रूसी तेल से ईंधन निर्यात 43% बढ़ा, पश्चिमी देशों को सप्लाई में जामनगर रिफाइनरी आगे

  • October 21, 2026
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रूसी तेल से ईंधन निर्यात और भारत की जामनगर रिफाइनरी

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: रूसी तेल से ईंधन निर्यात को लेकर नई रिपोर्ट सामने आई है। रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद कई देशों में रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद पहुंच रहे हैं। वहीं, भारत की जामनगर रिफाइनरी की भूमिका भी चर्चा में है।

दरअसल, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने सितंबर 2026 के आंकड़े जारी किए हैं। इसके अनुसार, रूसी तेल प्रोसेस करने वाली कुछ रिफाइनरियों का पश्चिमी देशों को निर्यात 43 प्रतिशत बढ़ा।

हालांकि, यह बढ़ोतरी भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की रिफाइनरियों के संयुक्त निर्यात से संबंधित है।

रूसी तेल से ईंधन निर्यात 43% कैसे बढ़ा?

CREA की रिपोर्ट में सितंबर 2026 के अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार का विश्लेषण किया गया है।

दरअसल, भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की कुछ रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करती हैं।

इन रिफाइनरियों ने प्रतिबंध लगाने वाले देशों को लगभग एक अरब यूरो के तेल उत्पाद निर्यात किए।

वहीं, अगस्त के मुकाबले इस निर्यात में 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

इसके अलावा, रिपोर्ट में अलग-अलग देशों को भेजे गए ईंधन का विवरण भी दिया गया है।

हालांकि, एक अरब यूरो के सभी उत्पाद केवल रूसी तेल से नहीं बने थे।

पश्चिमी देशों ने कितना ईंधन खरीदा?

रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ सबसे बड़ा खरीदार रहा।

सितंबर में संबंधित रिफाइनरियों से यूरोपीय संघ को 667 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद भेजे गए।

वहीं, ऑस्ट्रेलिया को 168 मिलियन यूरो के उत्पाद निर्यात किए गए।

इसके अलावा, अमेरिका को 154 मिलियन यूरो का निर्यात हुआ।

न्यूजीलैंड ने भी 19 मिलियन यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद खरीदे।

हालांकि, ये आंकड़े तीन देशों की संबंधित रिफाइनरियों के संयुक्त निर्यात को दर्शाते हैं।

मुकेश अंबानी की जामनगर रिफाइनरी क्यों चर्चा में है?

गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बड़ा रिफाइनरी परिसर स्थित है।

इसकी अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका है।

दरअसल, CREA ने यूरोपीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाले सात जहाजों का उल्लेख किया है।

इनमें से छह जहाज जामनगर रिफाइनरी से रवाना हुए थे।

वहीं, सातवां जहाज तुर्किये की रिफाइनरी से आया था।

इसके अलावा, अमेरिका को भेजे गए तेल उत्पादों में भी जामनगर की बड़ी हिस्सेदारी रही।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के लिए जामनगर से 122 मिलियन यूरो के उत्पाद भेजे गए।

इसलिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार में जामनगर रिफाइनरी फिर चर्चा में है।

क्या पश्चिमी देश रूस का तेल खरीद रहे हैं?

इस सवाल को समझने के लिए कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का अंतर जानना जरूरी है।

दरअसल, कच्चे तेल को रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाता है।

इसके बाद डीजल, पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद तैयार होते हैं।

वहीं, कुछ देश रूस से सीधे तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल से बने कुछ रिफाइंड उत्पादों पर भी प्रतिबंध लागू किया है।

हालांकि, अलग-अलग देशों के प्रतिबंधों और आयात नियमों में अंतर है।

इसलिए केवल तीसरे देश से ईंधन आने का मतलब यह नहीं है कि उसका आयात स्वतः कानूनी है।

CREA की रिपोर्ट में 295 मिलियन यूरो का क्या मतलब है?

CREA ने रिफाइनरियों के निर्यात का अलग से विश्लेषण किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल एक अरब यूरो के तेल उत्पादों में लगभग 295 मिलियन यूरो के उत्पाद रूसी कच्चे तेल से बने होने का अनुमान है।

यानी सभी निर्यातित उत्पादों को रूसी मूल का नहीं माना गया।

वहीं, रिपोर्ट में तेल की उत्पत्ति और रिफाइनरियों की खरीद संबंधी जानकारी का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, यह एक शोध आधारित अनुमान है।

इसलिए वास्तविक आपूर्ति की जांच में व्यापारिक रिकॉर्ड और नियामक दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं।

भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात कितना घटा?

सितंबर 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटा।

दरअसल, CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के मुकाबले इसमें 13 प्रतिशत की कमी आई।

इसके अलावा, यह अप्रैल 2026 के बाद का सबसे कम मासिक स्तर था।

हालांकि, भारत रूसी जीवाश्म ईंधन के बड़े खरीदारों में शामिल रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में भारत ने रूस से 4.1 अरब यूरो के जीवाश्म ईंधन खरीदे।

वहीं, इसमें 3.6 अरब यूरो का हिस्सा कच्चे तेल का था।

इसके अलावा, कोयला और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद भी खरीदे गए।

जामनगर रिफाइनरी में कितना रूसी तेल इस्तेमाल हुआ?

CREA ने जामनगर में कच्चे तेल की खरीद का भी विश्लेषण किया।

दरअसल, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच जामनगर के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 32 प्रतिशत थी।

वहीं, सितंबर में जामनगर का रूसी तेल आयात पिछले महीने से 27 प्रतिशत कम हुआ।

इसके बावजूद रिफाइनरी अंतरराष्ट्रीय निर्यात में सक्रिय रही।

हालांकि, किसी रिफाइनरी से निकले हर उत्पाद को रूसी तेल से बना मानना सही नहीं होगा।

इसलिए मूल स्रोत और तैयार उत्पादों की आपूर्ति अलग-अलग समझनी चाहिए।

यूरोप में कौन-कौन से देशों को ईंधन मिला?

CREA की रिपोर्ट में यूरोपीय संघ के बंदरगाहों पर पहुंचे सात जहाजों का उल्लेख है।

इनमें इटली के बंदरगाहों पर तीन जहाज पहुंचे।

वहीं, रोमानिया में दो जहाजों की आपूर्ति दर्ज हुई।

इसके अलावा, स्पेन और साइप्रस में एक-एक जहाज पहुंचा।

हालांकि, रिपोर्ट ने इन आपूर्तियों को प्रतिबंध संबंधी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।

इसलिए संबंधित नियामक एजेंसियों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

रूस पर प्रतिबंधों के बावजूद तेल व्यापार कैसे जारी है?

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद कई पश्चिमी देशों ने ऊर्जा संबंधी प्रतिबंध लगाए।

इनका उद्देश्य रूस के ऊर्जा राजस्व पर दबाव बढ़ाना है।

हालांकि, वैश्विक तेल आपूर्ति कई देशों और कंपनियों से जुड़ी होती है।

दरअसल, रिफाइनरियां अलग-अलग स्रोतों से कच्चा तेल खरीदती हैं।

इसके बाद तैयार उत्पाद दूसरे देशों को निर्यात किए जाते हैं।

वहीं, प्रतिबंधों में उत्पाद की उत्पत्ति और व्यापार के नियम महत्वपूर्ण होते हैं।

इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति की निगरानी जरूरी बनी हुई है।

रूसी तेल से ईंधन निर्यात का भारत पर क्या असर होगा?

भारत अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वहीं, भारतीय रिफाइनरियां घरेलू बाजार के साथ विदेशी ग्राहकों को भी आपूर्ति करती हैं।

इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमत और शिपिंग खर्च व्यापार को प्रभावित करते हैं।

हालांकि, प्रतिबंधों में बदलाव से कुछ निर्यात मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।

इसलिए कंपनियों को नियमों और व्यापारिक परिस्थितियों पर नजर रखनी होगी।

वहीं, किसी विशेष कंपनी पर कानूनी कार्रवाई का निष्कर्ष केवल इस रिपोर्ट के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।

रूसी तेल से ईंधन निर्यात को लेकर आगे क्या होगा?

फिलहाल, CREA की सितंबर 2026 की रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार पर नए सवाल उठाए हैं।

रिपोर्ट में पश्चिमी देशों को निर्यात बढ़ने की जानकारी दी गई है।

वहीं, जामनगर रिफाइनरी से यूरोप और अमेरिका को हुई आपूर्ति भी चर्चा में है।

हालांकि, रिपोर्ट के आंकड़े रिफाइनरियों के संयुक्त व्यापार और अनुमानित रूसी मूल के उत्पादों में अंतर करते हैं।

इसके अलावा, भविष्य का निर्यात प्रतिबंधों, बाजार की मांग और कच्चे तेल की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

इसलिए आने वाले महीनों में ऊर्जा व्यापार से जुड़े नए आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।

आपकी क्या राय है? रूस पर प्रतिबंधों के बीच तीसरे देशों से होने वाले ईंधन व्यापार के लिए नियम कितने स्पष्ट होने चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।