जितेंद्र मिश्रा कौन हैं? ऑपरेशन सिंदूर के नायक बने राम मंदिर के पहले CEO

  • September 2, 2026
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जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर के पहले CEO नियुक्त

जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO

करीब चार दशक तक देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले जितेंद्र मिश्रा अब राम मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। दरसल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के व्यवस्थित और प्रभावी संचालन के लिए पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले जितेंद्र मिश्रा अब अयोध्या के राम मंदिर की प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था को नई दिशा देंगे।

तो आखिर कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा? कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक उनका क्या रहा है कनेक्शन? और राम मंदिर ट्रस्ट ने आखिर उन्हीं पर क्यों जताया भरोसा? दरअसल उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में पहले CEO की नियुक्ति हो गई है। अब CEO के नेतृत्व में ही मंदिर की तमाम व्यवस्था का संचालन होगा। ट्रस्ट के सचिव के निर्देश पर CEO राम मंदिर की तमाम गतिविधियों और व्यवस्था का संचालन करेंगे।

राम मंदिर में CEO की नियुक्ति क्यों हुई?

दरअसल, राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी का मामला सामने आने के बाद से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए थे। भक्तों की आस्था पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। इसके बाद ट्रस्ट ने CEO की नियुक्ति का निर्णय लिया। करीब 2 महीने चली प्रक्रिया के बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया है।

यानी अब मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कामकाज, ऑपरेशनल व्यवस्था और प्रबंधन को एक पेशेवर नेतृत्व देने की जिम्मेदारी जितेंद्र मिश्रा के कंधों पर होगी। ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी। ये नियुक्ति ऐसे वक्त हुई है जब राम मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और मंदिर परिसर के साथ-साथ सुरक्षा, व्यवस्थापन और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी लगातार बेहतर सिस्टम की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में जितेंद्र मिश्रा के लंबे प्रशासनिक और सैन्य अनुभव को राम मंदिर की व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कारगिल युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका

दरसल जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं. जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के बेहद सम्मानित और साहसी फाइटर पायलट रहे हैं. 1999 के कारगिल युद्ध यानी (ऑपरेशन सफेद सागर) के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी. वह उस विशेष तकनीकी टीम के प्रमुख सदस्य थे, जिसने मिराज 2000 लड़ाकू विमानों में लेजर-गाइडेड बमों को फिट (इंटीग्रेट) करने का असंभव सा दिखने वाला काम कर दिखाया था.

इन्हीं सटीक बमों के जरिए टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर छिपे दुश्मनों के ठिकानों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद किया गया था. इस अचूक मिशन ने कारगिल युद्ध का रुख भारत के पक्ष में मोड़ने में बेहद निर्णायक भूमिका अदा की थी। बता दे की पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे. अपने 38 वर्षों से अधिक के लंबे सेवाकाल में उनके नाम 3000 से अधिक घंटी का सुरक्षित उड़ान अनुभव दर्ज है. उन्होंने सेवा के दौरान 18 से अधिक किस्म के फाइटर जेट मालवाहक विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए, इसके अलावा वे वायुसेना के कुशल फाइटर कॉमौर लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रहे हैं.

भारतीय वायुसेना में रहा लंबा और सम्मानित करियर

उनकी इसी असाधारण और अनुकरणीय सेवा के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों-सर्वोतम बुद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से नवाजा जा चुका है। आपको बता दे की जितेंद्र मिश्रा न केवल एक बेहतरीन पायलट रहे हैं, बल्कि उनका प्रशासनिक रिकॉर्ड भी बेहद मजबूत रहा है. वे देश की सबसे महत्वपूर्ण पश्चिमी वायु कमान’ के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं.

इसके साथ ही उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में ऑपरेशंस और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट और बरेली (15 विंग) और पठानकोट (18 विंग) जैसे संवेदनशील एयरबेस की कमान बतौर एयर ऑफिसर कमांडिंग संभाली है. शिक्षा की बात करें तो वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खडकवासला और वायुसेना अकादमी इंडीगल के छात्र रहे हैं. उन्होंने अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के मशहूर ‘रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज’ से आधुनिक रणनीति और सुरक्षा का उच्च प्रशिक्षण हासिल किया है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभाली पश्चिमी वायु कमान

वही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वे पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व कर रहे थे। इस दौरान पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना की रणनीतिक और ऑपरेशनल जिम्मेदारी उनके कमांड के तहत थी। उनके सैन्य अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें उत्कृष्ट युद्ध सेवा से जुड़े सम्मान से भी नवाजा गया। देश के आसमान और सीमाओं की रक्षा करने के बाद पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा अब राम मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन करेंगे। यही वजह है कि राम मंदिर ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी नियुक्ति को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है की राम मंदिर के पहले सीईओ के रूप में जीतेन्द्र मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब मंदिर निर्माण के चरण से आगे बढ़कर व्यवस्थित संचालन और व्यापक धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।

राम मंदिर के संचालन में होंगी बड़ी चुनौतियां

प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, कर्मचारी प्रबंधन, श्रद्धालु सुविधाओं का विस्तार और विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जैसी चुनौतियां महत्वपूर्ण होंगी।

ऐसे में भारतीय वायुसेना में हासिल उनका अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, रणनीतिक प्रबंधन और बड़े संस्थानों के संचालन का अनुभव राम मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तो कारगिल के मोर्चे से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक…और अब अयोध्या के राम मंदिर तक। जितेंद्र मिश्रा के करियर ने एक नया मोड़ लिया है। वायुसेना की वर्दी उतारने के कुछ ही महीनों बाद…अब उनके कंधों पर राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO की जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी—राम मंदिर की बढ़ती वैश्विक पहचान के साथ उसकी व्यवस्थाओं को भी विश्वस्तरीय बनाना।