कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा एक बार फिर वापसी कर रहे हैं। 2018 में गोल्ड जीतने वाले नीरज 2022 में चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सके थे। अब ग्लासगो में उनकी वापसी पूरे देश की उम्मीदों से जुड़ी है।
8 साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में लौट रहे हैं नीरज चोपड़ा
कॉमनवेल्थ गेम्स का मंच एक बार फिर नीरज चोपड़ा का इंतजार कर रहा है।
दरअसल, आठ साल बाद नीरज इस प्रतियोगिता में उतरने जा रहे हैं। साल 2018 के गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने इतिहास रचते हुए भारत को जैवलिन थ्रो में पहला स्वर्ण पदक दिलाया था।
हालांकि, इस बार उनके सामने चुनौती पहले से कहीं ज्यादा कठिन मानी जा रही है।
बर्मिंघम में चोट ने तोड़ा था सपना
साल 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सके थे।
ग्रोइन इंजरी की वजह से उन्हें आखिरी समय में प्रतियोगिता से नाम वापस लेना पड़ा था। अब, पूरी तरह फिट होकर उनकी वापसी भारतीय खेल प्रेमियों के लिए बड़ी खबर मानी जा रही है।
ग्लासगो में पहले से ज्यादा कड़ी होगी चुनौती
इस बार ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष जैवलिन प्रतियोगिता का स्तर पहले की तुलना में अधिक मजबूत माना जा रहा है। कई खिलाड़ी लगातार 85 मीटर से अधिक की दूरी हासिल कर चुके हैं, जिससे मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।
वहीं, नीरज अब केवल ओलंपिक चैंपियन ही नहीं, बल्कि विश्व चैंपियन और 90 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले एथलीट भी हैं। ऐसे में हर प्रतिद्वंद्वी की नजर उन्हें चुनौती देने पर होगी।
2018 की तुलना में इस बार मुकाबला अलग
गोल्ड कोस्ट 2018 में नीरज ने 86.47 मीटर की थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था। उस समय प्रतियोगिता का स्तर आज की तुलना में अलग था।
अब, कई खिलाड़ी 86 मीटर या उससे अधिक दूरी तक लगातार थ्रो करने की क्षमता रखते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार स्वर्ण पदक जीतने के लिए केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि हर प्रयास में बेहतरीन प्रदर्शन की जरूरत होगी।
अनुभव है नीरज की सबसे बड़ी ताकत
बड़े टूर्नामेंट में दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करना नीरज चोपड़ा की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है। यही अनुभव उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाता है।
इसके अलावा, हाल के वर्षों में उन्होंने अपनी तकनीक, फिटनेस और रन-अप पर लगातार काम किया है, जिसकी बदौलत वे लंबे समय से विश्व स्तर पर शीर्ष खिलाड़ियों में बने हुए हैं।
भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी अहम मुकाबला
कॉमनवेल्थ गेम्स नीरज चोपड़ा के करियर का बेहद खास हिस्सा रहा है। यहीं से उनके अंतरराष्ट्रीय स्वर्णिम सफर की शुरुआत हुई थी। वहीं, भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी यह प्रतियोगिता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ग्लासगो में क्वालिफिकेशन से लेकर फाइनल तक करोड़ों भारतीयों की नजर नीरज के हर थ्रो पर रहेगी।
मौसम और परिस्थितियां भी निभाएंगी भूमिका
जैवलिन प्रतियोगिता में केवल खिलाड़ी की क्षमता ही नहीं, बल्कि मौसम और हवा की दिशा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।ऐसे में खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
भारतीय दल को उम्मीद है कि नीरज का अनुभव न सिर्फ उन्हें फायदा पहुंचाएगा, बल्कि अन्य भारतीय खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
क्या फिर इतिहास दोहराएंगे नीरज?
नीरज चोपड़ा के लिए यह सिर्फ एक और प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अधूरे सफर को पूरा करने का मौका भी है।बर्मिंघम में जो सपना चोट की वजह से अधूरा रह गया था, उसे अब ग्लासगो में पूरा करने का अवसर है।
कुल मिलाकर, कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन प्रतियोगिता पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी हो चुकी है। ऐसे में नीरज के सामने चुनौती बड़ी जरूर है, लेकिन उनके अनुभव, फिटनेस और बड़े मंच पर लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय प्रशंसकों को उनसे एक और यादगार प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।


