Prashant Kishor Family News: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने पीके के परिवार और निजी जीवन की पूरी कहानी
बांकीपुर उपचुनाव के बीच फिर चर्चा में आए प्रशांत किशोर
बिहार की राजनीति में इन दिनों यदि किसी नाम की सबसे अधिक चर्चा हो रही है तो वह जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर हैं, जिन्हें देशभर में लोग पीके के नाम से जानते हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों में मिली बढ़त ने उन्हें एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
कभी देश के बड़े नेताओं और राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर अब अपनी अलग राजनीतिक पहचान स्थापित करने की कोशिश में जुटे हैं। उनकी चुनावी रणनीति, राजनीतिक अभियान और जन सुराज को लेकर लगातार चर्चा हो रही है, लेकिन इसके साथ ही लोग उनके परिवार, पत्नी, बेटे और निजी जीवन के बारे में भी जानना चाहते हैं। आखिर वह किस परिवार से आते हैं और उनके परिवार के सदस्य क्या करते हैं?
बांकीपुर उपचुनाव ने फिर बढ़ाई पीके की चर्चा
दरअसल, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की लड़ाई लगातार दिलचस्प होती गई। मतगणना के शुरुआती चरणों में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बढ़त बनाई, जिसके बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं ने जन्म लिया। बांकीपुर लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
यहां से नितिन नवीन लगातार कई चुनाव जीत चुके हैं और उनसे पहले उनके पिता भी इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। ऐसे राजनीतिक समीकरणों के बीच प्रशांत किशोर की चुनौती ने चुनाव को हाई-प्रोफाइल बना दिया। इसी वजह से राजनीतिक चर्चा के साथ-साथ लोगों की रुचि उनके निजी जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि को जानने में भी बढ़ गई।
रोहतास से शुरू हुआ प्रशांत किशोर का सफर
प्रशांत किशोर का जन्म 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ था। गांव में आज भी उनका पुश्तैनी दो मंजिला मकान मौजूद है। हालांकि उनका बचपन मुख्य रूप से बक्सर और शाहपुर में बीता, क्योंकि उनके पिता सरकारी डॉक्टर थे और वहीं उनकी नियुक्ति रही।
आज भी परिवार का संबंध बक्सर से जुड़ा हुआ माना जाता है। उनके पिता डॉ. श्रीकांत पांडेय सरकारी चिकित्सक थे, जिन्होंने वर्षों तक लोगों की सेवा की। उनकी माता गृहिणी रहीं और परिवार हमेशा सार्वजनिक जीवन से अपेक्षाकृत दूर रहा। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार प्रशांत किशोर के चार भाई-बहन हैं। उनके बड़े भाई अजय किशोर व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि अन्य सदस्य मीडिया और राजनीति से दूरी बनाए रखते हैं।
कौन हैं प्रशांत किशोर की पत्नी और बेटा?
प्रशांत किशोर की पत्नी डॉ. जाह्नवी दास हैं, जो पेशे से डॉक्टर हैं और मूल रूप से असम के गुवाहाटी की रहने वाली बताई जाती हैं। सार्वजनिक जानकारी के अनुसार दोनों की मुलाकात संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान हुई थी। वहीं से दोनों की दोस्ती शुरू हुई और बाद में यह रिश्ता विवाह तक पहुंचा। दोनों का एक बेटा भी है, जिसका नाम चुनावी हलफनामों में दैविक भारद्वाज बताया गया है।
प्रशांत किशोर का परिवार आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों से दूर रहता है। कई अवसरों पर प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक मंचों से अपनी पत्नी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा है कि यदि वह बिहार की राजनीति में पूरा समय दे पा रहे हैं तो इसके पीछे उनकी पत्नी का बड़ा सहयोग है, क्योंकि परिवार की अधिकांश जिम्मेदारियां वही संभालती हैं।
शिक्षा और करियर का सफर
प्रशांत किशोर की शुरुआती पढ़ाई बिहार में हुई। उन्होंने बक्सर में स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद पटना साइंस कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। आगे चलकर उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) के क्षेत्र में कार्य किया और संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े कार्यक्रमों में भी काम किया। बाद में उन्होंने चुनावी रणनीति के क्षेत्र में कदम रखा और धीरे-धीरे देश के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकारों में शामिल हो गए। इसके बाद उन्होंने जन सुराज अभियान की शुरुआत कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
कैसे बने देश के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकार?
प्रशांत किशोर का नाम पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद चर्चा में आया। हालांकि वास्तविक पहचान उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में मिली, जब आधुनिक चुनावी रणनीति, डेटा विश्लेषण और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया।
इसके बाद उन्होंने 2015 बिहार विधानसभा चुनाव, 2017 पंजाब चुनाव, 2019 आंध्र प्रदेश, 2020 दिल्ली, 2021 तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव सहित कई बड़े चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए रणनीति तैयार की। इन चुनावों में मिली सफलताओं के बाद उनकी पहचान देश के सबसे प्रभावशाली चुनावी रणनीतिकारों में होने लगी। बाद में उन्होंने चुनावी सलाहकार की भूमिका से आगे बढ़ते हुए अपनी राजनीतिक पार्टी जन सुराज के जरिए बिहार की राजनीति में सीधे उतरने का फैसला किया।
बिहार की राजनीति में नई पहचान बनाने की कोशिश
बिहार प्रशांत किशोर का गृह राज्य है और वह लंबे समय से यहां राजनीतिक परिवर्तन की बात करते रहे हैं। हालांकि बिहार की राजनीति जातीय समीकरणों, क्षेत्रीय संतुलन और पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रभाव के कारण बेहद जटिल मानी जाती है। इसके बावजूद उन्होंने इसी राज्य से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया।
बांकीपुर उपचुनाव में मिली शुरुआती बढ़त ने उनके राजनीतिक अभियान को नई चर्चा जरूर दी है, लेकिन अंतिम फैसला मतगणना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर अब अपनी अलग राजनीतिक पहचान स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि उनकी राजनीति के साथ-साथ उनके परिवार और निजी जीवन को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ती जा रही है।


