BRICS समिट 2026: मोदी-पुतिन की मुलाकात, रूस ने किया बड़ा ऐलान

  • September 11, 2026
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BRICS समिट 2026 में पीएम मोदी पुतिन और शी जिनपिंग की बैठक

दिल्ली में तीन दिन चलेगा बड़े नेताओं की मुलाकातों का दौर

तीन चेहरे…तीन महाशक्तियां…और एक मंच—भारत की राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम! एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन…और सामने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग! क्या मोदी-पुतिन की पुरानी दोस्ती और मोदी-जिनपिंग की नई केमिस्ट्री मिलकर BRICS की नई तस्वीर लिखने जा रही है? क्या मोदी की इन मुलाकातों से दुनिया की राजनीति में नया पावर गेम शुरू होगा? और क्या भारत एक बार फिर बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच सबसे अहम खिलाड़ी बनकर उभरेगा?

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों दुनिया कई बड़े नेताओं से मिलने वाले हैं और यह सिलसिला तीन दिन तक चलेगा. शुक्रवार से रविवार तक भारत मंडपम और हैदराबाद हाउस में लगातार बैठकों का दौर चलेगा, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत करीब एक दर्जन देशों के नेता शामिल होंगे। यही तीन दिन दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के भी दिन हैं, जिसके चलते राजधानी में स्कूलों की छुट्टी, कड़ी सुरक्षा और भारी ट्रैफिक बदलाव लागू हैं. वही रुसी राष्ट्रपति पुतिन शुक्रवार को ही भारत पहुंच चुके हैं और उनकी यह यात्रा व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के मकसद से हो रही है।

11 सितंबर को सुरक्षा और तैयारियों पर फोकस

आज यानी 11 सितंबर का दिन मुख्य रूप से तैयारी और सतर्कता का दिन है. शिक्षा निदेशालय के तहत आने वाले सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में आज छुट्टी घोषित कर दी गई है, ताकि ट्रैफिक की वजह से बच्चों को परेशानी न हो. सुरक्षा के मोर्चे पर भी पहले से तैयारी की जा चुकी है. दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद पुलिस के बीच पहले ही समन्वय बैठक हो चुकी है, जिसमें ड्रोन से निगरानी, होटलों की जांच और सीमा पर चेकिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी.

इससे पहले मोटरकेड की रिहर्सल भी हो चुकी है, जिसके दौरान करीब 35 सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित हआ था और 22 जगहों पर डायवर्जन लागू किया गया था। वही कल का दिन समिट के लिहाज से सबसे बड़ा दिन है, क्योंकि इसी दिन भारत मंडपम में ब्रिक्स देशों के नेताओं का आगमन शुरू होगा. दोपहर दो बजे से सभी नेता भारत मंडपम के लेवल-2 पर पहुंचना शुरू करेंगे, जहां उनका आधिकारिक फोटो शूट भी होगा. इसके थोड़ी देर बाद, दोपहर सवा दो बजकर पैंतीस मिनट पर नेताओं की बंद कमरे में बैठक होगी, जिसका मुख्य विषय समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना है. यानी इस बैठक में यह चर्चा होगी कि दुनिया के बड़े फैसलों में सभी देशों की भागीदारी कैसे बढ़े।

13 सितंबर को BRICS समिट का आखिरी दिन

परसों यानी 13 सितंबर को इस समिट का दूसरा और आखिरी दिन है. इस दिन साझेदार और आमंत्रित देशों के नेता सुबह पौने दस बजे भारत मंडपम पहुंचेंगे. इसके बाद सुबह साढ़े दस बजे इन नेताओं की ग्रुप फोटो होगी और ठीक इसके बाद पौने ग्यारह बजे समिट का ओपन सेशन शुरू होगा, जिसमें आम तौर पर सार्वजनिक बयान और बड़े ऐलान होते हैं. इसी दिन के साथ 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन औपचारिक रूप से पूरा हो जाएगा।

पुतिन की भारत यात्रा क्यों है खास?

आपको बता दे की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को अपनी तीन दिन की भारत यात्रा पर पहुंचे, जिसका मकसद ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेना और पीएम मोदी से मिलकर द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाना है. पुतिन के साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है. फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब पुतिन रूस के बाहर किसी ब्रिक्स समिट में खुद मौजूद रहेंगे।

भारत की मेजबानी में हो रहा यह दो दिन का समिट खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और जरूरी सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सामूहिक मजबूती बढ़ाने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है. भारत इस मंच को एक ऐसे मजबूत सहारे के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है जो बंटी हुई वैश्विक राजनीति के बीच काम आ सके. दरसल यह समिट ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट खासकर होर्मुज की नाकेबंदी, और ट्रंप प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीतियों के असर से जूझ रही है।

BRICS समिट में कौन-कौन से बड़े नेता होंगे शामिल?

वही इस समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन ह्यंग जैसे बड़े नेता शामिल हो रहे हैं।

दरअसल पुतिन और मोदी की शुक्रवार दोपहर होने वाली विस्तृत द्विपक्षीय बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, तकनीक, दवा उद्योग और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को बताया था कि दोनों पक्ष ब्रह्मोस मिसाइल को अपग्रेड करने के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं और मॉस्को एस-400 सिस्टम की बची हुई डिलीवरी पूरी करने के साथ साथ सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की संभावित सप्लाई पर भी बातचीत जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

रूसी अधिकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध मजबूत बने हुए हैं और दोनों पक्ष भारत में नए सिविल परमाणु रिएक्टर लगाने की योजना पर भी बातचीत करने पर विचार कर रहे हैं।

मोदी-शी जिनपिंग की बैठक पर दुनिया की नजर

वही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह 2020 के सीमा विवाद के बाद दोनों नेताओं की संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिशों का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। मोदी और शी की अक्टूबर 2024 में कज़ान BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। उस बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर जोर दिया था।

इस बार बातचीत में सीमा पर शांति, व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला, आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं।

ईरान के राष्ट्रपति से भी अहम होगी पीएम मोदी की बातचीत

इसके साथ ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठक भी खास महत्व रखती है। दोनों नेताओं की पहली मुलाकात अक्टूबर 2024 में कज़ान BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस समय मोदी ने ईरान का BRICS परिवार में स्वागत किया और चाबहार बंदरगाह, व्यापार, कनेक्टिविटी तथा पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की थी।

इसके बाद दोनों नेताओं की अगस्त 2026 में बिश्केक SCO शिखर सम्मेलन के दौरान भी द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार और कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई। अब दिल्ली में होने वाली बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय शांति, चाबहार बंदरगाह, कनेक्टिविटी और भारत-ईरान आर्थिक सहयोग पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है।

मोदी-पुतिन, मोदी-शी और मोदी-पेजेशकियन बैठक का क्या असर होगा?

कुल मिलाकर इन तीनों बैठकों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है। संगठन के विस्तार और बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत अपनी रणनीतिक भागेदारी, वैश्विक दक्षिण की आवाज और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

BRICS के दौरान मोदी-पुतिन, मोदी-शी और मोदी-पेजेश्कियन बातचीत से न केवल भारत के द्विपक्षीय संबंधों को दिशा मिलेगी, बल्कि यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे व्यापक मुद्दों पर भी संकेत मिल सकते हैं।