक्षण के कार्य के साथ ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर काम और आय का अवसर भी मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के कार्यों की विशेषता यही है कि प्राकृतिक संसाधनों को मजबूत करने के साथ ग्रामीणों की आर्थिक जरूरतों को भी पूरा किया जा सकता है।
जल संरक्षण के साथ रोजगार और ग्रामीण आजीविका
तालाबों के गहरीकरण से वर्षा जल को अधिक समय तक रोकने में मदद मिलती है। पानी के लंबे समय तक ठहराव से आसपास के क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण की संभावना बढ़ती है। रामपुर में कबीर चबूतरा तालाब के गहरीकरण के बाद आसपास के कुओं और बोरवेल के जलस्तर में वृद्धि का लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है। इससे ग्रामीणों को पानी की उपलब्धता के साथ खेती के लिए भी अतिरिक्त स्रोत मिलने की संभावना बनी है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पानी का महत्वपूर्ण स्थान है। तालाबों में पर्याप्त पानी रहने से किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिल सकता है। रामपुर के कबीर चबूतरा तालाब से किसान रबी फसल के लिए भी सिंचाई का पानी ले सकेंगे। सिंचाई की सुविधा बढ़ने से किसान अधिक क्षेत्र में फसल ले सकते हैं और वर्षा पर उनकी निर्भरता कम हो सकती है।
इस प्रकार तालाबों का गहरीकरण केवल जलस्रोत को मजबूत करने का कार्य नहीं है, बल्कि इससे खेती, रोजगार और ग्रामीण आजीविका को भी आधार मिलता है। जल संरक्षण के माध्यम से गांव के प्राकृतिक संसाधनों को मजबूत करने के साथ ग्रामीण परिवारों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास भी किया जा रहा है।
लंबे समय तक पानी रुकने से भूजल पुनर्भरण की संभावना
तालाबों में बारिश का पानी लंबे समय तक ठहरने से आसपास के क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण की संभावना बढ़ती है। पानी के लंबे समय तक रुकने से जमीन के भीतर पानी पहुंचने की प्रक्रिया को मदद मिल सकती है। इसका सीधा लाभ आसपास मौजूद कुओं और बोरवेल के जलस्तर में दिखाई दे सकता है।
रामपुर में तालाब के गहरीकरण के बाद ग्रामीणों को आसपास के कुओं और बोरवेल के जलस्तर में वृद्धि का लाभ मिल रहा है। भूजल स्तर में सुधार का संबंध ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है, क्योंकि इससे पेयजल स्रोतों में पानी की उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिलती है। गर्मी के मौसम में पानी की समस्या को कम करने के लिए भी यह आधार तैयार करता है। तालाबों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से खेती के लिए सिंचाई का अतिरिक्त स्रोत मिलता है। इससे किसान अधिक क्षेत्र में फसल ले सकते हैं और केवल वर्षा पर निर्भर रहने की स्थिति कम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ने का प्रभाव कृषि और ग्रामीण आजीविका दोनों पर पड़ता है।
ग्रामीण परिवारों को काम और आय का अवसर
मोर गांव मोर पानी महाअभियान के तहत कराए जा रहे कार्यों में जल संरक्षण के साथ ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर काम और आय का अवसर भी मिल रहा है। रामपुर में कबीर चबूतरा तालाब के गहरीकरण कार्य से 2,395 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि जलस्रोतों के विकास से जुड़े कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
तालाबों का गहरीकरण और जीर्णोद्धार गांव के प्राकृतिक संसाधनों को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बन रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों को काम मिलता है और गांव में ही आय का अवसर तैयार होता है। साथ ही, जब तालाब में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है तो किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त स्रोत मिलता है। इस तरह जलस्रोतों के विकास से रोजगार, कृषि और ग्रामीण आजीविका एक-दूसरे से जुड़ते हैं। अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों का उद्देश्य गांवों में पानी की उपलब्धता को मजबूत करना और ग्रामीण जीवन को पानी के संकट से राहत दिलाने की दिशा में काम करना है। तालाबों की बढ़ी हुई जलधारण क्षमता वर्षा जल को लंबे समय तक रोकने और आसपास के भूजल स्तर को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।


