बिहार बाढ़: डूबे मकान, लापता सड़कें… गंगा के उफान से हाहाकार

  • September 14, 2026
  • 0
  • 2 Views
बिहार बाढ़ में डूबे मकान और पानी में चलती नाव

बिहार बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा

दरसल बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है…नदियों का पानी अब गांवों और शहरों की बस्तियों में दाखिल हो चुका है… कहीं मकान डूब गए हैं, कहीं सड़कें पानी में गुम हो गई हैं… और हजारों परिवार राहत और सुरक्षित ठिकाने के इंतजार में हैं। गंगा समेत कई नदियों के बढ़ते जलस्तर ने हालात को और गंभीर बना दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के 15 जिलों में 49 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

गंगा की पानी पानी बढ़ा… तो सबसे पहले घर छूटा। किसी ने जरूरी सामान समेटा…किसी ने बच्चों को कंधे पर उठाया…तो कोई अपने बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित जगह की तलाश में निकल पड़ा। कई इलाकों में लोग घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं। सामने सिर्फ पानी है…पीछे डूबता हुआ घर…और बीच में जिंदगी बचाने की जद्दोजहद।

15 जिलों में 49 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में

दरअसल बिहार में बाढ़ का असर अब 15 जिलों तक पहुंच चुका है. 48.70 लाख से ज्यादा लोग इसकी चपेट में हैं और 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित हैं. इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं।

जहां सड़कें और रास्ते पानी में घिर गए हैं, वहां नाव लोगों के लिए सबसे जरूरी साधन बन गई है. प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में करीब 1,790 नावें लगाई हैं. इनका इस्तेमाल लोगों को निकालने के साथ जरूरी आवाजाही के लिए भी किया जा रहा है। हालाँकि पानी का स्तर कुछ जगह कम होने लगा है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. गंगा कई जगह अभी भी उफान पर है. पुनपुन, बागमती और घाघरा नदियां भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

बाढ़ के बीच मवेशियों को बचाने की भी चुनौती

वही बाढ़ के बीच लोगों की चिंता सिर्फ अपने घर और परिवार को बचाने तक सीमित नहीं है. ग्रामीण इलाकों में लोगों को अपने मवेशियों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है. कई जगह लोग अपने साथ पशुओं को लेकर ऊंची जगहों की ओर जाने को मजबूर हैं।

इधर बिहार में बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई पर भी खासा असर पड़ा है. बच्चे पढ़ाई के लिए नदी पार करने को मजबूर हैं. पानी के बीच यह सफर उनके लिए रोज का जोखिम बन गया है। कई प्रभावित इलाकों में पानी लोगों के घरों और आसपास के हिस्सों तक पहुंच गया है. ऐसे में परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता अपने लोगों को सुरक्षित रखने के साथ जरूरी सामान बचाने की भी है. पानी के बीच रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है।

राहत शिविरों में हजारों लोगों के रहने की व्यवस्था

जिन लोगों को बाढ़ वाले इलाकों से निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है, उनके लिए 13 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं. इनमें करीब 12,260 लोगों के रहने, खाने और इलाज की व्यवस्था है. दूसरी ओर, 1,257 कम्युनिटी किचन प्रभावित लोगों तक खाना पहुंचाने का काम कर रही हैं। इसके अलावा मवेशियों के लिए चारा पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में जानवरों को बचाने के साथ उनके भोजन की व्यवस्था बनाए रखना लोगों के लिए एक और बड़ी चिंता है।

जलभराव से आवाजाही हुई मुश्किल

वही मवेशियों के लिए चारा पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में जानवरों को बचाने के साथ उनके भोजन की व्यवस्था बनाए रखना लोगों के लिए एक और बड़ी चिंता है। जलभराव के कारण कई इलाकों में आवाजाही भी मुश्किल है. पानी भरे रास्तों पर लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है. खतरे को देखते हुए कई जगह सामान्य रास्तों का पर आवाजाही रोकनी पड़ रही है। दरसल बिहार के लिए इस बार बाढ़ की तस्वीर इसलिए भी असामान्य है क्योंकि पूरे मानसून में राज्य में बारिश सामान्य से कम रही थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक 1 जून से 8 सितंबर के बीच बिहार में सामान्य से करीब 27 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद सितंबर में हालात तेजी से बदले और नदियों का जलस्तर बढ़ गया।

पटना और भागलपुर में गंगा ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

गंगा का जलस्तर पटना और भागलपुर में अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर को भी पार कर चुका है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का पानी 50.58 मीटर तक पहुंचा… जबकि पिछला उच्चतम स्तर 2016 में 50.52 मीटर दर्ज किया गया था। बढ़ते जलस्तर के बीच कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पानी के कारण घरों, सड़कों और रोजमर्रा की आवाजाही पर असर पड़ा है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अब सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित रहने के साथ-साथ पानी के उतरने का इंतजार करना है।

बाढ़ में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने अलग-अलग चुनौतियां

दरसल बाढ़ में सबसे ज्यादा मुश्किल उन परिवारों की है…जिनके पास न सुरक्षित घर है…न पर्याप्त खाना…और न ही बाहर निकलने का कोई साधन। बच्चों के सामने बीमारी का खतरा है…बुजुर्गों के सामने दवाइयों का संकट= और महिलाओं के सामने रोजमर्रा की जरूरतों की चुनौती। राहत कैंपों में पहुंचने वाले परिवारों की सबसे बड़ी चिंता है—बाढ़ का पानी आखिर कब उतरेगा? फिलहाल लोगो को पानी कम होने का इंतजार है…तो बिहार की ये तस्वीर सिर्फ बाढ़ की तस्वीर नहीं…ये उन लाखों लोगों की कहानी है…जो पानी के बीच खड़े होकर भी…मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं।