भारत के 21 साल के शटलर आयुष शेट्टी ने दिल्ली में बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में मौजूदा World No.1 और डिफेंडिंग चैंपियन शी यूकी को हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया।
World No.1 को हराकर आयुष शेट्टी ने रचा बड़ा उलटफेर
दिल्ली में बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप के आगाज के साथ ही भारतीय बैडमिंटन को एक ऐसी जीत मिल गई, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। भारत के 21 साल के युवा शटलर आयुष शेट्टी ने पुरुष सिंगल्स के पहले राउंड में मौजूदा वर्ल्ड नंबर-1 और डिफेंडिंग चैंपियन चीन के शी यूकी को हरा दिया। मुकाबला तीन गेम तक चला और आयुष ने 21-14, 13-21, 21-19 से जीत दर्ज की।
पहली नजर में यह एक बड़ा उलटफेर था। एक तरफ दुनिया का नंबर-1 खिलाड़ी था, तो दूसरी तरफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में डेब्यू कर रहा भारतीय खिलाड़ी। लेकिन आयुष के पिछले कुछ महीनों के सफर को देखें तो यह जीत सिर्फ अचानक आया चमत्कार नहीं लगती। आयुष पहले ही दुनिया के बड़े खिलाड़ियों को हराने की क्षमता दिखा चुके हैं।
आयुष के पावर गेम ने बनाया खतरनाक खिलाड़ी
आयुष के खेल में लंबे समय से एक ऐसी खासियत दिखाई दे रही है, जो उन्हें बड़े मुकाबलों में खतरनाक बनाती है। उनकी लंबाई करीब 6 फीट 4 इंच है और उनके पास ऐसा स्मैश है, जो ऊंचे पॉइंट से नीचे आता है।
कोच विमल कुमार पहले ही बता चुके हैं कि आयुष के पास ऐसा पावर गेम है, जिससे वह किसी भी खिलाड़ी को परेशानी में डाल सकते हैं। वहीं उनके शुरुआती कोच कृष्ण कुमार ने भी कम उम्र में ही उनके अंदर आत्मविश्वास और तकनीकी क्षमता देख ली थी।
इसलिए दिल्ली में वर्ल्ड नंबर-1 खिलाड़ी को हराना दुनिया के लिए बड़ा सरप्राइज जरूर था, लेकिन उनके कोचों के लिए यह उस क्षमता की पुष्टि जैसा है, जिसे वे पहले से देखते आए हैं।
कार्कला से शुरू हुआ आयुष का सफर
आयुष शेट्टी को सिर्फ उनके स्मैश के लिए पहचानना उनकी कहानी को अधूरा छोड़ देना होगा। कर्नाटक के कार्कला से आने वाले आयुष ने बचपन में अपने घर के आसपास बैडमिंटन खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके खेल ने परिवार और स्थानीय कोचों का ध्यान खींचा।
बेहतर ट्रेनिंग के लिए वह बेंगलुरु पहुंचे, जहां उन्होंने अलग-अलग कोचों के साथ काम किया। शुरुआती दौर में मोहिट कामत और कृष्ण कुमार ने उनके बेसिक्स, फुटवर्क, ग्रिप और नेट गेम पर काम किया। बाद में विमल कुमार की कोचिंग में उनके पावर गेम और आधुनिक बैडमिंटन की जरूरतों पर ज्यादा काम हुआ।
इस सफर में उनकी प्राकृतिक लंबाई और आक्रामक खेल को व्यवस्थित तकनीक मिली।
शुरुआती कोच कृष्ण कुमार ने पहचानी थी क्षमता
कृष्ण कुमार उन लोगों में हैं, जिन्होंने आयुष को तब देखा था, जब वह अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टार नहीं बने थे। आयुष के शुरुआती विकास पर लिखी रिपोर्टों के मुताबिक, कृष्ण कुमार ने उनके बेसिक्स, फुटवर्क, ग्रिप और नेट प्ले पर काफी काम किया।
खास बात यह थी कि आयुष के अंदर नेट गेम की क्षमता शुरू से ही दिखाई देती थी। उनके शरीर की लंबाई और रैकेट की ऊंचाई ने उन्हें एक अलग तरह का कोर्ट कवरेज दिया।
लेकिन सिर्फ लंबा होना किसी खिलाड़ी को चैंपियन नहीं बनाता। उस लंबाई को सही फुटवर्क, टाइमिंग और स्ट्रोक तकनीक में बदलना जरूरी होता है। यही वह हिस्सा था, जिस पर शुरुआती कोचिंग ने काम किया।
आज जब आयुष दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी को हराते हैं, तो उनके पुराने कोचों की भूमिका भी इस कहानी का अहम हिस्सा बन जाती है।
Shi Yu Qi के खिलाफ बदली कहानी
आयुष और शी यूकी के बीच हुए पिछले कुछ मैचों में शी यूकी का पलड़ा भारी रहा था। अप्रैल के एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में भी शी ने आयुष को सीधे गेम में हराया था। लेकिन दिल्ली में कहानी बदल गई।
आयुष ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और पहला गेम 21-14 से अपने नाम कर लिया। पहले गेम में हारने के बाद शी यूकी ने अपनी रणनीति बदली।
दूसरे गेम में चीनी खिलाड़ी ने आयुष को ज्यादा लंबी रैलियों में खींचा और मैच पर नियंत्रण हासिल किया। आयुष यह गेम 13-21 से गंवा बैठे।
तीसरे गेम में वापसी और ऐतिहासिक जीत
निर्णायक तीसरे गेम में आयुष ने दबाव के बीच शानदार वापसी की। उन्होंने 21-19 से गेम अपने नाम करते हुए मौजूदा वर्ल्ड नंबर-1 और डिफेंडिंग चैंपियन शी यूकी को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।
कुल मिलाकर आयुष ने इस टूर्नामेंट में सिर्फ वर्ल्ड चैंपियन को ही नहीं हराया, बल्कि अपने आलोचकों को भी करारा जवाब दिया है। अब नजर इस बात पर होगी कि वर्ल्ड चैंपियनशिप के अगले मुकाबलों में आयुष अपनी इस शानदार लय को कितना आगे ले जा पाते हैं।


