चाइना ओपन बैडमिंटन में भारत को शुरुआती झटका, एचएस प्रणय और देविका सिहाग पहले दौर में बाहर
चाइना ओपन में भारत की शुरुआत निराशाजनक क्यों रही?
दरअसल, चाइना ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट में भारतीय टीम को पहले ही दिन बड़ा झटका लगा है। भारत के दो खिलाड़ी शुरुआती दौर में हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए, जिससे टीम का अभियान उम्मीद के मुताबिक शुरू नहीं हो सका। वहीं, अनुभवी शटलर एचएस प्रणय और महिला खिलाड़ी देविका सिहाग दोनों अपने-अपने पहले मुकाबले में जीत दर्ज करने में असफल रहे। ऐसे में, भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों की उम्मीदों को शुरुआती चरण में ही बड़ा झटका लगा है और अब टूर्नामेंट में बाकी खिलाड़ियों पर बेहतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
एचएस प्रणय का प्रदर्शन उम्मीदों पर क्यों खरा नहीं उतर पाया?
एचएस प्रणय से इस टूर्नामेंट में काफी उम्मीदें थीं। अपने अनुभव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार रिकॉर्ड के दम पर वह मजबूत शुरुआत करने के इरादे से कोर्ट पर उतरे थे। हालांकि, मुकाबले के दौरान वह लगातार अपनी लय बनाए नहीं रख सके और कई महत्वपूर्ण मौकों पर विपक्षी खिलाड़ी ने बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद मैच का नियंत्रण पूरी तरह प्रतिद्वंद्वी के हाथ में चला गया। निर्णायक अंकों पर प्रणय वापसी नहीं कर सके और पहले ही दौर में हार के साथ उनका अभियान समाप्त हो गया।
देविका सिहाग की हार की मुख्य वजह क्या रही?
वहीं, महिला एकल वर्ग में देविका सिहाग भी पहले दौर की चुनौती पार नहीं कर सकीं। उन्होंने मुकाबले में कई शानदार रैलियां खेलीं और विरोधी खिलाड़ी को कड़ी टक्कर देने की कोशिश की। लेकिन, निर्णायक क्षणों में महत्वपूर्ण अंक हासिल करने में असफल रहने के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में, उनका चाइना ओपन अभियान भी पहले ही मुकाबले के बाद समाप्त हो गया। हालांकि उनके संघर्षपूर्ण प्रदर्शन ने यह जरूर दिखाया कि भविष्य में वह बड़े मंच पर बेहतर परिणाम देने की क्षमता रखती हैं।
चाइना ओपन खिलाड़ियों के लिए इतना महत्वपूर्ण टूर्नामेंट क्यों माना जाता है?
गौरतलब है कि, चाइना ओपन दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बैडमिंटन टूर्नामेंटों में गिना जाता है, जहां विश्व के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। यही वजह है कि यहां हर मुकाबला बेहद प्रतिस्पर्धी होता है और खिलाड़ियों को प्रत्येक अंक के लिए पूरी ताकत झोंकनी पड़ती है। इसके अलावा, इस स्तर के टूर्नामेंट विश्व रैंकिंग सुधारने, अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने और बड़े मंच पर अपनी पहचान मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान करते हैं। छोटी-सी गलती भी पूरे मैच का परिणाम बदल सकती है।
भारतीय टीम के सामने अब क्या चुनौती है?
प्रणय और देविका की शुरुआती हार के बाद अब भारतीय टीम की उम्मीदें बाकी खिलाड़ियों पर टिकी हुई हैं। वहीं, कोचिंग स्टाफ आगामी मुकाबलों के लिए नई रणनीति तैयार करने में जुट गया है ताकि शुरुआती गलतियों को दोहराने से बचा जा सके। भारतीय बैडमिंटन ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। ऐसे में, टीम चाहेगी कि बाकी खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर भारत की चुनौती को टूर्नामेंट में आगे बढ़ाएं और शुरुआती झटके की भरपाई करें।
क्या भारत अभी भी टूर्नामेंट में मजबूत वापसी कर सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े बैडमिंटन टूर्नामेंट में शुरुआती हार के बाद भी वापसी की पूरी संभावना रहती है। भारतीय खिलाड़ी पहले भी कई बार दबाव भरे मुकाबलों से उबरकर शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। फिलहाल, एचएस प्रणय और देविका सिहाग का बाहर होना निश्चित रूप से निराशाजनक है, लेकिन भारत की उम्मीदें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। कुल मिलाकर, अब सभी की नजरें बाकी भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेंगी कि क्या वे चाइना ओपन में मजबूत वापसी कर देश के अभियान को आगे बढ़ा पाते हैं।


