दिल्ली से झारखंड पहुंचे बिरयानी वालेमोहम्मद जुनैद ने किया बड़ा ऐलान!

  • August 7, 2026
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रांची में JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर प्रदर्शन करते छात्र 'No Job No Shaadi' पोस्टर के साथ।

Jharkhand Student Protest News: रांची में ‘No Job No Shaadi’ पोस्टर वायरल, JPSC-JSSC भर्ती विवाद पर छात्रों का आंदोलन तेज

‘No Job No Shaadi’ पोस्टर ने खींचा पूरे देश का ध्यान

झारखंड की राजधानी रांची में चल रहा छात्रों और नौकरी अभ्यर्थियों का आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। इस प्रदर्शन की सबसे चर्चित तस्वीरों में छात्र-छात्राएं “No Job, No Shaadi” लिखे पोस्टर लेकर नजर आ रहे हैं। यह नारा केवल एक पोस्टर नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की निराशा और संघर्ष को दर्शाता है जो वर्षों से सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और कथित अनियमितताओं से परेशान हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगे और जीवन के अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी प्रभावित होते रहेंगे। यही कारण है कि यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और देशभर में इस आंदोलन की पहचान बन गया।

JPSC और JSSC भर्ती विवाद को लेकर आंदोलन 14वें दिन में पहुंचा

दरअसल, JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और बापू वाटिका के आसपास प्रदर्शनकारी छात्र धरने पर बैठे हैं। आंदोलन शुक्रवार को 14वें दिन में प्रवेश कर गया, जबकि छह छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हुए हैं। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, कटऑफ सार्वजनिक न करने और मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं।

उनकी प्रमुख मांग है कि पूरे मामले की स्वतंत्र CBI जांच कराई जाए तथा भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार लागू किए जाएं। देर रात प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन प्रतिनिधिमंडल की संरचना पर सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। सूत्रों के अनुसार, सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आगे भी बातचीत की संभावना बनी हुई है।

CID की जांच तेज, अब तक 19 गिरफ्तार

इसी बीच, JPSC भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही झारखंड CID ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दूसरी ओर छात्र संगठन लगातार यह कह रहे हैं कि केवल गिरफ्तारियां पर्याप्त नहीं हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि भर्ती प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बहाल हो सके। प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने तथा मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों की समिति से कराने की मांग भी कर रहे हैं।

रांची पहुंची CJP की टीम, मोहम्मद जुनैद भी आंदोलन में शामिल

इस आंदोलन ने तब और अधिक ध्यान खींचा जब दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान छात्रों के बीच भोजन वितरण को लेकर चर्चा में आए मोहम्मद जुनैद भी रांची पहुंच गए। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के बीच भोजन बांटते उनके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिस तरह दिल्ली में छात्रों के मुद्दों को लेकर संघर्ष किया गया था, उसी तरह झारखंड में भी छात्रों के साथ खड़ा रहेंगे।

उन्होंने JPSC और JSSC मामलों की CBI जांच की मांग दोहराई और कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अभिजीत दिपके, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका तथा अन्य स्वयंसेवक भी आंदोलन में शामिल होने वाले हैं। जुनैद ने उम्मीद जताई कि दिल्ली की तरह यह आंदोलन भी अपनी मांगों को मनवाने में सफल होगा। यह उनके सार्वजनिक बयान हैं।

विधानसभा तक पहुंचा आंदोलन, सरकार ने बनाई समिति

25 जुलाई से जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले शुरू हुआ यह आंदोलन अब झारखंड के हालिया वर्षों के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में गिना जा रहा है। इसका असर झारखंड विधानसभा तक भी पहुंचा, जहां विपक्षी दलों ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार को घेरा और CBI जांच की मांग दोहराई।

वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही कह चुके हैं कि पेपर लीक जैसी समस्या केवल झारखंड तक सीमित नहीं है और सरकार छात्रों से बातचीत के लिए तैयार है। गतिरोध समाप्त करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता के लिए एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित की है। उधर, भूख हड़ताल पर बैठे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। जानकारी के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने उनसे फोन पर बातचीत की, जिसके बाद उन्होंने पानी पीना शुरू किया।

अनुशासित आंदोलन बना अलग पहचान

इस आंदोलन की एक और खास बात इसकी अनुशासित कार्यशैली है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन को केवल भर्ती और छात्रों के मुद्दों तक सीमित रखा जाएगा। कई वायरल वीडियो में छात्र आयोजक राजनीतिक, धार्मिक या अन्य विवादित नारों से दूरी बनाने की अपील करते दिखाई दिए।

आयोजकों का कहना है कि यह छात्रों का स्वाभाविक और स्वतंत्र आंदोलन है तथा इसकी दिशा छात्र स्वयं तय करेंगे। यही कारण है कि रांची का यह आंदोलन केवल अपनी मांगों की वजह से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से किए जा रहे प्रदर्शन के कारण भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत से क्या कोई समाधान निकलता है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का जवाब किस तरह दिया जाता है।