सऊदी अरब हूती समझौता: हमलों से बचने के लिए 1 अरब डॉलर की पेशकश, रक्षा मंत्री पहुंचे तेहरान

  • October 28, 2026
  • 0
  • 1 Views
सऊदी अरब हूती समझौता के लिए तेहरान में उच्च स्तरीय राजनयिक बैठक

3 महीने के भीषण हमलों के बाद कूटनीतिक हल की तलाश

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच पिछले तीन महीनों से जारी सैन्य संघर्ष के बीच एक बेहद चौंकाने वाली अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट सामने आई है। हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के प्रमुख तेल ठिकानों और रणनीतिक एयरपोर्ट्स पर लगातार किए जा रहे घातक ड्रोन व मिसाइल हमलों को समाप्त करने के लिए सऊदी अरब ने आर्थिक समझौते की पेशकश की है। इजराइली समाचार पत्र ‘हाआरेत्ज’ की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब हमलों को रोकने के बदले हूती विद्रोहियों को 1 अरब डॉलर (करीब 85 अरब रुपये) की बड़ी वित्तीय सहायता देने पर सहमत हो गया है।

इस ऐतिहासिक वार्ता में ईरान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस समझौते के संबंध में सामने आई जानकारियों के बाद मध्य पूर्व की भू-राजनीति में सऊदी अरब हूती समझौता सबसे बड़ा घटनाक्रम बन चुका है।

तेहरान पहुंचे सऊदी रक्षा मंत्री और उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल

रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान इस शांति वार्ता को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार को विशेष विमान से सीधे तेहरान पहुंचे। बताया जा रहा है कि वे जिस विमान से तेहरान पहुंचे, उसमें समझौते से संबंधित अग्रिम राशि भी शामिल थी। इस बेहद संवेदनशील और गोपनीय वार्ता में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ-साथ पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और तुर्किये की खुफिया एजेंसी (MIT) के प्रमुख इब्राहिम कालिन भी व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए।

हालांकि, सऊदी अरब के राजनयिकों का कहना है कि वे किसी सैन्य दबाव में आकर नया सीजफायर समझौता नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनका आग्रह है कि हूती विद्रोही पहले उन यमनी क्षेत्रों को खाली करें जिन पर उन्होंने यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार से जबरन कब्जा किया है।

तेल निर्यात पर संकट और पुरानी सहमति की बहाली

लगातार हूती हमलों के कारण सऊदी अरब के कई हवाई अड्डों और अरामको के तेल संयंत्रों को भारी बुनियादी नुकसान पहुंचा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास हूतियों के हमलों के चलते लाल सागर से होने वाला सऊदी अरब का कच्चा तेल निर्यात भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। इजराइली मीडिया के अनुसार, तीन साल पहले भी दोनों पक्षों के बीच एक सहमति बनी थी, जिसके तहत सऊदी अरब को हूती नियंत्रित क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और आवश्यक नागरिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद देनी थी।

लेकिन हूतियों का आरोप था कि सऊदी अरब ने इस पुरानी सहमति का पालन नहीं किया, जिसके चलते उन्होंने दोबारा हमले शुरू किए थे। अमेरिका द्वारा अत्याधुनिक हथियार और खुफिया मदद दिए जाने के बावजूद सऊदी अरब जमीनी स्तर पर हूतियों को पीछे धकेलने में असफल रहा है, जिसके चलते अब सऊदी अरब हूती समझौता वित्तीय सहायता की मेज पर तय किया जा रहा है।