JSSC-CGL Exam Row: 98% मांगें मानने के दावे के बाद भी क्यों नहीं थम रहा छात्रों का आंदोलन?

  • August 13, 2026
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झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर प्रदर्शन करते छात्र

झारखंड में JSSC-CGL को लेकर छात्रों का आंदोलन 20 दिन से जारी है। सरकार 98% मांगें मानने का दावा कर रही है, लेकिन परीक्षा रद्द और CBI जांच की मांग पर मामला अटका है

JSSC-CGL को लेकर 20 दिन से छात्रों का आंदोलन

झारखंड में परीक्षाओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। एक तरफ सरकार का दावा है कि प्रदर्शन स्थल पर किसी तरह की जबरदस्ती नहीं हो रही है और छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं। वहीं प्रदर्शनकारी छात्र इस दावे से सहमत नहीं हैं।

दरअसल JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्यभर के छात्र 20 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। रांची में 9 अगस्त को छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच तीसरे राउंड की बातचीत हुई। सरकार के अनुसार, छात्रों की 98% मांगें मान ली गई हैं। लेकिन छात्रों की बची हुई 2% मांगों पर ही पूरा मामला अटक गया है। बातचीत के दौरान रिफॉर्म मंच ने सरकार से पूछा कि JSSC-CGL परीक्षा रद्द क्यों नहीं की जा रही और इसकी CBI जांच क्यों नहीं कराई जा रही है।

इस पर सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कराई गई है। कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है, ऐसे में CGL परीक्षा को रद्द करना संभव नहीं है। हालांकि बातचीत के दौरान सरकार ने छात्रों को न्यायिक जांच कराने के लिए तैयार होने का आश्वासन दिया। सरकार के मुताबिक, रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जब JPSC परीक्षाएं रद्द हो सकती हैं तो JSSC-CGL क्यों नहीं?

रांची की सड़कों पर लाठियां खा चुके और पिछले 20 दिनों से आंदोलन कर रहे युवाओं के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है। वो ये है कि जब सरकार 14वीं JPSC और बैकलॉग परीक्षाएं रद्द कर सकती है, तो JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने में उनके हाथ क्यों कांप रहे हैं?

हाल ही में हेमंत सोरेन सरकार के प्रतिनिधि और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने छात्र प्रतिनिधिमंडलों के साथ करीब 6 घंटे तक लंबी वार्ता की। सरकार का दावा है कि उसने छात्रों की 98% मांगें मान ली हैं, लेकिन जिस JSSC-CGL परीक्षा को लेकर सबसे ज्यादा बवाल है, उसे रद्द करने से सरकार ने साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि छात्र इस परीक्षा के खिलाफ आंदोलन क्यों कर रहे हैं और सरकार इसे रद्द करने में असमर्थ होने का दावा क्यों कर रही है।

क्या है JSSC-CGL परीक्षा का पूरा मामला?

दरअसल जिस परीक्षा को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं, उसका पूरा नाम झारखंड जनरल ग्रेजुएट लेवल कंबाइंड कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन (JGGLCCE) है। आम बोलचाल में इसे JSSC-CGL कहा जाता है। इसके जरिए झारखंड सरकार के अलग-अलग विभागों और कार्यालयों में ग्रुप ‘B’ और ग्रुप ‘C’ के कई पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं।

2023 में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC ने JGGLCCE-2023 (Regular) और JGGLCCE-2023 (Backlog) के नाम से विज्ञापन जारी किया था। इन पदों के लिए करीब 6.40 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। बैकलॉग विज्ञापन-2023 के तहत रिजर्व कैटेगरी के लिए जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट के पदों पर आवेदन लिए गए थे। दोनों विज्ञापनों के लिए आवेदन अलग-अलग थे, लेकिन परीक्षा एक ही आयोजित की जानी थी।

JSSC-CGL रद्द करने पर सरकार का कानूनी तर्क क्या है?

दरअसल सरकार का सबसे बड़ा तर्क कानूनी है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने साफ कहा कि JSSC-CGL परीक्षा का आयोजन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और उनकी निगरानी में किया गया है। सरकार का कहना है कि जब कोई मामला सीधे शीर्ष अदालतों की निगरानी में हो, तो राज्य सरकार के पास इसे ‘एकतरफा’ रद्द करने का अधिकार नहीं है।

बिना किसी ठोस कानूनी आधार के इसे रद्द करने से मामला सीधे ज्यूडिशियल रिव्यू यानी न्यायिक समीक्षा में फंस सकता है। सरकार का दूसरा तर्क यह है कि CGL परीक्षा की प्रक्रिया अब काफी आगे बढ़ चुकी है। रिजल्ट प्रकाशित हो चुके हैं और कई सफल उम्मीदवार अपनी-अपनी पोस्टिंग पर जॉइन भी कर चुके हैं। ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द करने से जो उम्मीदवार सेलेक्ट हो चुके हैं, वे कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं और पूरी प्रक्रिया सालों तक के लिए लटक सकती है।

छात्रों की मांग CBI जांच, सरकार चाहती है CID जांच

वहीं छात्रों की स्पष्ट मांग है कि CGL की पूरी परीक्षा रद्द हो और मामले की CBI जांच हो। लेकिन सरकार का स्टैंड इसके उलट है। सरकार ने CBI जांच की मांग भी ठुकरा दी है। इसके बजाय सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि CID जांच करेगी और उसकी निगरानी के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएगी। सरकार का कहना है कि अगर CID जांच में बड़े वित्तीय लेन-देन के सबूत मिलते हैं, तो वह इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से भी जांच का आग्रह करेगी। लेकिन सरकार का कहना है कि परीक्षा किसी कीमत पर रद्द नहीं की जाएगी।

छात्रों ने सरकार के 98% मांगें मानने के दावे को खारिज किया

इधर आंदोलनकारी छात्र सरकार के इस तर्क को सिरे से खारिज कर रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार 98% मांगें मानने का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत कुछ और है।छात्रों का तर्क है कि उन्होंने 13 विवादित परीक्षाओं में से सिर्फ 3 परीक्षाएं रद्द की हैं। इनमें 14वीं JPSC प्रीलिम्स और JPSC बैकलॉग 2023, 2025 शामिल हैं।

छात्रों का आरोप है कि जब पेपर लीक और TDPL एजेंसी के फर्जीवाड़े के पूरे सबूत हैं, तो कोर्ट के नाम पर सिर्फ सिंडिकेट को बचाया जा रहा है। यह आरोप आंदोलनकारी छात्रों का पक्ष है। इसे स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि छात्रों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

JSSC-CGL विवाद पर अब भी नहीं बनी सहमति

इस समय स्थिति यह है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन जांच अभी भी जारी है। छात्र JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग पर अड़े हैं, जबकि सरकार न्यायिक जांच की बात कर रही है और परीक्षा रद्द करने से इनकार कर रही है। यही वजह है कि JSSC-CGL विवाद झारखंड में छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।