ज्ञानेश कुमार कौन हैं? चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों के बाद इस्तीफे पर क्यों मचा बवाल?

  • September 25, 2026
  • 0
  • 2 Views
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग में SIR को लेकर विवाद

SIR को लेकर चुनाव आयोग में कथित मतभेद से बढ़ा विवाद

क्या देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देने जा रहे है? देश की सियासत में ज्ञानेश कुमार क्यों चर्चा में है? चुनाव आयोग… जिसे देश के लोकतांत्रिक ढांचे की सबसे अहम संवैधानिक संस्थाओं में से एक माना गया है। लेकिन इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी बहस तेज है। वजह है—स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरें। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब दस महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। विपक्ष ने इसे गंभीर सवाल बताते हुए ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन खबरों पर सफाई देते हुए कहा है कि अलग-अलग राय और आंतरिक चर्चा संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और SIR समेत आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने इस्तीफे की मांग तेज की

दरसल एक अंग्रेजी अखबार की एक रिपोर्ट ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग दोनों को कटघरे में में खड़ा कर दिया है। विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। आपको बता दे की जब फरवरी 2025 में ज्ञानेश कुमार ने भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला तो उनके करियर में संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने और राम मंदिर ट्रस्ट बनाने में उनके काम की खास चर्चा हुई थी। इसके ठीक 19 महीने के बाद फिर वह चर्चा के केंद्र में हैं। वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण को लेकर चलाए गए (SIR) के दौरान लिए गए फैसलों पर उनके साथी चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर वह निशाने पर आ गए हैं।

हालाँकि यह कोई पहला मामला नहीं है जब ज्ञानेश कुमार विपक्ष के निशाने पर आए हों। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप पर ज्ञानेश कुमार की प्रतिक्रिया की भी आलोचना हुई थी। उन्होंने कांग्रेस नेता से कहा था कि वे शपथ-पत्र के साथ इसे साबित करें या माफी मांगें।

CEC की नियुक्ति को लेकर भी हुआ था विवाद

दरसल जब ज्ञानेश कुमार को देश का मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया था तब भी विपक्ष ने आलोचना की थी। 2023 में सीईसी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित कमेटी के द्वारा सबसे पहला चयन ज्ञानेश कुमार का ही किया गया था। आपको बता दें कि इस पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया था। इससे तीन सदस्यों वाले पैनल में सरकार के दो सदस्य हो गए थे।

पैनल में विपक्ष के एकमात्र सदस्य राहुल गांधी ने मांग की थी कि जब तक सुप्रीम कोर्ट कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई न कर ले तब तक चयन प्रक्रिया को टाल दिया जाए। वही राहुल गांधी ने गुरुवार को CEC ज्ञानेश कुमार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार उस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं जिन्हें वे साजिशकर्ता कहते हैं. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने जो किया है वह देशहित के खिलाफ है. राहुल गांधी ने दावा किया है कि उनके पास बहुत सारी जानकारी है और जल्द ही इसके नतीजे सामने आएंगे।

‘वोट चोरी’ और ‘कानून चोरी’ से जोड़कर राहुल गांधी का हमला

राहुल गांधी ने इस मुद्दे को ‘वोट चोरी’ और ‘कानून चोरी’ से जोड़ा. राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने इसके लिए CEC को दोषी माना था। इन आरोपों और दावों के बीच चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि अलग-अलग राय और आंतरिक चर्चा संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। वहीं, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से पिछले दस महीनों में कम से कम 14 औपचारिक आपत्तियों का जिक्र किया गया है।

SIR में फॉर्म-6 को लेकर क्या है पूरा विवाद?

दरअसल यह पूरा विवाद मुख्य रूप से मतदाता सूचियों की एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान नाम जोड़ने, हटाने और डेटा हैंडलिंग को लेकर उपजा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग होने वाले ‘फॉर्म-6’ में यह नियम जोड़ा गया कि आवेदक को यह बताना होगा कि क्या एसआईआर के दौरान उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम वोटर लिस्ट में था या नहीं। यदि था, तो उनका वोटर आईडी कार्ड नंबर और विवरण देना आवश्यक किया गया।

वहीं, इस मामले पर चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि बिना कानून या विधिवत अनुमति के फॉर्म के प्रारूप में इस तरह का बदलाव करना अधिकार क्षेत्र से बाहर और गैर-कानूनी है।

कौन हैं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार?

आपको बता दे की ज्ञानेश कुमनार 1988 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। उन्होंने 19 फरवरी 2025 को निवर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह पदभार संभाला था। उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने (ICFAI) इंडिया से बिजनेस फाइनेंस और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पर्यावरण अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है। वह 1988 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं।

साल 2016 से 2021 तक गृहमंत्रालय के संयुक्त और अतिरिक्त सचिव रहने के दौरान महत्वपूर्ण कश्मीर संभाग का नेतृत्व किया और वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने तथा राज्य के पुनर्गठन के समय प्रमुख प्रशासनिक भूमिका निभाई। ज्ञानेश कुमनार 19 फरवरी 2025 से मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

विपक्षी दलों ने भी इस्तीफे की मांग की

वही राहुल गांधी के इस मुहीम में पूरा विपक्ष उनके समर्थन में नजर आ रही है। आरजेडी, समाजवादी पार्टी, टीएमसी समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने राहुल गांधी के बयानों का समर्थन किया है. RJD ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और बिहार बंगाल सहित अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव रद्द करने की मांग को लेकर शुक्रवार को पटना के सभी जिला मुख्यालयों में पुतला दहन का ऐलान किया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मामले में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. उनका कहना है कि अब यह साफ हो चुका है कि वहीं (ECI) से बेईमानी हो रही थी. उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर बीजेपी की कठपुतली बनकर काम करने का आरोप लगाया।

प्रियंका गांधी और CJP ने भी उठाए सवाल

इधर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार ने जानबूझकर वोटर लिस्ट से लगभग 13 करोड़ नाम हटाने की अनुचित अनुमति देकर चुनाव कराया।

वही कॉकरोच जनता पार्टी ने इस मामले में गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दे दी है. CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके का कहना है कि अगर 48 घंटे के अंदर ज्ञानेश कुमार पद नहीं छोड़ते हैं, तो “जंतर-मंतर 2.0” समेत देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। इस मांग और आरोप को संबंधित नेताओं के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

चिराग पासवान ने कहा- चुनाव आयोग को अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए

इधर चुनाव आयोग को लेकर द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मोदी सरकार में मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि वो सरकार का हिस्सा होने के नाते किसी को डिफेंड नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग के ऊपर सवाल खड़े हो रहे हैं तो यह उनकी जिम्मेदारी है कि वो अपने पक्ष में अपनी बातों को मजबूती से रखें। चिराग ने कहा कि सीईसी को विपक्ष को संतुष्ट करवाने के लिए नहीं बल्कि जनता को विश्वास में लेने के लिए अपने पक्ष को मजबूती से रखना चाहिए।

आज देश के अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन की तैयारी

गौरतलब है की शुक्रवार को यानी आज इस मामले में देश के अलग-अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शन होने वाला है. RJD ने शुक्रवार को पटना में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए पटना के सभी जिलों में उनका पुतला फूंकेगी. वहीं, कांग्रेस आज देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी। पंजाब में कांग्रेस नेता सचिन पायलट के नेतृत्व में यह प्रदर्शन होगा. तो वहीं, दिल्ली में कांग्रेस के कार्यकर्ता, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव और AICC दिल्ली प्रभारी काज़ी निज़ामुद्दीन के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे।

अब नजर इस बात पर है कि आज के देशव्यापी प्रदर्शन का असर कितना व्यापक होता है, विपक्ष अपनी मांगों को किस स्तर तक ले जाता है और चुनाव आयोग इन आरोपों पर आगे क्या स्पष्टीकरण देता है। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों में एक तरफ दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई औपचारिक आपत्तियों का विवरण सामने आया है, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR समेत उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। इसलिए इस पूरे विवाद में आरोप, राजनीतिक दावे और चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति अलग-अलग पक्षों के रूप में सामने रखी जा रही हैं।