तेज प्रताप यादव की RJD में वापसी?एक हुए लालू के कृष्ण और अर्जुन!

  • July 29, 2026
  • 0
  • 5 Views
बेउर जेल से रिहाई के बाद तेज प्रताप यादव का सांकेतिक चित्र।

Tej Pratap Yadav News: रिहाई के बाद परिवार से मुलाकात, क्या लालू परिवार में बढ़ रही है नजदीकी?

रिहाई के बाद तेज प्रताप यादव फिर चर्चा में

बिहार की राजनीति में एक बार फिर परिवार और सियासत का संगम चर्चा में है। सवाल ये है कि क्या राष्ट्रीय जनता दल में लंबे समय से चल रही पारिवारिक खींचतान खत्म होने वाली है?

क्या तेज प्रताप यादव की लालू यादव के घर में दोबारा एंट्री होगी? और क्या तेजस्वी यादव के एक बयान ने इन अटकलों को और हवा दे दी है?

दरअसल, जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

छात्र आंदोलन के बीच हुई गिरफ्तारी और रिहाई

हाल ही में NEET पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन का असर बिहार में भी साफ दिखाई दिया।

पटना से लेकर सीवान, छपरा, भागलपुर, बांका, बेगूसराय और सहरसा तक हजारों छात्र सड़कों पर उतरे। इसी दौरान कई जगहों पर छात्रों और नेताओं को गिरफ्तार किया गया, जिनमें तेज प्रताप यादव भी शामिल थे।

वहीं, अब उनकी रिहाई हो चुकी है। लेकिन इस रिहाई ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल पैदा कर दी है।

परिवार से मुलाकात ने बढ़ाईं अटकलें

दरअसल, पिछले कुछ महीनों से परिवार और राजनीति, दोनों मोर्चों पर अलग-थलग दिख रहे तेज प्रताप जैसे ही बेउर जेल से बाहर आए, उनकी पहली मंजिल कोई राजनीतिक मंच नहीं बल्कि माता राबड़ी देवी और परिवार का घर बना।

राबड़ी देवी के घर से सामने आई खबरों ने बिहार की राजनीति में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लालू परिवार में रिश्तों की बर्फ पिघलने लगी है? क्या लंबे समय से चली आ रही नाराजगी खत्म होने की शुरुआत हो चुकी है?

तेजस्वी यादव के रुख पर भी बढ़ी चर्चा

तेजस्वी यादव ने पहले भाई की गिरफ्तारी का खुलकर विरोध किया था। वहीं, रिहाई के बाद दोनों भाइयों का आमने-सामने मिलना राजनीतिक गलियारों में नए संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

खुद को कृष्ण और तेजस्वी को अर्जुन बताने वाले तेज प्रताप की यह मुलाकात भी काफी अहम मानी जा रही है।

हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों भाइयों के रिश्तों में दूरी की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में जेल से रिहाई के तुरंत बाद परिवार के बीच हुई यह मुलाकात कई राजनीतिक संकेत दे रही है।

फिलहाल, लालू परिवार के बीच हुई बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

रिहाई के बाद समर्थकों का स्वागत

तेज प्रताप के जेल से बाहर निकलते ही बड़ी संख्या में समर्थक वहां पहुंच गए। उनके समर्थन में नारेबाजी भी की गई।

हालांकि, तेज प्रताप पूरे समय शांत दिखाई दिए और मीडिया के सवालों का जवाब दिए बिना वहां से निकल गए।

उनकी यह चुप्पी भी कई तरह की राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे रही है।

गौरतलब है कि, तेजस्वी यादव ने भाई की गिरफ्तारी के बाद सरकार पर तीखा हमला बोला था और चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें जल्द रिहा नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

गिरफ्तारी कैसे हुई थी?

आपको बता दें कि, 25 जुलाई को बिहार बंद और छात्र आंदोलन के दौरान तेज प्रताप यादव प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

पहले उन्हें गांधी मैदान थाना पुलिस ने हिरासत में लिया और कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। लेकिन, रिहा होने के बाद वे फिर आंदोलन में शामिल हो गए।

इसी बीच, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अभिजीत दीपके को बिहार आने और राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का आह्वान किया।

इसके कुछ घंटे बाद पुलिस ने हिंसा से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

सरकार के फैसले के बाद हुई रिहाई

वहीं, बिहार सरकार ने छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज 64 एफआईआर वापस लेने का फैसला किया है।

इसी निर्णय के बाद आंदोलन में शामिल कई लोगों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ। प्रशासन ने जेलों में बंद प्रदर्शनकारियों को चरणबद्ध तरीके से रिहा करने का आदेश जारी किया।

इसी प्रक्रिया के तहत तेज प्रताप यादव भी बेउर जेल से बाहर आए।

क्या होगी आरजेडी में वापसी?

दरअसल, तेज प्रताप यादव को पहले राष्ट्रीय जनता दल से निष्कासित किया जा चुका है। बाद में उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई।

ऐसे में परिवार और राजनीति दोनों स्तर पर दूरी साफ दिखाई देती रही। लेकिन, रिहाई के बाद परिवार से मुलाकात ने यह संकेत जरूर दिया है कि संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।

हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उनकी दोबारा आरजेडी या लालू परिवार की राजनीतिक गतिविधियों में औपचारिक वापसी होगी। इस पर अंतिम फैसला परिवार और पार्टी नेतृत्व के रुख के बाद ही साफ होगा।

बांकीपुर उपचुनाव पर क्या पड़ेगा असर?

बांकीपुर उपचुनाव से ठीक पहले यह घटनाक्रम लालू परिवार के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

ऐसे में, वोटिंग से पहले लालू परिवार एकजुट नजर आता है तो इसका राजनीतिक संदेश भी अलग हो सकता है।

बांकीपुर सीट पर बीजेपी के साथ-साथ आरजेडी की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। वहीं, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी मैदान में हैं और उनकी नजर दोनों दलों के वोट बैंक पर है।

यदि चुनावी समीकरण बदले, तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

अब सबकी नजर किस पर है?

गौर करने वाली बात यह भी है कि तेज प्रताप यादव समय-समय पर खुद को लालू यादव की राजनीतिक विरासत का हिस्सा बताते रहे हैं। कई मौकों पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे परिवार के साथ हैं।

वहीं, आरजेडी की ओर से अभी तक उनकी औपचारिक वापसी या किसी नई जिम्मेदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

फिलहाल, तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन तेजस्वी यादव के बयान और हालिया घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जरूर जन्म दे दिया है।

अब सबकी नजर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के अगले कदम पर टिकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या परिवार की दूरियां खत्म होंगी और क्या इसका असर बिहार की आगामी राजनीति पर भी देखने को मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *