NEET आंदोलन जारी: इस्तीफे की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी, PM मोदी के ऐलान के बाद भी गतिरोध बरकरार
आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
दरअसल, NEET पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों और युवाओं के बीच परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू हुआ, जहां छात्र परीक्षा सुधार, जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल पेपर लीक के आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। वहीं, सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारी संगठन ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया है। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, कथित तौर पर पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग शामिल है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर सरकार की ओर से इन मांगों पर अभी तक कोई औपचारिक सहमति सामने नहीं आई है।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
पेपर लीक विवाद के बाद जांच एजेंसियों ने मामले की जांच तेज की और कई संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का फैसला घोषित किया।
सरकार का कहना है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का प्रयास होगा। सरकार इस कदम को परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण मान रही है।
बातचीत में क्यों नहीं बनी सहमति?
आंदोलन के दौरान सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई। जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया, लेकिन प्रदर्शनकारी संगठन ने प्रस्तावित स्थान पर बैठक से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर वार्ता की मांग की।
उनका कहना था कि बातचीत ऐसे स्थान पर होनी चाहिए जहां दोनों पक्ष समान स्थिति में चर्चा कर सकें। इस कारण फिलहाल औपचारिक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
पुलिस कार्रवाई और विवाद
20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। दिल्ली पुलिस के अनुसार इस घटना में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए और 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।
कई मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। इन आरोपों और पुलिस के दावों की जांच अलग-अलग स्तर पर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है।
मेट्रो स्टेशनों पर असर
आंदोलन और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली में राजीव चौक, सेंट्रल सचिवालय, ITO और खान मार्केट समेत कई मेट्रो स्टेशनों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए। इससे प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ आम यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन का कहना था कि यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल आंदोलन जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं। दूसरी ओर सरकार जांच, कानूनी कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसी पहल को समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।
ऐसे में, आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी समाधान तक पहुंचते हैं या आंदोलन और लंबा चलता है। पूरे मामले पर अब छात्रों, अभिभावकों, शिक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।


