जानिए दिल्ली पुलिस का सीक्रेट ऑपरेशन…जिससे खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन

  • July 20, 2026
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जंतर-मंतर से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाती दिल्ली पुलिस।

दिल्ली पुलिस ने कैसे हटाया सोनम वांगचुक? जानिए 3-फेज ऑपरेशन, ग्रीन कॉरिडोर और पूरी प्लानिंग

जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाने का पूरा ऑपरेशन

दिल्ली के जंतर-मंतर से पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने ऐसा ऑपरेशन चलाया, जिसकी तैयारी कई दिनों से बेहद गोपनीय तरीके से की जा रही थी। थ्री-फेज प्लान, ग्रीन कॉरिडोर और बिना वर्दी की पुलिस… आखिर कैसे हुआ ये पूरा ऑपरेशन?


पुलिस ने सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों पहुंचाया?

दरसअल दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने धरनास्थल से हटाते हुए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया. सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 21वां दिन था। जंतर-मंतर पर मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों ने सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने का विरोध किया। इस वजह से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी वाले हालात बन गए हालांकि पुलिस ने हालात को संभाल लिया। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि वे जंतर-मंतर को जल्द से जल्द खाली कर दें।


ऑपरेशन की गोपनीय प्लानिंग कैसे हुई?

वहीं, पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी लगातार बिगड़ती सेहत और दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों को देखते हुए उठाया गया. हालांकि, इस पूरी कार्रवाई के पीछे की प्लानिंग भी बेहद गोपनीय और सुनियोजित बताई जा रही है। दिल्ली पुलिस के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, नए पुलिस आयुक्त के कार्यभार संभालने के बाद हुई पहली उच्चस्तरीय बैठक में वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके बाद तय किया गया कि ऑपरेशन सुबह के उस समय किया जाएगा, जब प्रदर्शन स्थल पर सबसे कम लोग मौजूद हों और किसी तरह के टकराव की आशंका भी कम रहे। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने कार्रवाई के लिए ऐसा समय चुना, जब वांगचुक के करीबी सहयोगी अभिजीत दिपके कुछ देर के लिए प्रदर्शन स्थल से बाहर गए हुए थे. इसी दौरान करीब 30 से 35 पुलिसकर्मी, जिनमें नई दिल्ली जिले की स्पेशल स्टाफ और स्थानीय पुलिस के जवान शामिल थे, सादे कपड़ों में बैरिकेडिंग के भीतर पहुंचे. फिर पुलिस ने पूरे ऑपरेशन को तीन चरणों पर अंजाम दिया।


3-फेज ऑपरेशन में क्या-क्या हुआ?


इसके बाद, पहले चरण में बिना वर्दी वाले पुलिसकर्मियों ने मंच को अपने नियंत्रण में लिया. इसके बाद सोनम वांगचुक के बिस्तर को चारों तरफ से बड़ी सफेद चादरों से ढक दिया गया ताकि वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी न फैले. इसके बाद उन्हें सावधानी से उठाकर एंबुलेंस तक ले जाया गया. दूसरा चरणः सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने बैरिकेडिंग के बाहर मोर्चा संभाला. उनका काम प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित रखना और किसी भी संभावित टकराव को रोकना था और तीसरा चरण: दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कंट्रोल पॉइंट से पूरे ऑपरेशन की निगरानी करते रहे. एंबुलेंस और पुलिस वाहनों की आवाजाही पर भी लगातार नजर रखी गई। जैसे ही सोनम वांगचुक को एंबुलेंस में ले जाया गया, ट्रैफिक पुलिस ने पहले से तैयार ग्रीन कॉरिडोर के जरिए सफदरजंग अस्पताल तक का रास्ता पूरी तरह खाली कराया. इससे एंबुलेंस बिना किसी रुकावट के सीधे अस्पताल पहुंच गई।


अभिजीत दीपके ने पुलिस कार्रवाई पर क्या आरोप लगाए?

इधर पुलिस की इस कार्रवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर ही भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. मंच पर बैठे हुए दीपके अचानक भावुक हो गए और फुट फुट कर रो पड़े. सीजेपी चीफ का मंच पर भावुक होने का वीडियो सामने आया है. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि जब वह कुछ समय के लिए जंतर-मंतर से बाहर गए थे, उसी दौरान पुलिस ने कार्रवाई कर सोनम वांगचुक को वहां से हटा दिया। उन्होंने पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट और लाठीचार्ज का भी आरोप लगाया। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडिंग प्रेसिडेंट अभिजीत दीपके ने कहा,

‘मैं आज से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर रहा हूं. मैं सभी से अपील करता हूं कि वे पीछे न हटें. यह आंदोलन और बड़ा होगा. हमारा आंदोलन यहां से जारी रहेगा और हम 20 जुलाई को होने वाले अपने मार्च के साथ आगे बढ़ेंगे।

विपक्षी नेताओं ने आंदोलन को कैसे समर्थन दिया?


बता दे की बीते कुछ दिनों में दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, सपा सांसद डिंपल यादव सहित विपक्ष के कई नेता जंतर-मंतर पहुंचे थे और उन्होंने वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन किया था। इससे पहले सोनम वांगचुक ने कहा था कि वह किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक जिंदा रहेंगे। वांगचुक ने लोगों से अपील की थी कि वे 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित मार्च में बड़ी संख्या में शामिल हों लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटा दिया।


सोनम वांगचुक की पत्नी ने क्या अपील की?


इधर सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि बिना उनके सहमति के वांगचुक के मुँह या नसों के ज़रिए कुछ भी नहीं दिया जाए. गीतांजलि ने एक्स पर लिखा, ”मैं दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हूँ, जहाँ सोनम वांगचुक को भर्ती कराया गया है. कृपया उन्हें मुँह के ज़रिए या नसों के माध्यम से कोई भी दवा या तरल पदार्थ तब तक न दिया जाए, जब तक मुझसे, उनके परिवार से और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत पर नज़र रख रहे डॉक्टरों से सहमति न ले ली जाए।


आंदोलन की मांगें क्या हैं?


गौरतलब है की सीजेपी 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है. वही सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। इनकी मांग है कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें, कथित परीक्षा घोटालों की न्यायिक जांच कराई जाए और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं।


पुलिस और डॉक्टरों का ताजा अपडेट

इस घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए जंतर-मंतर पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि जंतर-मंतर पर डटे सभी प्रदर्शनकारी जल्द से जल्द और शांतिपूर्ण ढंग से इस स्थान को खाली कर दें। इधर सोनम वांगचुक की मेडिकल टीम ने उनकी सेहत को लेकर नया अपडेट जारी किया है. डॉक्टरों के मुताबिक, फिलहाल उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य संकेत सामान्य हैं. हालांकि जांच में यह भी सामने आया है कि उनका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सामान्य से कम है. वहीं, उनकी ECG रिपोर्ट सामान्य बताई गई है।


आगे क्या होगा?

तो सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने का ऑपरेशन भले कुछ घंटों में पूरा हो गया, लेकिन इससे उठे सवाल फिलहाल खत्म होते नहीं दिख रहे. अब देखना होगा कि यह मामला सड़क से अदालत और सियासत तक कितना लंबा सफर तय करता है? फिलहाल आप इस खबर को लेकर क्या सोचते है अपनी राय हमें कमैंट्स में जरूर बताए।

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