2027 से पहले यूपी में राज्यसभा और MLC चुनाव का महासंग्राम
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ने लगा है। अक्टूबर में होने वाले राज्यसभा और विधान परिषद के चुनावों ने बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच नई जंग की जमीन तैयार कर दी है। राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक क्षेत्र की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को वोटिंग होगी।
अब सवाल ये है कि इन चुनावों को 2027 का सेमीफाइनल क्यों कहा जा रहा है? क्या राज्यसभा की 10वीं सीट पर होने वाला मुकाबला बीजेपी और सपा के फ्लोर मैनेजमेंट की परीक्षा बनेगा? और क्या शिक्षक-स्नातक MLC चुनाव पढ़े-लिखे मतदाताओं के बीच राजनीतिक माहौल का संकेत देंगे?
दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा और विधान परिषद के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अक्टूबर में होने वाले राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों (शिक्षक व स्नातक क्षेत्र) के चुनाव को प्रदेश का सियासी ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है।
राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव महज उच्च सदन के सदस्यों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भाजपा के ‘मिशन 2027’ और सपा के ‘PDA अभियान’ दोनों की जमीनी पकड़, रणनीतिक क्षमता और कैडर की तैयारी का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट बनने जा रहे हैं। बीजेपी ने इन चुनावों को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है, जबकि कांग्रेस और सपा ने अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर रखी है। सपा ने एमएलसी के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान पहले ही कर रखा है, तो कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिए हैं। 2027 से ठीक पहले होने वाले इन चुनावों में कोई भी दल किसी तरह की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।
25 सितंबर को बीजेपी कोर कमेटी की बैठक
आपको बता दें कि राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव को लेकर बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक 25 सितंबर को होनी है। माना जा रहा है कि इस बैठक में राज्यसभा और विधान परिषद के प्रत्याशियों के नाम तय किए जाने पर चर्चा होगी। हालांकि, दिल्ली में दो दौर की बैठकों में संभावित दावेदारों के नामों पर मंथन हो चुका है।
बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में 25 सितंबर को सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह शामिल होंगे। इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े भी अपने चारों सह-प्रभारियों के साथ कोर कमेटी बैठक में शामिल हो सकते हैं।
जातीय समीकरण के जरिए सियासी रणनीति
इधर यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी राज्यसभा और विधान परिषद के जरिए अपने सियासी समीकरण को मजबूत करने का दांव चल सकती है। माना जा रहा है कि बीजेपी यूपी के जातीय समीकरण के लिहाज से उम्मीदवारों का चयन करेगी, ताकि सपा के पीडीए को काउंटर किया जा सके। राज्यसभा प्रत्याशियों के चयन में जातीय समीकरण के साथ पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा है। विधान परिषद चुनाव में कई क्षेत्रों के पुराने शिक्षक संघ नेताओं ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।
क्योंकि यूपी में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित दावेदारों में टिकट कटने को लेकर असमंजस है। कोर कमेटी की बैठक में निगम, बोर्ड और आयोग के सैकड़ों खाली पदों पर नियुक्तियों के लिए भी चेहरों पर मुहर लग सकती है। यूपी विधानसभा चुनाव में कम समय बचा है, ऐसे में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को विभिन्न पद देकर संगठन में सक्रिय करने की तैयारी है।
राज्यसभा की 10वीं सीट पर असली जंग
दरअसल यूपी में 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी मुकाबला होना है। विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से बीजेपी अपने सहयोगी दलों के सहारे आसानी से 7 सीटें जीतने की स्थिति में है, तो सपा अपने विधायकों के दम पर 2 सीटें जीत लेगी। असली जंग 10वीं राज्यसभा सीट के लिए होनी है। राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए सपा को और 8वीं सीट के लिए भाजपा को अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। राज्यसभा की 10वीं सीट का मुकाबला बेहद रोमांचक बन रहा है। बीजेपी राज्यसभा की 8 सीटें जीतने के लिए ताना-बाना बुन रही है, जो तभी संभव हो सकेगा जब सपा के विधायक क्रॉस वोटिंग करें। सपा भी तीसरे उम्मीदवार को उतारने पर मंथन कर रही है। ऐसे में किस पार्टी का फ्लोर-मैनेजमेंट कितना मजबूत है, 2027 से ठीक पहले यह मुकाबला दोनों दलों के ‘अंदरूनी अनुशासन’ की पोल खोलेगा।
MLC चुनाव में शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की भूमिका
इसके साथ ही 23 अक्टूबर को विधान परिषद की 11 सीटों (5 स्नातक और 6 शिक्षक क्षेत्र) के लिए मतदान होना है। यह चुनाव आम विधानसभा चुनाव की तरह विधायकों के वोट से नहीं, बल्कि सीधे शिक्षकों और शिक्षित स्नातकों के वोटों से तय होता है।
यह वर्ग राज्य की नीतिगत और राजनीतिक हवा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक क्षेत्र की सीटों पर होने वाला चुनाव भी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि विधान परिषद की 11 सीटों में से 2020 में भाजपा ने 6 सीटें जीती थीं, इस बार पार्टी सभी सीटों पर जीत का लक्ष्य रख रही है। इन दोनों चुनावों के नतीजों को 2027 चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
2027 से पहले 21 सीटों के नतीजे देंगे सियासी संकेत
2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अब कुछ ही महीनों का समय बचा है। ऐसे में इन 21 सीटों के चुनावी नतीजे जिस पार्टी के पक्ष में झुकेंगे, उस दल को एक बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ मिलेगा। भाजपा के लिए यह अपनी सांगठनिक मशीनरी की कार्यकुशलता और सत्ता की पकड़ को साबित करने का मौका है। वहीं, सपा के लिए भी यह अपने कैडर में नए उत्साह का संचार करने और 2027 के महासमर से पहले बढ़त बनाने का स्वर्णिम अवसर है।
कुल मिलाकर राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव को 2027 के ‘सत्ता संग्राम का लिटमस टेस्ट’ माना जा रहा है। जहां राज्यसभा चुनाव दलों के फ्लोर मैनेजमेंट और राजनीतिक चालों की परीक्षा लेंगे, वहीं MLC चुनाव प्रदेश के पढ़े-लिखे तबके का रुझान स्पष्ट कर देंगे। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दल इसे किसी सेमीफाइनल से कम नहीं मान रहे हैं।


