हमें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, मिर्च स्प्रे किया और पत्थर भी मारे’ | दिल्ली पुलिस कर्मियों की आपबीती | Delhi Protest News
संसद मार्च के दौरान आखिर क्या हुआ?
दरअसल, राजधानी दिल्ली में संसद मार्च के दौरान उस समय हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारी और पुलिस आमने-सामने आ गए। शुरुआत में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग के जरिए रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। इसके बाद स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गई और धक्का-मुक्की हिंसक झड़प में बदल गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
दिल्ली पुलिस का दावा है कि इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया, जिससे कई जवान घायल हो गए।
वहीं, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। घटना के बाद पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया और हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। फिलहाल, दोनों पक्षों के आरोपों की जांच की जा रही है और जांच एजेंसियां उपलब्ध वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने में जुटी हैं।
पुलिसकर्मियों का दावा
घायल पुलिसकर्मियों ने घटना के बाद मीडिया और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपने अनुभव साझा करते हुए दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें चारों तरफ से घेर लिया गया था। उनके मुताबिक, भीड़ ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, लगातार पत्थर फेंके और मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया, जिससे कई जवानों की आंखों में तेज जलन हुई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा।
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस पूरी घटना में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें कांस्टेबलों के साथ-साथ एसीपी और डीसीपी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। कई पुलिसकर्मियों के सिर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं, जबकि कुछ अधिकारी ड्यूटी के दौरान गिर पड़े और साथी जवानों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाले गए।
हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए जांच एजेंसियां मेडिकल रिपोर्ट, ड्यूटी रिकॉर्ड और घटनास्थल से मिले वीडियो साक्ष्यों का भी मिलान कर रही हैं, ताकि पूरे मामले की तथ्यात्मक तस्वीर सामने लाई जा सके।
संपत्ति को कितना नुकसान हुआ?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि हिंसा केवल पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस दौरान सरकारी वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार, कई सरकारी वाहनों के शीशे तोड़े गए और आसपास की सार्वजनिक संपत्तियों को भी क्षति पहुंची। इसके बाद हिंसा, सरकारी कार्य में बाधा, तोड़फोड़ और अन्य धाराओं के तहत कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों के आरोप
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों और कुछ पत्रकारों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बलपूर्वक रोका गया। कुछ पत्रकारों ने भी घटनास्थल पर धक्का-मुक्की और रिपोर्टिंग में बाधा आने की बात कही है। इसी बीच, सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर पथराव दिखाई देता है, जबकि कुछ में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल, जांच एजेंसियां इन सभी वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की क्रमवार जांच कर रही हैं।
जांच कैसे चल रही है?
घटना के बाद दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियों ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो, ड्रोन फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही, घायल पुलिसकर्मियों, प्रदर्शनकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों की पहचान हिंसा में शामिल होने के रूप में होगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं बल प्रयोग से जुड़े आरोपों की भी अलग से जांच होगी ताकि पूरे घटनाक्रम का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।
सुरक्षा बढ़ाई गई
घटना के बाद जंतर-मंतर और संसद के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा किसी प्रकार की हिंसक स्थिति पैदा न हो। घायल पुलिसकर्मियों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। वहीं, लोगों से अपील की गई है कि किसी भी विरोध-प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से करें और कानून अपने हाथ में न लें। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक ओर कुछ दलों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी ओर कई नेताओं ने हिंसा की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े प्रदर्शनों में संवाद, भीड़ प्रबंधन और संयम सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। कुल मिलाकर, अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि हिंसा कैसे शुरू हुई, किसकी क्या भूमिका थी और कानून के अनुसार आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।


